क्राइम / सीनियर आईएफएस हर्ष कुमार ने एसीअार में दर्ज करवाया फर्जी प्रशंसा पत्र, केस दर्ज



Senior IFS Harsh Kumar files false accusation filed in ACR
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Senior IFS Harsh Kumar files false accusation filed in ACR

  • जालंधर की पलटा इंजीनियरिंग वर्कस के डायरेक्टर अजय पलटा का भी एफअाईअार में नाम 
  • प्रमुख वनपाल कुलदीप लोमिस ने एसीअार में उठाए थे सवाल, फिर मंत्री को दिया था फर्जी पत्र 

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 05:57 AM IST

चंडीगढ़ . अपनी वार्षिक गुप्त रिपोर्ट ठीक कराने के लिए पंजाब सरकार और वन विभाग को फर्जी प्रशंसा पत्र सौंपने के आरोप में विजिलेंस ने वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी और होशियारपुर के वनपाल, अनुसंधान सर्कल हर्ष कुमार और जालंधर की पलटा इंजीनियरिंग वर्कस प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अजय पलटा के खिलाफ मोहाली के विजिलेंस थाने में केस दर्ज किया गया है।

 

ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि कुलदीप कुमार लोमिस प्रधान प्रमुख वनपाल ने हर्ष कुमार की 2014-15 की रिपोर्ट लिखते समय उसके बारे में कुछ प्रतिकूल कथन दर्ज किए थे। इसके बाद हर्ष कुमार ने वन मंत्री को पत्र सौंपा था जिसमें उसने प्रशंसा-पत्र तारीख 4 मई 2015 (जो अतिरिक्त प्रमुख चीफ कंजरवेटर, वन (विकास), एसएएस नगर, पंजाब को भेजा जाना दिखाया गया) की फोटो कापी भी प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न की थी। 


देहरादून की संस्था ने कहा था कि हमने नहीं जारी किया प्रशंसापत्र  : जांच में पाया गया कि प्रशंसा-पत्र डा. अशोक कुमार साईंटिस्ट-एफ, जेनेटिक और वृक्ष उत्पत्ति, वन अनुसंधान संस्था देहरादून (उत्तराखंड) ने जारी ही नहीं किया। यह प्रशंसा-पत्र वन और वन्य जीव सुरक्षा पंजाब के प्रमुख सचिव कार्यालय में तारीख 11 मई 2015 को प्राप्त हुआ।

 

इसके कुलदीप कुमार लोमिस द्वारा इस पत्र की तस्दीक करवाने पर देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्था ने स्पष्ट किया कि यह प्रशंसा-पत्र उसकी तरफ से जारी ही नहीं हुआ और न ही डिसपैच किया गया जबकि मुलजिम हर्ष कुमार वनपाल, विजय कुमार वन रेंज अफ़सर, अनुसंधान सर्कल, होशियारपुर और प्राइवेट व्यक्ति अजय पलटा ने विजिलेंस जांच के दौरान अपने हलफीया बयान में यह बताया कि तारीख 4 मई 2015 को यह पत्र डा. अशोक कुमार, साईंटिस्ट ने देहरादून संस्था में खुद टाइप करके हर्ष कुमार और अजय पलटा की हाजिरी में विजय कुमार को दिया था। 


एफएसएल रिपोर्ट में फर्जी निकले हस्ताक्षर :  प्रवक्ता ने बताया कि जांच में पाया गया कि तारीख 04 मई 2015 को बुद्ध पुर्णिमा की छुट्टी होने के कारण उक्त संस्था का दफ्तर बंद था और छुट्टी वाले दिन इस इंस्टीट्यूट के प्रमुख से मंजूरी लेकर ही यह दफ्तर खोला जा सकता था, परंतु ऐसी कोई भी मंजूरी नहीं मिली।

 

इसके अलावा हर्ष कुमार और उसके साथियों द्वारा तारीख 4 मई 2015 को गाड़ी नं. पीबी.-08 सीएच -7565 में सवार होकर देहरादून संस्था में जाने का बयान किया गया परंतु उस दिन इस गाड़ी के इंस्टीट्यूट में दाखि़ल होने संबंधी फाटकों पर लगे प्रविष्टि रजिस्टरों में कोई इंदराज होना भी नहीं पाया गया। साथ ही जांच प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट के मुताबिक उक्त विवादित प्रशंसा-पत्र पर किए हुए हस्ताक्षर अशोक कुमार, साईंटिस्ट के नहीं हैं और यह पत्र अशोक कुमार, साईंटिस्ट द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कंम्प्यूटर की हार्डडिस्क में भी नहीं मिला। 
 

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