हैल्थ / तेज खर्राटे आने पर 1 घंटे में 60 से 70 बार रुकती है सांस, जान जाने का भी खतरा

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 11:04 AM IST


Snoring causes of many diseases
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Snoring causes of many diseases
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चंडीगढ़ (मनोज अपरेजा). दिन भर काम के बाद रात को चैन की नींद सोने का मजा ही कुछ और है। ऐसे में आपका साथी जोर-जोर से खर्राटे लेने लगे तो साथ सोने वाले की नींद उड़ जाती है। फिर आप समझ नहीं पाते कि खुद सोएं या साथी को उठा दें।

 

खर्राटे को लोग हल्के में लेते हैं। हालांकि हर खर्राटे किसी गंभीर बीमारी का कारण नहीं बनते। लेकिन जब यह बीमारी बढ़ना शुरू हो जाती है ऑब्स्ट्रेक्टिव स्लीप एप्निया जैसी घातक बीमारी के शिकार हो जाते हैं। इसमें आपको काम करते-करते गहरी नींद आ जाती है और कई बार तो ड्राइविंग करते समय भी नींद आ जाती है।

 

इस बीमारी में कई बार सांस बंद होने की दिक्कत आ जाती है। पीजीआई ईएनटी डिपार्टमेंट के डॉ. संदीप बंसल ने बताया कि हम जब स्टडी करते हैं तो ऐसे मरीजों में एक घंटे में 60 से 70 बार सांस बंद होने की दिक्कत देखने को मिलती है।

 

कई मरीजों में 10 सेकंड के लिए सांस बंद होने की दिक्कत भी देखने को मिलती है। ऐसे मरीजों को नींद में हार्ट अटैक आने की संभावना बढ़ जाती है। डॉ. बंसल ने बताया कि ऑब्सट्रेक्टिव स्लीप एप्निया होने पर हार्ट डिजीज, डायबिटीज या ब्रेन स्ट्रोक तक होने की संभावना रहती है।

 

 

डॉ. संदीप बंसल ने बताया कि लगभग 80 फीसदी लोग खर्राटे लेते हैं। हर खर्राटा ऑब्सट्रेक्टिव स्लीप एप्निया हो यह जरूरी नहीं है। इसका पता खर्राटे मारने वाले का बेड पार्टनर या उनके फैमिली मेंबर ज्यादा इसका अंदाजा लगा सकते हैं। ऐसे लोग नींद पूरी होने के बावजूद भी फ्रेश फील नहीं करते।

 

ऑबस्ट्रेक्टिव स्लीप एप्निया (ओएसए) को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। इससे डायबिटीज, हार्ट से संबंधित बीमारियां, हाईपरटेंशन के इलाज में भी दिक्कत आती है।
 

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