खोज / वैज्ञानिकों ने बनाया स्पंज, दावा- दो दिन में ठीक करेगा इन्फेक्शन, शुगर पेशेंट का जख्म भी जल्द भरेगा

डाॅ इंदुपाल काैर, डाॅ गुरपाल सिंह और जाेगा सिंह। डाॅ इंदुपाल काैर, डाॅ गुरपाल सिंह और जाेगा सिंह।
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डाॅ इंदुपाल काैर, डाॅ गुरपाल सिंह और जाेगा सिंह।डाॅ इंदुपाल काैर, डाॅ गुरपाल सिंह और जाेगा सिंह।

  • यूआईपीएस के वैज्ञानिकों और रिसर्च स्कॉलर की खोज को इमटेक में मिल चुका है दूसरा स्थान
  • अब यह टीम हैदराबाद के इनोवेशन एंड नॉलेज पार्क हैदराबाद में सीखेगी बिजनेस की बारीकियां

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2020, 01:02 PM IST

चंडीगढ़. यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेस के वैज्ञानिक और शोधार्थियों ने स्पंज जैसी पट्टी तैयार की है। इसकी खासियत यह है कि इसे शुगर पेशेंट या जलने के बाद होने वाले इन्फेक्शन पर लगाएंगे तो घाव दो दिन में भरने लगेगा। जख्म के ठीक होने के दिन उसके पुराना होने पर निर्भर होंगे।

यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेस (यूआईपीएस) के दो वैज्ञानिकों और रिसर्च स्कॉलर्स की इस खोज को हाल ही में इमटेक में हुए ऑल इंडिया लेवल कंपीटिशन में दूसरा स्थान मिला है। वैज्ञानिकों की यह टीम हैदराबाद के इनोवेशन एंड नॉलेज पार्क हैदराबाद में बिजनेस की बारीकियां सीखेगी और जल्द ही मरीजों को यह पट्टी बाजार में उपलब्ध होगी।

अब तक इसके एनिमल लेवल ट्रायल ही हुए हैं। इस स्पंज नुमा बैंडेज का पेटेंट फाइल किया जा चुका है। सात फरवरी को ब्रिक टेक्नोलॉजी एक्सपोजिशन 2020 में उन्होंने इस रिसर्च को पेश किया था। प्रो इंदु पाल कौर की इस टीम में डॉ गुरपाल सिंह के साथ ही रिसर्च स्कॉलर सिमरजोत संधू और जोगा सिंह शामिल हैं। सिमरजोत अपनी पीएचडी कंप्लीट कर चुकी हैं।


डॉ. कौर करक्युमिन पर कर रही हैं काम
डॉ. कौर लंबे समय से करक्युमिन पर काम कर रही हैं। सदियों से जख्मों के लिए हल्दी का उपयोग होता आया है लेकिन दूध-हल्दी के इस यूज में हल्दी का मुख्य तत्व करक्युमिन शरीर तक सिर्फ 30 फीसदी पहुंचता है। प्रो कौर और सिमरजाेत की तकनीक से वह बिना नुकसानदायक केमिकल का उपयोग किए इसे 60 फीसदी तक शरीर में “समाने’ (ऑब्सर्ब) होने लायक बना चुके थे। आगे इस पर इसी टीम से जोगा सिंह ने काम जारी रखा, जिसमें यूजीसी रीचार्ज फैकल्टी डॉ. गुरपाल ने भी काम किया। उन्होंने करक्यूमिन को प्रो बायोटिक से जोड़ दिया है।

प्रो बायोटिक किसी भी बैक्टीरिया की जख्म के आस-पास बनने वाली वॉल को तोड़ देता है और करक्युमिन अपना काम शुरू कर देता है। उनकी इस स्पंज वाउंड ड्रेसिंग में नैनोकरक्युमिन और प्रोबायोटिक कंबीनेशन होने के कारण असर जल्दी होता है। बाजार में मौजूद एक बड़ी कंपनी की असरकारक जैल से उन्होंने इसका कंपेरिजन किया है। उनकी स्पंज वाउंड ड्रेसिंग अब तक मौजूद दवाअों से 60 फीसदी ज्यादा असरकारक है। उन्होंने 2 इंडियन और 1 यूएस पेटेंट फाइल कर दिया है। टीम टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी विचार कर रही है।

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