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एसएसपी ने एबीवीपी और एसएफएस को वार्निंग दी, प्रोटेस्ट के बजाय पुलिस में दें शिकायत

2 वर्ष पहले
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  • एसएफएस को कहा- तय समय और जगह पर ही करें प्रोटेस्ट
  • एबीवीपी का कहना था कि एसएफएस ने उनकी धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाई है

चंडीगढ़. पिछले 2 दिन से पीयू में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और स्टूडेंट्स फॉर सोसाइटी (एसएफएस) के बीच चल रहे तनाव और विवाद को देखते हुए एसएसपी नीलांबरी जगदले ने दोनों संगठनों के नेताओं से मुलाकात की।
 
डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. इमैनुएल नाहर, डीएसडब्ल्यू वुमन प्रो. नीना कपिलाश और सभी वार्डनों की मौजूदगी में दोनों पार्टियों से अलग-अलग मीटिंग की गई। एबीवीपी का कहना था कि एसएफएस ने उनकी धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाई है। इस पर जगदाले ने कहा कि ऐसे मामलों में खुद प्रोटेस्ट करने के बजाय बेहतर है कि पुलिस कम्प्लेंट की जाए। उन्होंने शांति बनाए रखने का संदेश दिया।
 
एसएफएस के नेताओं से मुलाकात में उन्होंने पहले तो कार्टून के बारे में जानकारी ली। यह उस समय प्रकाशित हुआ था जब कठुआ रेप कांड में खुलासा हुआ था कि बच्ची से 3 दिन तक मंदिर में बलात्कार होता रहा। उनको ऐसे विवादित चीजों से दूर रहने को कहा। इसके साथ ही वार्निँग दी गई कि कोई भी प्रोटेस्ट या प्रोग्राम पहले से परमिशन लेकर किया जाए।
 
कुछ साल पहले भी विवादों की वजह से प्री इलेक्शन कोड ऑफ कंडक्ट तैयार किया था। पुलिस ने पीयू अफसरों को भी डिसिप्लिन में सख्ती के लिए कहा।
 

धार्मिक भावनाएं आहत करना मकसद नहीं
एसएफएस ने नए पोस्टर इश्यू पर बयान जारी करते हुए कहा है कि उनका संगठन उन्नाव रेप केस के खिलाफ विरोध कर रहा था, जिसमें भाजपा के एमएलए मुख्य आरोपी हैं। एबीवीपी उन पर आरोप लगा रही है कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई और एसएफएस कार्यकर्ताओं ने युवतियों के साथ बुरा व्यवहार किया।
 
असल में यह कार्टून अपने आप को राम भक्त कहने वाले और कठुआ व उन्नाव के आरोपियों को बचाने के लिए श्री राम के नाम का इस्तेमाल करने वालों पर सटायर है। यह तथाकथित राम भक्तों का अपमान है जो रावण से भी बड़े राक्षस है।
 
यह सर्वविदित है कि बीजेपी और आरएसएस के मेंबर्स ने दोनों ही मामलों में रेप के आरोपियों का साथ दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अथॉरिटी ने एबीवीपी के कहने पर नोटिस बोर्ड पर नोटिस को बदला पहले लिखा गया था कि नोटिस बोर्ड सिर्फ डिपार्टमेंटल एक्टिविटीज के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन बाद में इसको एसएफएस के पोस्टर से जोड़ दिया गया लड़कियों से बदतमीजी का आरोप भी झूठा है। ऐसा नहीं किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं किया है और न ही लड़कियों से बदतमीजी की है। इसे धार्मिक रंग देकर मुख्य मुद्दे को दबाया जा रहा है।
 

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