चंडीगढ़ / प्लास्टिक को जलाकर निकालेंगे ईंधन गैस, बचत होगी इंजन में इस्तेमाल



Students presented models that will solve problems of society and environment in PEC's open house.
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Students presented models that will solve problems of society and environment in PEC's open house.

  • पेक के ओपन हाउस में स्टूडेंट्स ने दिखाए अपने मॉडल
  • ये मॉडल समाज और पर्यावरण की समस्याओं को दूर करने की हैं कोशिश 

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 02:21 PM IST

चंडीगढ़. पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी में आयोजित ओपन हाउस में सभी डिपार्टमेंट्स से लगभग 40 ऐसे मॉडल स्टूडेंट्स ने पेश किए जो समाज और पर्यावरण की समस्याओं को दूर करने की कोशिश हैं। ये प्रोटोटाइप तकनीक में सुधार और कॉस्ट इफेक्टिवनेस, स्टैंडर्डाइजेशन आदि प्रोसेस के कारण अगले दशक में लोगों को मिल सकेें।  

 

इसी कोशिश में जुटे हैं युवा इंजीनियरर्स। पेक के करियर एंड गाइडेंस सेल की ओर से हर साल यह ओपन हाउस स्कूली बच्चों में इंजीनियरिंग और साइंस के प्रति जागरूकता के लिए कराया जाता है। इस साल अमेरिकन एक्सप्रेस और पेक ओल्ड स्टूडेंट्स एसोसिएशन के सहयोग से प्रोग्राम कराया गया। 

 

प्लास्टिक का होगा रियूज: शुभम गर्ग, सनप्रीत सिंह, निशांत और अर्श संधू की टीम ने ऐसी तकनीक तैयार की है जिसमें प्लास्टिक को जलाने के बाद उसका उपयोग हो सकेगा। जलाने के बाद उससे निकलने वाली गैस को ईंधन गैस में परिवर्तित कर दिया जाएगा और बचत कोयले के रूप में बदल जाएगी। इसका मकसद प्लास्टिक का सॉल्यूशन निकालना और ऊर्जा के नई साधनों को तलाशना है।

 

रोबोर्टिक अार्म करेगी घर का काम: अगर शारीरिक कारणों से काम करने में अक्षम है और अकेले रहने की वजह से साफ सफाई एक बड़ी परेशानी है तो उसका सॉल्यूशन दिया है आकाश शर्मा और गर्वित की टीम ने। उन्होंने जेस्चर कंट्रोल रोबोटिक आर्म बनाई है इसमें एक सेंसर लगे दस्ताना को पहनना होगा। खिड़की साफ करनी है या कुछ और काम, हाथ को जैसे जैसे हिलाते जाएंगे रोबोट भी वैसे हाथ हिलाकर आपका काम कर देगा।

 

आवाज को साइन लैंग्वेज में बदलेगा सॉफ्टवेयर: आपको साइन लैंग्वेज नहीं आती लेकिन डीफ और डंब लोगों से कम्युनिकेट करना चाहते हैं तो अपनी बात एक प्रोग्राम में रिकॉर्ड करवा दीजिए। यह सॉफ्टवेयर अपने आप आवाज को साइन लैंग्वेज में बदल देगा। मल्टीमीडिया कैरेक्टर्स के जरिए इस साइन लैंग्वेज के जरिए कोई भी अपने दिल या काम की बात डीफ एंड डंब लोगों तक पहुंचा सकता है। ऑडियो टू साइन लैंग्वेज कनवर्टर टीम इसको वेबसाइट के रूप में डेवलप करने की कोशिश में है। प्रियांशु गौतम और उनकी टीम ने इसको तैयार किया है।


रिमोट से नहीं अपने आप रास्ता तलाशेगा ड्रोन: ड्रोन को उड़ाने के लिए किसी रिमोट की जरूरत नहीं होगी। इसमें इस तरह की प्रोग्रामिंग की जाएगी कि वह मुश्किल जगहों पर भी अपने-आप रास्ता तलाश कर पहुंच जाएगा। ये खासतौर पर मुश्किल जगहों व लैंड स्लाइड आदि मुसीबतों को ध्यान में रख कर बनाया है। वह अपना रास्ता खुद तय करेगा और वापस आएगा। यशवीर सिंह और उनकी टीम ने इसको तैयार किया है।

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