श्रद्धांजलि / पंजाब में सांप्रदायिक सौहार्द के लिए प्रयासरत रहे टंडन, पार्टी लाइन से ऊपर उठकर काम किया : नायडू



VICE President Venkaiah Naidu at Chandigarh for first death anniversary of Balram Ji Dass
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VICE President Venkaiah Naidu at Chandigarh for first death anniversary of Balram Ji Dass

  • पूर्व गवर्नर बलराम दास टंडन की बरसी पर श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू

Dainik Bhaskar

Aug 14, 2019, 04:42 PM IST

चंडीगढ़. उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडु मंगलवार को यहां पूर्व गवर्नर बलराम दास टंडन की बरसी पर श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने के लिए पहुंचे। नायडू ने कहा कि बंटवारे के समय टंडन ने मदद के लिए कैंप लगाए थे। वे तीन बार मंत्री पद पर रहे। उन्होंने पार्टी से ऊपर उठकर लोगों की मदद की। इसलिए जरूरी हो जाता है कि नई पीढ़ी उनके बारे में जाने।

 

नाडयू ने कहा- वह दौर था जब राष्ट्रीय मुद्‌दों पर दलीय मतभेद नहीं थे। सामाजिक, राजनेतिक कार्यकर्ता एक से अधिक राजनेतिक संगठन में सक्रिय रहते थे। देश के विभाजन की बात करें तो यह पंजाब पर विशेष तौर से भारी पड़ा था। इस प्रदेश को सबसे अधिक मानव त्रासदी, झेलनी पड़ी। ऐसे में, कई स्वयंसेवी युवा संगठन इस क्षेत्र में सक्रिय थे जो विभाजन से आई आपदा में, शरणार्थियों, उनके जानमाल, सम्मान की रक्षा के लिए तत्पर थे।

 

टंडनजी ने इस कठिन समय में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के रूप में पंजाब और आसपास के क्षेत्रों-डलहौजी, चंबा में अथक परिश्रम किया। विभाजन से आए शरणार्थियों के लिए शिविर आयोजित किए। उन्हें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की। 1927 में अमृतसर में जन्मे टंडन का सार्वजनिक जीवन सन 1953 में ही अमृतसर नगर निगम के सदस्य के रूप में प्रारंभ हुआ। 1957-77 तक वह 5 बार पंजाब विधान सभा के सदस्य रहे। इसके बाद साल 1997-2002 तक पुन: पंजाब विधान सभा के सदस्य बने।

 

टंडन ने तीन बार पंजाब सरकार में मंत्री पद के दायित्व का निर्वाह भी किया। अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में, टंडनजी ने नि:स्वार्थ राष्ट्र सेवा, निष्ठापूर्ण समाज सेवा के प्रमाणिक मानदंड स्थापित किए जो जनप्रतिनिधियों और सामाजिक, राजनेतिक कार्यकर्ताओं की वर्तमान पीढ़ी के लिए आज भी उतने ही अनुकरणीय हैं। सन 1962 और 1965 युद्धों के दौरान टंडन ने राष्ट्रीय उद्देश्यों के लिए जनसहयोग और जनभागीदारी को संगठित किया। वे एक साधारण नागरिक थे। पर देश की सेनाओं की सहायता करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे।

 

पंजाब में आतंकवाद के दिनों में टंडन सांप्रदायिक सौहार्द और शांति के लिए प्रयासरत रहे। इस दौरान उनके घर पर आतंकवादी हमले भी हुए । फिर भी अपनी और अपने परिजनों की सुरक्षा की चिंता किए बगैर, आतंकी घटनाओं से प्रभावित लोगों की सेवा करते रहे। उनके पुर्नवास के लिए समिति बनाई। गरीब परिवारों के लिए चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई।


अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी करना देश की एकता-अखंडता के लिए समय की मांग थी 
नायडु ने कहा- भारत एक है और इसलिए 370 अनुच्छेद हटाया जाना एक अच्छा कदम है। राष्ट्रहित के मुद्दों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर सर्वसहमति होनी चाहिए। इस संदर्भ मैं धारा 370 को निरस्त किए जाने की चर्चा करते हुए नायडू ने कहा कि अनुच्छेद 370 केवल एक अस्थाई प्रावधान था। उन्होंने कहा कि धारा 370 के निरस्त होने का देश भर में स्वागत हुआ है। ये मसला देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा का है। परन्तु पश्चिमी मीडिया का एक वर्ग इस विषय में भारत विरोध भ्रामक प्रचार फैला रहा है।

 

हमारे लोकतंत्र के लिए यह आवश्यक है कि जनप्रतिनिधि लोकतांत्रिक आदर्शों और संस्थाओं में जनता की आस्था को बनाए रखें। दलीय राजनीति, लोकतंत्र में स्वाभाविक है। विभिन्न दल राजनैतिक विकल्प उपलब्ध कराते हैं। परंतु राष्ट्रहित और समाज के आदर्शों का कोई विकल्प नहीं होता। बता दें कि इस लेक्चर के लिए बलरामजी के बेटे व पीयू के सीनेटर संजय टंडन ने 10 लाख रुपए का एंडोमेंट फंड पीयू को दिया था। इस कार्यक्रम के लिए यूनिवर्सिटी ने सभी को पहले से ही गाइडलाइंस जारी कर दी गई थी।
 

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