चंडीगढ़ / योगराज सिंह ने जिस मैदान पर युवी को तैयार किया, उसी डीएवी कॉलेज में बतौर कोच फिर हुई नियुक्ति



योगराज सिंह अपने बेटे युवराज के साथ। फाइल फोटो योगराज सिंह अपने बेटे युवराज के साथ। फाइल फोटो
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योगराज सिंह अपने बेटे युवराज के साथ। फाइल फोटोयोगराज सिंह अपने बेटे युवराज के साथ। फाइल फोटो

  • डीएवी क्रिकेट एकेडमी से पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह शुरू करेंगे नई पारी, पहले भी 17 साल रहे यहां कोच
  • योगराज बताते है कि वे युवराज के साथ मैदान पर ही खाना खाया करते थे

Dainik Bhaskar

Sep 15, 2019, 11:34 AM IST

चंडीगढ़. पांच साल के लंबे इंतजार के बाद चंडीगढ़ के पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह एक बार फिर से नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। योगराज यहां डीएवी कॉलेज में बतौर कोच इस पारी का आगाज करेंगे और ये उनकी इस मैदान पर दूसरी पारी होगी। इससे पहले योगराज 17 साल तक इसी मैदान पर प्लेयर्स को तैयार कर चुके हैं।

 

कॉलेज मैनेजमेंट ने अपने पुराने कोच को मैदान सौंपा है, ताकि वे यंगस्टर्स को बेस्ट क्रिकेटर के तौर पर तैयार कर सकें। योगराज ने 1997 में डीएवी कॉलेज में कोचिंग देनी शुरू की थी और 2014 तक यहां पर वे यंगस्टर्स को कोचिंग देते रहे।

 

योगराज ने कहा, 'मैं इस नई जिम्मेदारी के बाद दबाव नहीं बल्कि हल्का महसूस कर रहा हूं। मैं मैदान से जुड़ा इंसान हूं और मैदान में रहने से बेहतर मेरे लिए कुछ नहीं। इस मैदान में युवराज के साथ मेरी कई यादें जुड़ी हैं जो एक बार फिर से ताजा होने जा रही हैं। जब मेरे पास यहां पर कोचिंग देने का ऑफर आया तो मैंने बिना सोचे समझे हां कर दी, ये मैदान मेरा और बेटे युवराज का अपना मैदान है। साथ में कई और क्रिकेटर्स का भी।'

सिर्फ टैलेंट पर रहेगी नजरें, पैसे पर नहीं
योगराज ने कहा कि मेरी नजरें यहां पर सिर्फ क्रिकेट टैलेंट पर होगी न की पैसे पर। न तो मैंने पहले कॉलेज से कोचिंग के पैसे लिए थे और न ही मैं अब लेने वाला हूं। मैंने कॉलेज मैनेजमेंट से कहा है कि जो पैसे वे मुझे देना चाहते हैं वे इस मैदान पर लगाएं और यहां पर ट्रेनिंग करने वाले बच्चों पर भी। जो बच्चा यहां पर खेलने के लायक है, जिसमें जुनून है, वो बच्चा ही यहां पर खेलेगा। मेरा काम यहां पर अच्छे प्लेयर्स तैयार करना है और मैं उसके लिए पूरी तरह से तैयार हूं।
 

युवराज और मैं मैदान में ही बैठे रहते थे
डीएवी के क्रिकेट कोच योगराज सिंह ने कहा कि युवराज ने इस मैदान पर काफी क्रिकेट खेला है और मैं उसके साथ यहां पर डटा रहता था। मैं कोने में मंजी लगाकर बैठ जाता था और युवराज के साथ ट्रेनिंग के बाद हम मैदान में ही खाना खाया करते थे।

 

इस मैदान ने हमें बहुत कुछ दिया है। युवराज की दादी हमेशा पूछती थीं कि तू मैदान में क्या करता है। मैं उन्हें हमेशा कहता था कि मैं बच्चों की सेवा कर रहा हूं, मालिक हमारे बच्चे को भी देगा। नतीजा आपके सामने है। मैंने बच्चों की सेवा की है तो मालिक ने मेरे बच्चे को क्रिकेट का सुपरस्टार बनाया है। अब मुझे यहां से कई और युवराज तैयार करने हैं।

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