चंडीगढ़ / इंटरनेट एडिक्ट हो रहे युवा, बंद होते ही हो रहे बैचेन, ओपीडी में ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ रही



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  • घर से दूर होकर अपनी दुनिया में खो रहे हैं युवा
  • डायबिटीज और थायरॉयड के मरीजों में डिप्रेशन का होना कॉमन होता है

Dainik Bhaskar

Sep 16, 2019, 10:34 AM IST

चंडीगढ़. युवाओं में डिप्रेशन के बाद सबसे ज्यादा मरीज आजकल इंटरनेट एडिक्शन के मरीज आ रहे हैं। ज्यादातर युवा इंटरनेट एडिक्शन का शिकार होने के बाद घर परिवार से दूर हो जाते हैं। न उन्हें खाने की परवाह है न ही पढ़ने की। ओपीडी में ऐसे युवा और बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है।

 

यह बात ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के साइकेट्री डिपार्टमेंट के डॉ. रोहित वर्मा ने कही। वे डिपार्टमेंट के 56 साल पूरे होने के मौके पर रविवार को होने वाली सीएमई में हिस्सा लेने आए थे। सीएमई में देशभर के डॉक्टरों ने हिस्सा लिया।

 

कम उम्र में ही हो रहा है डिप्रेशन

डॉ. वर्मा ने बताया कि स्ट्रेस और डिप्रेशन के मरीजों की संख्या में 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो रही है। ओपीडी में डिप्रेशन के मरीजों की संख्या में 50 फीसदी की वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि डिप्रेशन भी दो तरह का होता है। कई बार जीवन में ऐसा कुछ हो जाता है जो व्यक्ति के अनुकूल नहीं होता तो व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार होने लगता है। दूसरा डिप्रेशन ऐसा होता जो बार-बार होता है।

 

डायबिटीज व थायरॉयड में कॉमन होता है डिप्रेशन
डॉ. वर्मा ने कहा कि जिन लोगों को डायबिटीज या थायरॉयड की बीमारी होती है। उन लोगों में डिप्रेशन कॉमन माना जाता है। ऐसे लोग इन दोनों बीमारियों से परेशान होकर डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं।

 

डिप्रेशन के लक्षण

डिप्रेशन के कई लक्षण होते हैं, जिन्हें एक साइकेट्रिक ही समझ सकता है। मोटे तौर पर उदासी, थकान, किसी भी अच्छे अनुभव का एहसास न होना, आत्मविश्वास का कम होना, फोकस कम होना, भूल जाना, होप लेस और हेल्प लेस बातें करना। भूख कम लगने लगती है। अगर यह सब सिमटम किसी व्यक्ति में आते हैं तो साइकेट्रिक साइंस में डिप्रेशन की बीमारी माना जाता है।

 

 

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