हरियाणा / हमारा हक लौटाए पंजाब, विधानसभा भवन में 40 के बजाय हमें मिली सिर्फ 27 फीसदी हिस्सेदारी

पंजाब और हरियाणा विधानसभा चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा विधानसभा चंडीगढ़।
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पंजाब और हरियाणा विधानसभा चंडीगढ़।पंजाब और हरियाणा विधानसभा चंडीगढ़।

  • हरियाणा विधानसभा के 20 कमरों पर पंजाब विधानसभा का कब्जा, स्पीकर ने कहा
  • हरियाणा अलग होने के वक्त यहां 1966 में 54 विधायक थे, 977 में 90 हो गए, अब जगह की कमी पड़ रही है

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2019, 03:28 AM IST

चंडीगढ़. एसवाईएल को लेकर हरियाणा-पंजाब में चल रहे टकराव के बीच अब हरियाणा विधानसभा सचिवालय की ओर से पंजाब से विधानसभा भवन में तय हिस्सेदारी देने की मांग उठाई है। इसे लेकर हरियाणा विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने शुक्रवार को पंजाब विधानसभा स्पीकर राणा केपी से मुलाकात की और उन्हें मांगपत्र भी सौंपा। जल्द ही बंटवारे में हुई हिस्सेदारी को लेकर दोनों विधानसभा के सचिव स्तर पर मीटिंग होगी, इसमें पूरा होम वर्क होगा। 


पंजाब विधानसभा सचिवालय की ओर से हरियाणा विधानसभा के 20 कमरों पर अभी तक कब्जा किया हुआ है। संयुक्त पंजाब से हरियाणा अलग बनने के वक्त विधानसभा भवन का 60 फीसदी हिस्सा पंजाब और 40 फीसदी हिस्सा हरियाणा विधानसभा के लिए निर्धारित हुआ था, लेकिन हरियाणा को अभी तक इसमें 27 फीसदी हिस्सा ही मिला है।

हरियाणा अलग होने के वक्त यहां 1966 में 54 विधायक थे। बाद में 1967 में इनकी संख्या 81 और 1977 में 90 हो गई। स्टाफ भी बढ़ा है। स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता का कहना है कि हरियाणा के हिस्से के जो 20 कमरे पंजाब विधानसभा के पास हैं, उनमें कुछ में तो उन्होंने कार्यालय बनाए हुए हैं, जबकि कुछ को स्टोर के रूप में काम में ले रहे हैं। एक दिन पहले ही हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल एसवाईएल को पंजाब पर निशाना साधते हुए कहा था कि हमारी विनम्रता को अन्यथा न लें। पंजाब बहाना बनाने की बजाए सुप्रीम कोर्ट का निर्णय माने।

जानिए... 1966 में कैसे हुआ था विधानसभा भवन का बंटवारा
पंजाब-हरियाणा विधानसभा का कुल क्षेत्र 66430 स्केवयर फीट है। हरियाणा अलग बनने के वक्त 17 अक्टूबर, 1966 को पंजाब राज्यपाल कार्यालय के तत्कालीन चीफ इंजीनियर कैपिटल प्रोजेक्ट चंडीगढ़ की ओर से मीटिंग बुलाकर तीन भागों में क्षेत्र आवंटित किया गया था। कुल क्षेत्र में पंजाब विधानसभा सचिवालय को 30890, पंजाब विधानसभा परिषद सचिवालय और 24630 स्कवेयर फीट जगह हरियाणा विधानसभा सचिवालय के लिए निर्धारित की गई। पंजाब विधानसभा परिषद बाद में समाप्त कर दी गई और यह जगह पंजाब विधानसभा के पास है।
 

इन कमरों पर पंजाब का कब्जा

विधानसभा स्पीकर की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार विधानसभा के बेसमेंट में कमरा संख्या-23 से 24 हरियाणा के हिस्से के हैं। इनमें 23 और 26 कमरा नंबर पंजाब के पास है। जबकि ग्राउंड फ्लोर पर भी हरियाणा के हिस्से के कमरा संख्या 27 से 30 पंजाब ने नहीं दिए। जबकि पहली मंजिल पर हरियाणा की हिस्सेदारी के 14 कमरों पर भी पंजाब विधानसभा का कब्जा है। हालांकि दूसरी मंजिल पर छह कमरे संख्या 154 से 160 आपसी सहमति से पंजाब के पास हैं। इनके बदले पंजाब ने सात कमरे संख्या-129 से 135 तक हरियाणा विधानसभा को दिए हुए हैं।
 

कमरे मिलें तो मंत्रियों को भी मिल सकती है जगह

हरियाणा में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की पार्टी की ओर से कुछ समय पहले उन्हें भी विधानसभा सचिवालय में कमरा मुहैया कराने की मांग उठाई थी। लेकिन यहां कमरों की पहले से कमी है। स्पीकर का कहना है कि हमारे पास जगह की कमी है। यदि पर्याप्त जगह हो तो मंत्रियों और अधिकारियों को भी बैठने की पूरी जगह मिल सकती है। इसलिए हमने बड़े भाई पंजाब से निवेदन किया है कि वह हमारा हक लौटाए।

पंजाब यूनिवर्सिटी में हिस्सेदारी की मांग भी उठाते रहे हैं गुप्ता
विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता पूर्व में पंजाब यूनिवर्सिटी में भी हरियाणा की हिस्सेदारी की मांग करते रहे हैं। इसे लेकर उन्होंने गृह मंत्री तक से मुलाकात की थी। 1966 में तत्कालीन सरकार ने पंजाब यूनिवर्सिटी पर अपनी दावेदारी छोड़ी थी। गुप्ता ने कहा कि इस संबंध में भी प्रयास जारी हैं।
 

नेपाल के विधायक-अफसर करेंगे विधानसभा की कार्यशैली की स्टडी
हरियाणा और पंजाब विधानसभा की कार्य प्रणाली की स्टडी करने के लिए नेपाल से विधायकों और अफसरों का एक प्रतिनिधि मंडल 9 दिसंबर को आएगा। विधानसभा स्पीकर ने बताया कि नेपाल में सात स्टेट हैं, जिनमें पांच नंबर स्टेट का यह प्रतिनिधि मंडल आ रहा है। यह हरियाणा और पंजाब दोनों ही विधानसभा की कार्यशैली की स्टडी करेगा। उन्होंने देहरादून में होने वाले प्रशिक्षण के बारे में कहा कि वहां जीरो ऑवर्स और शेड्यूल-10 जैसे दो मुद्दों पर मंथन होगा।

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