उपलब्धि / 10,000 सफल प्रसव करवा कर 108 ने स्थापित किया मील का पत्थर



108 established milestone after delivering 10000 babies.
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108 established milestone after delivering 10000 babies.

  • हिमाचल जैसे पवर्ततीय प्रदेश के दुर्गम क्षेत्र जहां जीवन यापन करना ही चुनौती से कम नहीं होता
  • 25 दिसंबर 2010 काे जीवीके ईएमआरआई ने सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी से राज्य सरकार के साथ मिलकर सेवा की शुरुआत की थी

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2019, 02:43 PM IST

साेलन. 108 अापातकालीन सेवा प्रदेश में महिलाओं के लिए आशा और विश्वास की एक सच्ची साथी सिद्ध हुई है। 10 हजार सफल प्रसव करवाकर 108 नेशनल एंबुलेंस सेवा ने मील का पत्थर स्थापित किया है। 25 दिसंबर 2010 काे जीवीके ईएमआरआई ने सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी से राज्य सरकार के साथ मिलकर इस सेवा काे शुरू किया था।

 

हिमाचल जैसे पवर्ततीय प्रदेश के दुर्गम क्षेत्र जहां जीवन यापन करना ही किसी चुनौती से कम नहीं होता वहां पर महिलाओं का ऐसी जीवन रक्षक सेवाएं प्रदान करना सचमुच सुखद अाश्चर्य का अहसास कराता है। अब तक 23,80,46 गर्भ संबंधी केस जो कि 108 ईआरसी, आपातकालीन प्रबंधन केंद्र में दर्ज किए गए कुल आपातकालीन केसों का 20 फीसदी है। 108 नेशनल एंबुलेंस की अाेर से अब तक संभाले गए कुल प्रसव सम्बंधी केसों का जिलावार ब्यौरा।

 

108 एंबुलेंस सेवा की अाेर से निपटाए प्रसव संबंधी केसों का ब्याैरा

108 एंबुलेंस सेवा की अाेर से किए गए अधिकतर प्रसव संबंधी केस या तो देर रात निपटाए गए या सुबह के समय निपटाए गए। जीवीके ईएमआरआई के स्टेट हेड मेहुल सुकुमारन ने इस उपलब्धि के लिए जीवीके टीम को बधाई दी है। उन्हाेंने कहा िक प्रदेश सरकार अाैर एनएचएम का निरंतर सहयोग रहा है। उन्हाेंने कहा कि बहुत से केस एेसे हैं जिसमें कर्मचारियों द्वारा जुड़वा अाैर तीन बच्चों का सफलतापूर्वक प्रसव करवाया है। 108 एंबुलेंस प्रसव सबंधी सभी महत्वपूर्ण उपकरण डिलिवरी किट, आवश्यक दवाइयों से सुसज्जित है। प्रदेश में कुल 200 एंबुलेंस के साथ 108 नेशनल एंबुलेंस सर्विस ने 8 साल 3 महिने में 11,92,321 आपात्कालीन मामलों को निपटाया है। इनमें 11,57,017 चिकित्सा संबंधी मामले, 28224 पुलिस संबंध्ति मामले एवं 7080 अग्नि संबंधित मामलों का सफलतापूर्वक निवारण कर प्रदेश की जनता को राहत पहुंचाई है।

 

कांगड़ा में सबसे ज्यादा केस 

108 एंबुुलेंस की अाेर से अब तक सबसे अधिक प्रसव संबंधी केस जिला कांगड़ा में 42,273 किए। उसके बाद जिला मंडी में 33,994 और जिला सिरमौर में 30,231 में किए गए। प्रदेश के जनजातीय जिले किन्नौर में 1691 अाैर लाहुल-स्पीति में 440 प्रसव संबंधी केस किए। प्रदेश में मौसमानुसार प्रसव संबंधी आपातकालीन केसों में ज्यादा अंतर नहीं देखा गया है। अब तक सबसे अधिक प्रसव संबंधी केस अक्टूबर, अगस्त, जनवरी में अाए हैं। गर्मियों के महीनों जैसे अप्रैल, मई, जून में प्रसव संबंधी आपातकालीन केसों में थोड़ी कमी देखी गई है।
 

एंबुलेंस के भीतर निपटाए गए प्रसव संबंधी केस

अभी तक 108 एंबुलेंस सेवा की अाेर से प्रसव संबंधी केस निपटाए गए उनमें 66 फीसदी प्रसवों को एंबुलेंस कर्मियों द्वारा एम्बुलेंस के भीतर अाैर 34 फीसदी प्रसव को गर्भवती महिला के घर पर या घटनास्थल पर निपटाया गया। 108 एंबुलेंस सेवा की अाेर से जो भी प्रसव संबंधी केस निपटाए गए उनमें 99 फीसदी सामान्य प्रसव थे। 1 फीसदी प्रसव असमान्य/गंभीर जैसे कि बच्चे का उल्टा पैदा होना, गर्भवती महिला को गर्भवास्था के दौरान तकलीफ होना जैसे बुखार, उच्च/निम्म रक्तचाप, उल्टी होना, पेट दर्द अाैर चक्कर आना जैसे केस शामिल है।

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