मुसीबत / डीआईपीपी के फरमान ने बंद कर दिए हिमाचल के किचन एप्लायंसेज के 35 उद्योग



35 industries closed suddenly due to Decision of DIPP
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35 industries closed suddenly due to Decision of DIPP

  • 10 हजार कामगार बेरोजगार होने की कगार पर, किचन एप्लायंसेज के
  • उद्योगपतियों ने केंद्र व प्रदेश सरकार से मांगी मदद, डॉ सैजल को भेजा पत्र

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2019, 12:38 PM IST

परवाणू. डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडस्ट्रियल पाॅलिसी एंड प्रमोशन (डीआईपीपी) के एक फरमान ने देश के साथ साथ प्रदेश में चल रही किचन उपकरणों का निर्माण करने वाली इंडस्ट्रीज को बंद होने की कगार पर ला खड़ा किया है।
डीआईपीपी के इस फरमान के चलते प्रदेश में इन उद्योग में कार्यरत 10 हजार लोगों के बेरोजगार हो जाने का खतरा पैदा हो गया है।

 

डीआईपीपी ने किचन एप्लायंसेस निर्माण से जुडी इंडस्ट्रीज पर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) लाइसेंस की अनिवार्यता लागू कर दी हैं, लेकिन लाइसेंस की प्रक्रिया इतनी जटिल व लंबी हैं की 7 महीने बीत जाने के बाद भी हिमाचल के 35 उद्योग में से अभी तक महज 6 उद्योंगों को ही लाइसेंस मिल पाया हैं, इसके चलते किचन एप्लायंसेज इंडस्ट्रीज चला रहे उद्योगपतियों में इस बारे में खासा रोष व्याप्त हैं, वे इस बारे केंद्र व प्रदेश सरकार को विभिन्न माध्यमों से अपनी समस्या से अवगत करवा चुके हैं, लेकिन इन्हें अभी तक कोई राहत नहीं मिली हैं ।

 

गौरतलब हैं कि 8 नवम्बर 2018 को केंद्र सरकार के उद्योग मंत्रालय से जारी आदेशो के अनुसार देश भर में किचन एप्लायंसेज से जुड़े उद्योगों के लिए बीआईएस लाइसेंस को अनिवार्य कर दिया था| लाइसेंस लेने के लिए उद्योगों को 30 अप्रैल तक का समय दिया गया था, लेकिन लाइसेंस की जटिल प्रक्रिया के चलते इस अवधि तक प्रदेश में महज 6 उद्योगों को लाइसेंस मिल पाया, जिसके चलते 1 मई से बाकी सभी उद्योगों में उत्पादन ठप हो गया| यही नहीं, जिनके पास लाइसेंस था उनके उत्पाद भी बीआईएस की मान्यता प्राप्त लैब्स में खरे नहीं उतर पाए जिसके चलते उन उद्योगों में भी उत्पादन ठप पड़ा हैं|

 

देश में किचन एप्लायंसेज जैसे जूसर, मिक्सर ग्राइंडर, फ़ूड प्रोसेसर, हैंड ब्लैंडर आदि निर्माण कार्य में लगी 200 कम्पनियां हैं जिन्हें सरकार के इस निर्णय का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में इन उत्पादों के निर्माण से जुड़ी 35 कंपनिया कार्यरत हैं,

 

होम एप्लायंसेज मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन परवाणू के अध्यक्ष आरके गांधी, सचिव अंकित गुप्ता, कैशियर मनमोहन ने बताया की 1 मई से उद्योग बंद पड़े हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही हैं। हिमाचल की 6 इकाइयों को बीआईएस ने लाइसेंस दिए थे, उन्हें भी रद्द कर दिया गया है। बीआईएस के अनुसार जो रिपोर्ट बीआईएस की मान्यता प्राप्त लैब ने जारी की थी वह प्रमाणिक नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया की बीआईएस जवाब देने में असमर्थ हैं कि उसकी ही मान्यता प्राप्त लैब्स की रिपोर्ट में इतना अंतर क्यों हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना हैं की ऐसा प्रतीत हो रहा हैं की बीआईएस की लैब्स में ही आपस में अंदरूनी खींचतान चल रही हैं, जिसका खामियाजा उद्योग क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा हैं।

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