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  • 70 children took admission in Sangana Sathan school as soon as session 2019 started, now only 27 children are left due to scarcity of teachers.

लापरवाही / 2019 में सत्र शुरू होते ही सीसे स्कूल सांगना सतहान में 70 बच्चों ने ली थी एडमिशन, अब रह गए मात्र 27 बच्चे

सीसे स्कूल सांगना सतहान जहां पर टीचर न होने से बच्चे कर रहे हैं पलायन  सीसे स्कूल सांगना सतहान जहां पर टीचर न होने से बच्चे कर रहे हैं पलायन 
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सीसे स्कूल सांगना सतहान जहां पर टीचर न होने से बच्चे कर रहे हैं पलायन सीसे स्कूल सांगना सतहान जहां पर टीचर न होने से बच्चे कर रहे हैं पलायन 

  • दो शिक्षक पढ़ा रहे जमा एक और दो के बच्चों को
  • बच्चे स्कूल छोड़ दूसरे स्कूलों में जाने का मजबूर

दैनिक भास्कर

Feb 17, 2020, 12:38 PM IST

हरिपुरधार. सीसे स्कूल सांगना सताहन में भाजपा की सरकार बनते ही यहां से टीचरों के स्थानांतरण का सिलसिला शुरू हो गया था। अब आलम यह है कि इस वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में जमा एक व जमा दो कक्षा के बच्चों को पढ़ाने के लिए पिछले दो वर्ष से प्रिंसिपल के अलावा एक मात्र इतिहास का प्रवक्ता है।

प्रिंसिपल को पाठशाला के अन्य सभी कार्यों को भी देखना पड़ता है। इसलिए दो कक्षाओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी मात्र एक शिक्षक के कंधे पर है। शिक्षकों की कमी के चलते इस पाठशाला को छोड़ कर बच्चे दूसरे स्कूलों में जाने के लिए विवश हो रहे हैं।


एक साल में 43 बच्चों ने छोड़ा स्कूल

वर्ष 2019 में जब नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ था तो इस पाठशाला में कुल 70 बच्चाें ने एडमशन लिया था। इनमें जमा एक कक्षा में 40 बच्चों जबकि जमा दो कक्षा में 30 बच्चों ने एडमिशन लिया था। पाठशाला में पूरे वर्ष एक भी टीचर की नियुक्ति न होने बच्चों ने अब इस पाठशाला को अलविदा कहना शुरू कर दिया। एक वर्ष के भीतर ही जमा एक जमा दो कक्षा के 43 बच्चों को इस पाठशाला को छोड़ कर दूसरी पाठशालाओं में एडमिशन लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।


वार्षिक परीक्षाएं नजदीक, कैसे करें तैयारियां

एसएमसी अध्यक्ष बलबीर चौहान, पंचायत प्रधान देवेंद्र ठाकुर, जगत शर्मा, पूर्व पंचायत प्रधान जगदीश ठाकुर व जालम सिंह ने बताया कि मार्च में वार्षिक परीक्षाएं होनी है। पढ़ाई के लिए एक महीने से भी कम समय बचा है, ऐसे में बच्चों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि बिना टीचर के वह परीक्षाओं की तैयारियां कैसे करें। समाज सेवी जगत शर्मा ने बताया कि एसएमसी के खर्चे पर स्थानीय नेता व एसएमसी के प्रतिनिधि स्टाफ की मांग को लेकर शिमला के भी कई चक्कर काट चुके हैं, मगर उसके बावजूद भी सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। क्षेत्र के लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस पाठशाला में जल्द ही लेक्चरर के खाली पड़े सभी पदों को भरा जाए ताकि बच्चे परीक्षाओं की तैयारियां शुरू कर सकें।
 

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