गर्व के पल / एडीबी के निरीक्षण के बाद शिवालिक फासिल पार्क को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान



सुकेती फासिल पार्क में रखे गए जीवाश्म सुकेती फासिल पार्क में रखे गए जीवाश्म
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सुकेती फासिल पार्क में रखे गए जीवाश्मसुकेती फासिल पार्क में रखे गए जीवाश्म

  • वर्ष 2020 में दिल्ली में होने वाले अंतरराष्ट्रीय जियोलॉजिकल कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल कर सकता है फोसिल पार्क का दौरा
  • यहां पर छात्र शोध और जानकारी जुटाने के लिए भी पहुंचते हैं

Dainik Bhaskar

Sep 16, 2019, 02:50 PM IST

नाहन. अभी तक प्रशासन और सरकार की अपेक्षाओं का शिकार रहे एसिया प्रसिद्ध सुकेती फासिल पार्क को एडीबी बैंक द्वारा किए निरीक्षण के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की आस जगी है। यह विश्व में अपनी तरह का तीसरा और एशिया में पहला मेरुदंडधारी जीवाश्म उद्यान है।

 

अन्य जानवरों के जीवाश्म कनाडा के कैलगरी पार्क और अमेरिका के जेनसन नगर में श्डायनासोर नेशनल मोन्यूमेंट्स में रखे हैं। सकेती फासिल पार्क जीव विज्ञानियों और भू विज्ञानियों के लिए शोध का विषय रहा है। यहां पर कई छात्र शोध और जानकारी जुटाने के लिए भी पहुंचते हैं।

 

ऐतिहासिक महत्व होते हुए भी कुछ वर्ष तक यहां पहुंचने के लिए अच्छी सड़क भी नहीं थी। कालाअंब से सुकेती तक करीब 4 किलोमीटर सड़क जगह-जगह से टूटी हुई थी। पार्क में जीवाश्मों के संरक्षण के लिए भी कुछ समय पहले तक कोई खास प्रबंध नहीं किए थे।

 

करीब 1.5 वर्ग किलोमीटर में फैले फासिल पार्क की देखरेख भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग कर रहा है। इसके अलावा सुकेती फसिल पार्क के विकास के लिए कालाअंब से सुकेती तक करीब 4 किलोमीटर सड़क बनाई गई है।


काफी जानकारियां मिलेंगी: शिवालिक फासिल पार्क स्थित संग्रहालय में पर्यटकों के अलावा प्रतिदिन काफी संख्या में विद्यार्थी जानकारी हासिल करने आते हैं। एडीबी के मापदंडों के अनुरूप भू-गर्भ के महत्व को ध्यान में रख कर इस ऐतिहासिक स्थल का पर्यटन की दृष्टि से विकास किया जाना प्रस्तावित है।

 

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