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  • All Mandis in Himachal Pradesh will be made online to protect farmers from middlemen, farmers will be able to sell their produce from the fields itself.

सुविधा / हिमाचल में ऑनलाइन हाेंगी सभी मंडियां, किसान खेतों से ही बेच सकेंगे अपनी उपज

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  • इस महीने होने वाले बजट सत्र में एपीएमसी एक्ट लाकर आढ़तियाें के लाइसेंस अनिवार्य हाेंगे
  • हर साल बागवानाें के सेब खरीदने के बाद कुछ आढ़ती उन्हें पैसे नहीं देते हैं

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2020, 06:34 PM IST

शिमला. राज्य के बागवानाें और किसानों को बिचाैलियाें से बचाने के लिए जयराम सरकार अब सभी मंडियाें काे ऑनलाइन करेगी। सरकार आढ़तियाें के लाइसेंस अनिवार्य करेगी। इसके लिए सरकार बजट सत्र में माॅडल एपीएमसी विधेयक लाएगी। उससे पहले 17 फरवरी काे हाेने वाली कैबिनेट मीटिंग में विधेयक काे मंजूरी दी जाएगी। हर साल बागवानाें के सेब खरीदने के बाद कुछ आढ़ती उन्हें पैसे नहीं देते हैं। मामला पुलिस तक पहुंच जाता है।

इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ऐसे आढ़तियाें के साथ-साथ लदानियाें की मनमानी पर नकेल कसने के लिए ठाेस कानून लाने जा रही है। किसानाें काे अच्छी फसल की एवज में सही दाम दिलाने के लिए माॅडल एपीएमसी एक्ट में कई प्रावधान हाेंगे। यही नहीं, बल्कि इस एक्ट के पास हाेने के बाद हिमाचल में किसान अब खेतों से ही अपनी उपज बेच सकेंगे। जयराम सरकार मंडियों में उत्पाद ले जाने की अनिवार्यता खत्म करने जा रही है।

सरकार इसके लिए कानून बनाने जा रही है। विधानसभा बजट सत्र में पेश हाेने वाले विधेयक का ड्राफ्ट लगभग तैयार है। इसके ड्राफ्ट में मार्केटिंग बोर्ड से मंडियों के रेगुलेशन की शक्तियां लेने का प्रावधान भी किया गया है। बता दें कि प्रदेश में 57 मंडियां हैं। इनमें किसी भी तरह की अनियमितता की कार्रवाई राज्य कृषि विपणन निदेशालय के पास रहेगी। वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा को कार्यरूप देने के लिए ही यह विधेयक पेश हाेगा।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक हिमाचल प्रदेश एपीएमसी एक्ट-2005 में व्यापक संशाेधन कर इसे अब प्रदेश सरकार ने माॅडल एपीएमसी एक्ट नाम दिया है। इसमें एपीएमसी के तहत आने वाली सभी मंडियाें से फल खरीदने वाले आढ़तियाें पर निगरानी रखी जाएगी। आढ़तियाें पर ऐसी शर्त भी लागू हाेगी कि बागवानाें से सेब खरीदने के बाद तय समयावधि में पैसे जमा करवा दें। प्रदेश सरकार की इस पहल से आढ़तियाें की मनमानी पर पूरी तरह से कानूनी कार्रवाई हाेगी।

पिछले साल आढ़तियाें के पास फंसे कराेड़ाें
पिछले साल बाहरी राज्याे के अढ़तियाें ने बागवानाें से सेब खारीदा, लेकिन उसके एवज में कराेड़ों रुपए फंसे रहे। नाैबत यहां तक आ गई कि राज्य सरकार काे पुलिस एसआईटी गठित कर जांच शुरू करनी पड़ी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक पिछले साल सेब सीजन के दाैरान 15 कराेड़ से अधिक की राशि आढ़तियाें के पास फंसी। जिस पर पुलिस एसआईटी द्वारा कार्रवाई के बाद 30 आढ़तियाें काे गिरफ्तार किया गया अाैर करीब आठ कराेड़ की रिकवरी करने में भी कामयाब हुई। यही वजह है कि आज प्रदेश सरकार काे ठाेस कानून लाने की आवश्यकता पड़ी।

कानून बनने के बाद ये होंगे प्रावधान

  • किसान अपनी मर्जी से कहीं भी फसल बेच सकेगा
  • पंजीकृत प्रोसेसर, बल्क बायर, मैन्युफैक्चर्स किसानों से सीधे खेतों में संपर्क कर सकेंगे
  • मार्केटिंग बोर्ड, एपीएमसी के पास केवल मार्केटिंग और मंडियों को विकसित करने का काम रहेगा
  • उपज के क्वालिटी सर्टिफिकेशन के बाद ऑनलाइन ट्रेडिंग हो सकेगी
  • फलों, सब्जियों के अलावा फूल, औषधीय पौधों का भी इस तरह विक्रय होगा
  • किसान, उत्पादक संघों, सहकारी सभाओं को प्रोत्साहन देंगे
  • माल खरीदने के बाद तय समय पर बागवानाें के पैसे जमा करने हाेंगे
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