हिमाचल / 7 महीने में बने प्रकृतिक खेती के मास्टर ट्रेनर,खुद ही तैयार किए फसलों के स्प्रे



हरनेड़ के किसान ललित प्राकृतिक खेती से उगाए सब्जियों के साथ हरनेड़ के किसान ललित प्राकृतिक खेती से उगाए सब्जियों के साथ
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हरनेड़ के किसान ललित प्राकृतिक खेती से उगाए सब्जियों के साथहरनेड़ के किसान ललित प्राकृतिक खेती से उगाए सब्जियों के साथ

  • गांव हरनेड़ के किसान ललित कालिया ने प्राकृतिक खेती उगाने का सीखा हुनर, अब दूसरे किसानों को कर रहे ट्रेंड
  • किसान जागरूकता शिविरों में प्रदान कर रहे हैं सुंडियों के प्रकोप से बचाने देसी गाय के गोबर तथा मूत्र से तैयार घोल की जानकारी
  • खेतों से दूर होकर नौकरी के लिए भटक रहे नौजवानों के लिए बन रहे हैं प्रेरणा

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2019, 02:58 PM IST

हमीरपुर. जिले के बमसन ब्लॉक के तहत छोटे से गांव हरनेड़ के किसान ललित कालिया ने अपनी मेहनत और जज्बे के बल पर पहले प्राकृतिक खेती उगाने का हुनर सीखा। अब जिले के किसानों को खेतों में जैविक खादों से विभिन्न प्रकार के मौसमी उत्पाद उगाने को लेकर ट्रेंड करने लगे हैं।


ललित अब दूसरे किसानों व उन लोगों जो खेतों से दूर हो कर नौकरी के तलाश में भटक रहे हैं, उनके लिए प्रेरणा बनने लगे हैं। सिर्फ 7 महीने के अंदर ही जज्बे के बल पर कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण हमीरपुर ने उन्हें मास्टर ट्रेनर बनाया है।

 

वह इस खेती को अपनाने को लेकर अपने गांव तथा विभाग द्वारा लगाए जाने वाले किसान जागरूकता शिविरों में लोगों को देसी गाय के गोबर तथा मूत्र से तैयार घोल की जानकारी प्रदान कर रहे हैं।


उनका कहना है कि लोग खेतीबाड़ी से लेकर बागवान से मुंह मोड़ने लगे हैं, लेकिन यदि सही तकनीक से खेतों की ओर रुख किया जाए, तो आर्थिकी बढ़ाने में किसी भी क्षेत्र में कामयाबी हासिल की जा सकती है। उनका कहना है कि नशे की और बढ़ती हमारी युवा पीढ़ी को भी खेतीबाड़ी की और मोड़ना उनका लक्ष्य है।

 

सूंडियों के प्रकोप से बचने के लिए तैयार किया घोल: इसके अलावा ब्रहम अस्त्र के नाम से भी देसी गाय के गोबर से एक घोल तैयार किया गया है, जिसका प्रयोग फसल में सूंडियों का प्रकोप होने पर किया जाता है। इस घोल को भी उन्होंने गाय के गोबर-मूत्र तथा दस अलग-2 पेड़ों के पत्तेे जैसे शीशम, पपीता, आमला व आमरूद इत्यादि को मिश्रित कर तैयार किया गया हैउनके द्वारा तैयार किए यह मिश्रण भी किसानों के लिए खासे लाभदायक सिद्ध हो रहे हैं। क्योंकि इनसे फसलों और पौधों को किसी तरह का नुकसान नहीं हो रहा है।


12-32-16 खाद के मुकाबले तैयार किया धन जीवामृत:इसी प्रकार 12-32-16 खाद के मुकाबले का धन जीवामृत तैयार किया है, खेतों में तैयार किए जानी वाली हर प्रकार की फसलों तथा उत्पादों में पौष्टिकता बरकरार रहेगी। ललित कालिया ने द्रेक अस्त्र स्प्रे तैयार किया है, जो द्रेक नाम के पौधे के पत्ते तथा अन्य पांच ऐसे औषधीय पौधों जिसके पत्तेे जानवर न खाते हों, के पत्तोंं को एकत्रित कर उसमें देसी नस्ल की गाय के गोबर तथा मूत्र को मिला कर तैयार किया गया है । इस स्प्रे का इस्तेमाल 15 प्रकार के कीटोंं से फसल को बचाने के लिए किया जाता है। इस घोल का अधिकतम एक महीने तक भंडारण किया जा सकता है।


ख्रुद तैयार किया स्प्रे: ललित कालिया जैविक खादों का प्रयोग कर पांच कनाल भूमि में करेला, भिंडी, अदरक , अरबी, हल्दी, कद्दृ, घीया, मक्की, मास व सोयाबीन इत्यादि फसलों की सफलतापूर्वक खेती कर रहे हैं। उन्होंने गौै गोबर तथा मूत्र के घोल से स्प्रे तैयार किया है, जिसे जीवामृत का नाम दिया गया है। इस स्प्रे से बीजों की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए उनका उपचार किया जाता है।
 

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