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बेबाकी / फिर जागा सिद्धू का पाकप्रेम, कहा-'जरूरत पड़ी तो झप्‍पी तो क्‍या पप्‍पी भी लूंगा



Cabinet minister Navjot Sidhu states about the hug with Pak Army chief
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Cabinet minister Navjot Sidhu states about the hug with Pak Army chief

  • कसौली क्लब में 7वें खुशवंत सिंह लिट-फेस्ट में बतौर स्पीकर बोल रहे थे पंजाब के कैबिनेट मंत्री
  • दक्षिण भारत जाने से बेहतर पाकिसतान जाने को बता कहा-न खाना बदलता है न भाषा, फिर बवाल क्यों?

 

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 07:14 PM IST

अमृतसर। पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने एक बार फिर पाकिस्तान के प्रति अपने प्यार को खुले तौर पर जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि 'भाषा और खान-पान' की समस्याओं के कारण दक्षिण भारत जाने से बेहतर है 'पाकिस्तान जाना'। साथ ही सिद्धू ने पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के गले मिलने पर कहा कि उन्हें कोई पछतावा नहीं है। इतना ही नहीं, पाक‍िस्‍तान आर्मी चीफ को दी गई झप्‍पी पर सिद्धू ने तो यहां तक कह डाला कि उन्‍हें इससे कोई मलाल नहीं है और अगर जरूरत पड़ी तो झप्‍पी तो क्‍या पप्‍पी भी लेंगे।

 

स‍ि‍द्धू ह‍िमाचल प्रदेश के सोलन स्थित कसौली क्लब में शुक्रवार को शुरू हुए 7वें खुशवंत सिंह लिट-फेस्ट में बतौर स्पीकर जलियांवाला बाग टू पंजाब, पंजाबीज, पंजाबियत विषय पर संवाद करने पहुंचे थे।

 

Sidhu

 

दरअसल क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू ने पाकिस्तान में इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पाकिस्तानी सेना प्रमुख को गले लगाकर देश में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया था। बाजवा को गले लगाने की बात को बढ़ते देख प्रेस-कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी थी कि बाजवा द्वारा पाकिस्तान के करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जाने के लिए भारत के पंजाब के सिखों के लिए करतारपुर सीमा को पाकिस्तान को खोल दिए जाने की बात कहने पर उन्हें गले लगाया था। इसी मसले पर समारोह में भी सिद्धू खुलकर बोले।

 

समारोह के पहले संस्करण में सिद्धू ने कहा, 'पाक आर्मी चीफ कमर बाजवा को झप्पी करने पर कोई मलाल नहीं है और यह राफेल डील की तरह कोई साजिश भी नहीं थी। मैं सभी को झप्पी करता हूं और इसमें कोई बुराई नहीं है। वह पहले भारतीय हैं, फिर पंजाबी। पाक सरकार प्रथम पातशाही गुरुनानक देव के 550वें प्रकाशोत्सव पर श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलने के लिए तैयार है। गुरुओं के दर्शन के लिए यदि अच्छी पहल दिखेगी तो वह झप्पी तो क्या पप्पी भी लूंगा।'

 

बोले-दक्षिण भारत में मुश्किल से समझता हूं दो शब्द: सिद्धू ने कहा, "जब दक्षिण भारत जाता हूं तो वड़क्कम जैसे एक-दो शब्दों को छोड़कर शायद ही कोई और शब्द समझ पाता हूं। वहां का खाना भी मुझे ठीक नहीं लगता है। इडली जैसे व्यंजन मैं खा सकता हूं, लेकिन दक्षिण भारतीय व्यंजन को मैं लंबे समय तक नहीं खा सकता। वहीं अगर में पाकिस्तान जाता हूं तो पंजाबी और अंग्रेजी बोलता हूं और मैं खुद को उनसे अधिक जोड़ पाता हूं।

 

दुश्मनी करनी है तो हाई कमीशन को बंद कर दो: अब उन्होंने सुझाव दिया कि भारत पाकिस्तान में चल रहे तनाव का हल बातचीत से ही संभव है। 70 साल से दुश्मनी चली आ रही है, लेकिन क्या हल निकला। सरकार को शांतिवार्ता बंद नहीं करनी चाहिए। यदि दुश्मनी करनी है तो फिर हाई कमीशन को बंद कर दो। जन्मदिन, ईद और अन्य आयोजनों पर बधाई भी देनी छोड़ दो। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा कि ‘सरकार ताउम्र यही काम करती रही, धूल उनके चेहरे पर थी और वो आईना साफ करती रही।'

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