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बाल वैज्ञानिक ने बनाई सौर ऊर्जा से चलने वाली घास काटने की ऐसी मशीन, जिसमें चार्जर समेत जलता है बल्ब

6 महीने पहले
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सौर ऊर्जा से चलने वाली घास काटने की मशीन के साथ युगल
  • सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में 10वीं कक्षा के छात्र ने किया ये कमाल
  • बड़ा होकर इसरो में साइंटिस्ट बनना चाहता है युगल शर्मा, विधायक ने दी 11000 प्रोत्साहन राशि

करसोग. कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही नजर आ जाते हैं। करसोग के ऐसे ही एक पूत युगल शर्मा ने सौर ऊर्जा से चलने वाली घास काटने की एक ऐसी मशीन तैयार की है, जिसमें घास काटते समय व्यक्ति म्यूजि़क का भी आनंद उठा सकता है यानी घास काटने वाली इस मशीन में एमपी 3 की व्यवस्था की गई है।


इसी तरह जिन लोगों के खेत और घासनियां घरों से काफी दूर है और काम करने के बाद अकसर रात को घर लौटते हैं, ऐसे लोगों के लिए इस मशीन में एक बल्ब का भी प्रबंध है। जिसे चलते वक्त अंधेरा दूर करने के लिए अपनी सुविधा अनुसार 360 डिग्री एंगल में घुमाया जा सकता है।


चालक का ये बेटा सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल करसोग में 10वीं कक्षा का छात्र है। युगल खेलने कूदने की उम्र में ही कुछ हटकर का सपना देखा लिया था, जिसे उसने पढ़ाई के बाद बचे हुए समय में पूरा करने का प्रयास किया।

इसरो में वैज्ञानिक बनना चाहता है युगल शर्मा
प्रतिभा के धनी युगल शर्मा इसरो में वैज्ञानिक बनकर देश का नाम रोशन करना चाहते हैं और सौर उर्जा से चलने वाले उपकरणों में नए-नए अविष्कार करना चाहते हैं। उनका कहना है कि देश में बढ़ते हुए पर्यावरण प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के कारण सौर उर्जा से चलने वाले उपकरणों का अविष्कार आज समय की जरूरत है। भतीजे की प्रतिभा से खुश चाची रेखा शर्मा का कहना है कि युगल बचे हुए समय का पूरा सदुपयोग कर लैब में कार्य करता रहता है। ऐसे में एक दिन ये देश का नाम रोशन करेगा। उन्होंने इच्छा जताई है कि स्थानीय लोगों सहित जन प्रतिनिधि युगल के मार्गदर्शन के लिए आगे आएं और किसी अच्छे संस्थान में दाखिला के लिए भी मदद करें।

कबाड़ से तैयार कर बनाई ये मशीन
घास काटने वाली इस मशीन में 8 वोल्ट व 4 वोल्ट की दो सोलर प्लेटें, दो बैटरियां, दो स्पीकर, एक एमपी 3 प्लेयर और एक 360 डिग्री पर घूमने वाली लाइट लगी है। कटर के तौर पर शेविंग ब्लेडों का इस्तेमाल किया है। यह सारा कार्य घर पर बनाई गई एक छोटी सी लैब में एकत्रित कबाड़ और कुछ सामान बाजार से खरीद कर किया गया है। गरीब परिवार से होने के कारण युगल आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, लेकिन इस बाल वैज्ञानिक ने हार नहीं मानी और विपरीत हालात के बावजूद अपने सपने को पूरा करके दिखा डाला। हालांकि आर्थिक तंगी के कारण युगल शर्मा के कई प्रोजेक्ट अभी अधूरे पड़े हैं जिन्हें वे पूरा करना चाहते हैं। युगल शर्मा ने स्कूल की तरफ से मंडी जिले में हुए राज्य स्तरीय चिल्ड्रन साइंस कार्यक्रम में भाग लिया था। यहां उन्होंने खूब नाम कमाया था। इसके बाद युगल ने कुरुक्षेत्र में हुए उत्तर भारतीय चिल्ड्रन साइंस कार्यक्रम में भी भाग लिया था। दसवीं कक्षा के इस छात्र की प्रतिभा से प्रभावित होकर स्थानीय विधायक ने युगल ने 11000 रुपए प्रोत्साहन राशि दी।

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