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शिमला. हिमाचल प्रदेश सरकार ने एपिडेमिक डिजिज एक्ट 1897 लागू कर दिया है। यह एक्ट राज्य में कोरोना वायरस को रोकने के लिए लागू किया गया है। इस एक्ट के मुताबिक यदि कोरोना का कोई संभावित मरीज इलाज करवाने से मना करता है तो उसे सजा भी हो सकती है। इस संबंध में सरकार की तरफ से अधिसूचना जारी कर दी गई है।
विधानसभा में मुख्यमंत्री ने की घोषणा
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने गुरुवार को विधानसभा में वक्तव्य के दौरान इस बात की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने विशेष व्यक्तव्य के माध्यम से कहा कि कोरोना वायरस से डरने की जरूरत नहीं है, केवल सुरक्षा बरतना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में कोरोना वायरस को आने से रोकने के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है। इसके लिए सरकार ने अपने सभी सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। इस संबंध में प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार के बाद 6 मार्च को अधिसूचना जारी कर दी है।
इसमें सभी सार्वजनिक सभाओं और समारोहों को स्थगित करने की बात कही है। इसके बावजूद यदि ऐसी सार्वजनिक सभाएं करना जरूरी हो, तो वहां बचाव के प्रति अत्याधिक सावधानी बरतनी होगी। उन्हाेंने कहा कि लाेगाें काे इससे घबराने की जरूरत नहीं है।
428 लाेग काेराेना प्रभावित देशाें से आए
मुख्यमंत्री ने बताया कि अभी तक प्रदेश में कुल 428 लोग कोरोना प्रभावित देशों से आए हैं। इनमें से 268 लोगों की सूचना भारत सरकार ने दी है, जबकि 160 लोगों ने खुद प्रभावित देशों से आने की सूचना दी है। उन्होंने कहा कि चार लोगों को खांसी, जुखाम, बुखार आदि के लक्षण पाए जाने के बाद जांच के लिए नमूने भेजे गए थे। जांच में ये सभी नमूने नेगेटिव पाए गए।
डब्लयुएचओ ने काेराेना काे महामारी किया घाेषित
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना को महामारी घोषित कर दिया है। इसके तहत विदेशों से आने वाले सभी आगंतुकों का वीजा भी रद्द कर दिया है। इससे देश में कोरोना वायरस को रोकने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से इस महामारी से निपटने के लिए सहयोग की भी अपील की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हिमाचल का मौसम कोरोना वायरस फैलने के लिए बहुत अनुकूल है और यदि यहां कोरोना पहुंचता है तो बहुत परेशानी हो सकती है। उन्होंने विपक्ष पर कोरोना वायरस को लेकर दहशत का माहौल खड़ा करने का भी आरोप लगाया।
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