हिमाचल / हिमाचल काे मिली नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स, 1000 जवान होंगे भर्ती



पहाड़ी शहरों में 'आपदा जोखिम न्यूनीकरण की चुनौतियों' विषय पर आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला  में मुख्यमंत्री और अन्य पहाड़ी शहरों में 'आपदा जोखिम न्यूनीकरण की चुनौतियों' विषय पर आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री और अन्य
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पहाड़ी शहरों में 'आपदा जोखिम न्यूनीकरण की चुनौतियों' विषय पर आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला  में मुख्यमंत्री और अन्यपहाड़ी शहरों में 'आपदा जोखिम न्यूनीकरण की चुनौतियों' विषय पर आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री और अन्य

  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण की चुनौतियों' पर दो दिवसीय कार्यशाला में सीएम ने की घोषणा
  • राज्य में सुरक्षित मकानों के निर्माण लिए ट्रेंड किया जाएगा 16,130 कारपेंटर काे

Dainik Bhaskar

Oct 23, 2019, 11:33 AM IST

शिमला.  अापदा से निपटने के लिए अब हिमाचल की अपनी अलग से नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स होगी। केंद्र सरकार ने हिमाचल में अाने वाली संभावित अापदाअों से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बटालियन को भी मंजूरी दी है। एक बटालियन में 1000 से अधिक जवान होंगे।

 

किसी भी तरह की अापदा से निपटने के लिए उनकी मदद ली जाएगी। राज्य सरकार अपना राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल स्थापित करने पर भी काम कर रही है। यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिमला में लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर राज्यों के हित-धारकों के लिए पहाड़ी शहरों में 'आपदा जोखिम न्यूनीकरण की चुनौतियों' विषय पर आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कही।

 

हिमाचल में बरसात अौर बर्फबारी के दौरान अक्सर लोगों को प्राकृतिक अापदाअों का सामना करना पड़ता है। इससे निपटना सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने केंद्र से हिमाचल के लिए अलग से डिजास्टर रिस्पोंस बटालियन दिए जाने की मांग की थी।

 

केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की मांग को मानते हुए प्रदेश को अलग से बटालियन देने की मंजूरी दे दी है। इस कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के सहयोग से राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और हिमाचल विज्ञान प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद कर रही है।


मुख्यमंत्री ने स्कूल सुरक्षा परियोजना को दी मंजूरी: मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने स्कूल सुरक्षा परियोजना को भी मंजूरी दी है। इसके तहत आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी और शिक्षण संस्थानों में माॅक ड्रिल की जाएगी। आपदा की घटनाओं को कम करने और इन्हें रोकने की तैयारियों के लिए सभी स्तरों पर क्षमता निर्माण करके एक आपदा रोधी हिमाचल बनाने के प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष स्थापित किया जाएगा, ताकि प्रभावित समुदाय को तुरंत राहत प्रदान करने के लिए पैसा जारी की जा सके। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एसडीएमए द्वारा तैयार स्कूल प्रबंधन के दिशा-निर्देशों पर एक पुस्तिका का विमोचन किया अौर आपदा प्रबंधन और सुरक्षित निर्माण प्रथाओं पर दो वीडियो जारी किए। शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी ने घरों के निर्माण में पारंपरिक तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। मंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि भवनों का निर्माण नियमानुसार करें ताकि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

अापदा प्रबंधन के लिए 48 हजार से अधिक युवाओं को दिया जाएगा प्रशिक्षण: आपदा से निपटने के लिए राज्य सरकार प्रदेश के युवाओं को प्रशिक्षित करेगी। इसे लेकर सरकार ने 48 हजार 390 युवाअों को अापदा से निपटने की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य तय किया है। सरकार प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम दस से पंद्रह युवाओं को ट्रेनिंग देगी।


सुरक्षित भवनों का निर्माण सुनिश्चित होगा: भूकंप जैसी प्राकृतिक अापदाअों को देखते हुए राज्य सरकार प्रदेश में सुरक्षित भवनों का निर्माण सुनिश्चित करेगी। इसे लेकर प्रदेश के 16 हजार 130 बढ़ईयों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। सुरक्षित और आपदा प्रतिरोधी निर्माण के लिए सभी सरकारी एजेंसियों और गैर-सरकारी संगठनों के सामूहिक प्रयासों के माध्यम से एक समग्र, सक्रिय, प्रौद्योगिकी संचालित और समुदाय आधारित रणनीति तैयार की जाएगी ताकि उसी के अाधार पर कंस्ट्रकशन वर्क हो सके।

 

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