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यस बैंक में हिमाचल के भी 1909 करोड़ रुपए फंसे, प्रदेश के लोगों के 32 हजार खाते: जयराम

5 महीने पहले
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर
  • सीएम ने कहा, यस बैंक में ज्यादा पैसा सरकारी क्षेत्र का, सरकार फंसा पूरा पैसा वापस दिलाएगी
  • सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि बैंक में जमा लाेगाें और सरकार का पूरा पैसे मिले

शिमला. वित्तीय संकट से जूझ रहे यस बैंक में हिमाचल के भी 1909 करोड़ रुपए फंस गए हैं। इस बैंक में प्रदेश के लाेगाें के 32 हजार खाते हैं, जिनमें यह राशि जमा है। ज्यादा पैसा सरकारी क्षेत्र का जमा है, जबकि निजी क्षेत्र का भी करोड़ों रुपए बैंक में फंस गए हैं। यह जानकारी सीएम जयराम ठाकुर ने गुरुवार को प्रदेश विधानसभा में यस बैंक पर एक विशेष वक्तव्य के दाैरान दी।


सीएम ने कहा- प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि बैंक में जमा लाेगाें और सरकार का पूरा पैसे मिले। मुख्यमंत्री ने इसे लेकर विपक्ष पर यस बैंक की आर्थिक स्थिति को लेकर भय और दहशत का माहौल बनाने का भी आरोप लगाया और कहा कि यह ठीक नहीं है। यस बैंक की ओर से दी जा रही ऊंची ब्याज दरों के कारण राज्य सरकार और जनता ने काफी पैसा इस बैंक में जमा करवाया है।


मौजूदा सरकार के सत्ता संभालने से पहले 31 दिसंबर 2017 से पूर्व यस बैंक में सरकारी क्षेत्र का 1344.8 करोड़ रुपए और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 1244 करोड़ रुपए जमा करवाया गया। आरबीआई ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी को यस बैंक का प्रशासक नियुक्त किया है।


प्रस्तावित योजना के अनुसार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यस बैंक में कम से कम 26 फीसदी की हिस्सेदारी सुनिश्चित करेगा, जिसे 49 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है। मूल्यांकन के अनुसार यह राशि लगभग 2500 करोड़ रुपए बनती है। आरबीआई ने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि उनका धन सुरक्षित रहेगा और एक सप्ताह के भीतर स्टेट बैंक आफ इंडिया इस संबंध में यस बैंक को इस संकट से उबारने के लिए योजना तैयार करेगा।

भय काे त्याग कर धैर्य बनाए रखें लाेग
मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रदेश की जनता को किसी भी प्रकार के भय को त्याग कर धैर्य बनाए रखना होगा। विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि राजनीतिक मकसद से हर बात को तूल देना ठीक नहीं है। विपक्ष ऐसा आभास कराने का प्रयास कर रहा है कि यस बैंक के डूबने में भाजपा का हाथ है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी ठीक नहीं है। इस संदर्भ में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने भी अपनी बात रखनी चाही , लेकिन अध्यक्ष ने उन्हें अनुमति नहीं दी। अग्निहोत्री ने बुधवार काे बजट चर्चा के दाैरा इस मुद्दे काे उठाया था। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को इसी मुद्दे पर स्पष्टीकरण दिया। इस पर सदन में शोरगुल का माहौल बन गया सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्य इस मुद्दे पर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे। बाद में नेता प्रतिपक्ष को बोलने की अनुमति देने के बाद ही यह मामला शांत हो पाया।

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