हिमाचल / बहुमंजिला भवन निर्माण की तकनीकी संभावनाएं तलाशेगी कैबिनेट सब कमेटी



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  • कमेटी ने कम जगह काे बताया बड़ा कारण, बुद्धिजीवियाें से भी ली जाएगी राय
  • टीसीपी विभाग से संबंधित सभी शहरी निकायाें का डवलपमेंट प्लान देने काे कहा है

Dainik Bhaskar

Aug 17, 2019, 11:23 AM IST

शिमला. प्रदेश में जगह के अभाव काे देखते हुए राज्य सरकार बहुमंजिला भवन निर्माण के लिए तकनीकी संभावनाओं का पता लगाएगी। सरकार का मत है कि हिमाचल में कम जगह हाेने की वजह से यहां पर हाॅरीजेंट तरीके से भवनाें का निर्माण संभव नहीं है, लिहाजा यहां पर वरटीकल तरीके से ही भवनाें का निर्माण किया जा सकता है।

 

सरकार द्वारा गठित मंत्रिमंडलीय उप समिति कम लैंड होल्डिंग को देखते हुए समिति ऊंचे भवनों को बनाने की सरकार से सिफारिश करेगी, लेकिन अपनी रिपाेर्ट तैयार करने से पहले तकनीकी पहलुओं काे भी देखा जाएगा।

इसमें बुद्धिजीवियाें की भी राय ली जाएगी। समिति के मुताबिक ऊंचे भवनों को मजबूती देने के लिए इंजीनियरों की मदद से मकान का स्ट्रक्चर डिजाइन बदला जाएगा।

 

20 हजार गांव काे टीसीपी से बाहर करने के लिए पहले प्रदेश भर का करेगी दाैरा
हिमाचल में उपसमिति काे लगातार लाेगाें से मांग प्राप्त हाे रही है कि उनके गांव काे टीसीपी के दायरे से बाहर निकाला जाए। सरकार के पास 100 से अधिक लाेगाें के आवेदन प्राप्त हाे चुके है। इस पर किसी भी तरह का निर्णय लेने से पहले समिति के सदस्य प्रदेश का दाैरा कर स्थिति का जायजा लेंगे।

 

लाेगाें से बात करके यह पता लगाएंगे कि टीसीपी में शामिल करने के बाद उन्हें किस तरह की दिक्क्ताें का सामना करना पड़ रहा है। उनसे पूछा जाएगा उन्हें क्याें टीसीपी से बाहर हाेना है। समिति गुण दाेष के आधार पर अपनी रिपाेर्ट तैयार करेगी। समिति के सदस्य शीघ्र प्रदेश का दाैरा करेंगे।

 

उपसमिति ने विभाग से मांगा शहरी निकायाें का डवेलपमेंट प्लान
उपसमिति ने टीसीपी विभाग से संबंधित सभी शहरी निकायाें का डवलपमेंट प्लान देने काे कहा है। पहले चरण में समिति ने शिमला और मनाली का डवलपमेंट प्लान तैयार कर साैंपने काे कहा है। डवलपमेंट प्लान न बनाए जाने के कारण आज इसका खामियजा लाेगाें काे भुगतना पड रहा है जिनकी वजह से एक ताे उनके भवन रेगुलर नहीं हाे पा रहे है दूसर जिन लोगों ने ग्रामीण क्षेत्रों में पहले सड़कें बनाने के लिए जमीन दी,वहां आसपास के 15-15 मीटर में निर्माण पर रोक लगा दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी 5-5 मीटर का सैटबेक सड़क किनारे अनिवार्य किया गया है। इससे लोग परेशान है।
 

उपसमिति में एमपी, एमएलए और स्थानीय प्रतिनिधियाें काे भी किया जाएगा शामिल
उपसमिति लाेगाें 20 हजार से अधिक गांव काे टीसीपी के दायरे से बाहर निकालने के लिए जाे रिपाेर्ट तैयार करेगी उसे तैयार करने से पहले एमपी, एमएलए औरर स्थानीय प्रतिनिधियाें काे भी अपने साथ शामिल करेगी। उनसें भी इस संबंध में राय ली जाएगी। लाेगाें काे पेश आ रही समस्याओं काे सबके साथ विचार विमर्श करके अपने निर्णय काे रिपाेर्ट में शामिल किया जाएगा। इसके बाद इस रिपाेर्ट काे कैबिनेट में रखा जाएगा।

 

 

इस मसले पर आईपीएच मंत्री और अध्यक्ष कैबिनेट सब कमेटी महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि कम लैंड होल्डिंग को देखते हुए बहुमंजिला इमारतें बनाने की जरूरत है। सुरक्षित भवन निर्माण के लिए तकनीकी संभावनाओं का पता लगाया जाएगा। गांव काे टीसीपी के दायरे से बाहर करने के लिए एमपी, एमएलए और स्थानीय प्रतिनिधियाें काे भी शामिल किया जाएगा। समिति के सदस्य प्रदेश का दाैरा कर लाेगाें से भी बात करेगी।

 

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