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ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए प्रदेश में एकमात्र मेमोग्राफी मशीन आईजीएमसी में, सरकार ने हर जिला अस्पताल में लगाने का किया वादा

एक वर्ष पहले
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प्रदेश में एकमात्र मेमोग्राफी मशीन आईजीएमसी में। ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़ रहे। फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
प्रदेश में एकमात्र मेमोग्राफी मशीन आईजीएमसी में। ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़ रहे। फाइल फोटो
  • तीसरे या चौथे स्टेज में पहुंचने पर ही पता चलता है कैंसर का, तब बचने के चांस होते है कम
  • स्तन में गांठें पड़ना शुरू हो जाए तो 35 साल के बाद महिलाओं को जांच करवाते रहना चाहिए

शिमला. ब्रेस्ट कैंसर की जांच करने की प्रदेश में सिर्फ एक मेमोग्राफी मशीन आईजीएमसी के रेडियोलॉजी विभाग में स्थापित है। मशीन की कमी की वजह से प्रदेश की महिलाओं को बीमारी की जांच कराने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में बीमारी की जानकारी अक्सर तीसरे या चौथे स्टेज में पता चलती है। इस मशीन से अबतक 2500 से ज्यादा महिलाओं की जांच हो चुकी है। उसमें 80 फीसदी तक तब आए जब वह चाैथे स्टेज में पहुंच चुके थे। हालांकि सरकार ने बजट में हर जिले में मशीन लगाने का वादा किया है।
 

35 साल के बाद हमेशा जांच करवाएं महिलाएं
अगर महिलाओं के स्तन में गांठें पड़ना शुरू हो जाए तो 35 साल के बाद महिलाओं को लगातार जांच करवाते रहना चाहिए। रिसर्च में पाया गया है कि 35 से 50 साल की आयु के दौरान महिलाएं स्तन कैंसर की शिकार हो रही हैं। इसका मुख्य कारण जागरूकता की कमी है। 35 वर्ष के बाद महिलाओं को हर साल मैमोग्राफी टेस्ट करवाना चाहिए। ब्रेस्ट कैंसर को लेकर महिलाओं के स्तनों में गांठ का बनना, स्तनों से पीक निकलना आदि कई बीमारियां है जिसका मेमोग्राफी से आसानी से पता लगाया जा सकता है।
 

क्याें लेट पता चलता है ब्रेस्ट कैंसर का
चिकित्सकों के अनुसार आमतौर पर जब कैंसर की गांठें बनना शुरू होती है तो इसकी जांच के लिए महिलाएं नहीं करवाती। खासकर ग्रामीण महिलाएं कैंसर की शुरूआत में जांच नहीं करवाती। वह कैंसर की गांठें बनना शुरू होती है तो वह उसे नॉर्मल बीमारी समझकर जांच के लिए जांच नहीं करवाती। मगर जब यह तीसरे स्टेज से आगे बढ़ जाता है और इसमें दर्द होना शुरू होता है तो ही वह जांच के लिए आती है।
 

बच्चों को दूध न पिलाना या अन्य कारण
बदलती जीवन-शैली ने स्तन कैंसर का खतरा और बढ़ा दिया है। आम तौर पर स्तन कैंसर 45 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को होता था, लेकिन खराब जीवन-शैली के चलते यह उम्र घटकर लगभग 25 से 30 साल तक हो गई है। इसका कारण है देर से मां बनना, बच्चे को कम समय तक दूध पिलाना और माहवारी का कम उम्र में ही शुरू होना स्तन कैंसर के कुछ प्रमुख कारण हैं। 

क्या कहते हैं आईसीएमआर के आंकड़े
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार देश में पिछले कुछ सालों में कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ा है। ब्रेस्ट कैंसर ने सबसे तेजी से अपने पांव पसारे हैं। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ा है। साल 2016 की आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार देश में कैंसर के मरीजों की संख्या 14 लाख से ज्यादा है। भारत में हर साल 10 लाख मरीज कैंसर की बीमारी का इलाज कराते हैं। पुरुषों में सबसे ज्यादा तादाद फैफड़े के कैंसर के मरीजों की है जो कि 10.6 फीसदी है जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की तादाद 27.5 फीसदी है।