आईआईटी मंडी ने किया अलाइंड कार्बन नैनोट्यूब्स आधारित इलेक्ट्रोड का विकास

3 वर्ष पहले
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  • बढ़ेगी दुनिया भर में यूज किए जाने वाले एनर्जी स्टोरेज़ डिवाइस की क्षमता
  • आईआईटी के इस शोध से पूरे विश्व में परफेक्ट बैट्री की तलाश होगी पूरी
  • मंडी आइआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विश्वनाथ बालकृष्णन व उनके रिसर्च स्कॉलर पीयूष अवस्थी ने किया शोध

मंडी (संजय सैनी). आईआईटी मंडी ने अलाइंड कार्बन नैनोट्यूब्स आधारित इलेक्ट्रोड का विकास किया है। जिनकी मदद से अब उच्च क्षमता के एनर्जी सुपरकैपेसिटर बन पाएंगे। आईआईटी मंडी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विश्वनाथ बालकृष्णन व उनके रिसर्च स्कॉलर पीयूष अवस्थी ने इस उपलब्धि को हासिल किया है। उनका यह शोध एडवांस्ड मटीरियल इंटरफेस और एसीएस अप्लाइड नैनो मटीरियल्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

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बढ़ेगी एनर्जी स्टोेरेज डिवाइस की क्षमता:

इस शोध से दुनियाभर में यूज होने वाले एनर्जी स्टोरेज़ डिवाइस की क्षमता बढ़ेगी। ज्यादा एनर्जी वाले एनर्जी स्टोरेज़ डिवाइस आम लोगों को यूज करने के लिए मिल पाएंगे। इसलिए कहा जा सकता है कि मंडी आईआईटी के इस शोध से दुनियाभर में एनर्जी स्टोरेज़ डिवाइस के क्षेत्र में नई क्रांति आई है। आईआईटी मंडी के शोधकर्ता पीयूष अवस्थी ने अपने इस शोध में बताया है कि कैमिकल वेपर डिपोजिशन नामक प्रक्रिया से वर्टिकली अलाइंड कार्बन नैनोट्यूब्स के ‘फॉरेस्ट’ तैयार किए जो इलोक्ट्रोलाइट से गीला (हाइड्रोफिलिक) हो सकते हैं।

 

परफेक्ट बैट्री की तलाश होगी पूरी:

वर्तमान में ‘परफेक्ट’ बैट्री की तलाश में पूरी दुनिया है। जिस पर शोध भी हो रहे हैं ताकि बैट्री ज्यादा एनर्जी स्टोर करे और जल्द चार्ज हो जाए। बार-बार बखूबी चार्ज हो। पर लगभग सभी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक कार में भी लीथियम आयन बैट्रियों का उपयोग किया जाता है। जिनकी अपनी सीमाएं हैं। लीथियम ऑयन बैट्रियों की एक सबसे बड़ी कमी इनके चार्ज होने में ज्यादा समय लगना है। जिसके परिणामस्वरूप इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लंबे समय तक काम बंद कर देते हैं। इतना ही नहीं, यह बैट्रियां अधिक टिकाऊ भी नहीं होती हैं। ऐसे में यह एनर्जी सुपरकैपेसिटर मददगार बनेगा।