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जिला कांगड़ा में उत्पादित होने वाला लाल चावल और चंबा के सफेद शहद के निर्यात में निवेशकों ने दिखाई रूचि

9 महीने पहले
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दुबई के निवेशक मोहम्मद खलीफा लाल चावल के बारे में जानकारी लेते
  • दुबई के निवेशक मोहम्मद खलीफा ने 10 किलो लाल चावल, हल्दी और शहद ले जाने की पेशकश की

धर्मशाला (प्रेम सूद). धर्मशाला में आयोजित दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर मीट के दौरान विभिन्न उत्पादकों व् सरकारी विभागों दवारा लगाई गई प्रदर्शनी में जिला कांगड़ा में उत्पादित होने वाला लाल चावल और चंबा का सफेद शहद देश-विदेश से आए निवेशकों को बहुत पसंद आए।
 
यूएई सहित कई देशों के निवेशकों ने लाल चावल, चंबा का सफेद शहद, कांगड़ा चाय, कुल्लू शॉल सहित कई हिमाचली उत्पादों का आयात और निर्यात करने के लिए स्टॉल संचालकों से बातचीत कर जानकारी ली। दुबई के निवेशक मोहम्मद खलीफा ने भी जब लाल चावल के बारे में जानकारी ली तो वह भी काफी उत्‍साहित हुए और 10 किलो चावल साथ ले जाने की पेशकश की।
 
उन्‍होंने कहा वह 10 किलो चावल, हल्दी व शहद अपने साथ ले जाएंगे। आयरन व जिंक की कमी से होने वाले अनीमिया रोग को लाल चावल दूर करता है। प्रोटीन से भरपूर लाल चावल की फसल हिमाचल में कांगड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों में तैयार होती है। लाल चावल में आयरन, जिंक व एंटीऑक्साइड भारी मात्रा में पाया जाता है। यह गर्भवती महिलाओं के लिए काफी उपयोगी है।
 
यह धान झुलसा रोग के लिए प्रतिरोधी होने के साथ-साथ खेतों में 35 से 42 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार देता है। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो लाल चावल 50 से 100 रुपए प्रति किलो बिकता है और इसकी मांग भी अधिक है। इन्वेस्टर मीट ने जहां हिमाचली उत्पादों की गुणवत्ता के आधार पर अधिक कीमत मिलने की उम्मीद बंधी वहीँ दुनिया में इन उत्पादों को नई पहचान मिली है।
 
बता दें कि हिमाचल का लाल चावल पहले से ही प्रसिद्ध है लेकिन इन्वेस्टर मीट में इसे ग्लोबल पहचान मिली। इन्वेस्टर मीट में हिमाचली उत्पादों के स्टॉल की संचालिका और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की डिप्टी सीईओ लातिका सहजपाल ने बताया कि हिमाचली उत्पादों को निवेशक खूब पसंद कर रहे हैं। यूएई सहित कई निवेशकों ने हिमाचली उत्पादों को खरीदने के लिए रूचि दिखाई है।
 
बागवानी विभाग का सफेद शहद निवेशकों को खूब पसंद आ रहा है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया कि उनके स्टॉल में दस फ्लेवर हैं। इसमें से सफेद शहद बिल्कुल अलग है। इसकी वजह यह है कि यह शहद खास किस्म की बूटी के फूलों से मिलता है, जो जिला चंबा के कुछ हिस्सों में ही उगती है।
 
सफेद शहद जिसे सोलाई शहद (व्हाइट गोल्ड हनी) कहते हैं, महज सोलाई बूटियों के सफेद फूल से ही प्राप्त होता है। इसकी खासियत है कि इसमें अलग महक होती है और स्वाद भी आम शहद की तुलना में बेहतर होता है। यही कारण है कि देश में सोलाई शहद की काफी मांग है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह शहद कैंसर रोग के लिए लाभदायक होता है।

700 से 750 रुपए प्रति किलो बिकता है सफ़ेद शहद: सोलाई शहद की बाजार में बेहद मांग है। एक किलो शहद पाने के लिए आपको 700 से 750 रुपए खर्च करने पड़ेंगे जबकि मल्टी फ्लोरा या दूसरा शहद 350 से 400 रुपये तक मिल जाएगा। सोलाई शहद सफेद रंग के कारण अन्य शहद से अलग दिखता है। इसलिए इसकी हर ओर बहुत मांग है।
 

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