हिमाचल / खुशवंत लिट फेस्ट में पहुंची शर्मिला टैगोर ,60 सालों के फिल्मी सफर को बताएंगी, सेल्फी ली दर्शकों ने



शर्मिला टैगोर पहुंची लिट फेस्ट में। शर्मिला टैगोर पहुंची लिट फेस्ट में।
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शर्मिला टैगोर पहुंची लिट फेस्ट में।शर्मिला टैगोर पहुंची लिट फेस्ट में।

  • कसौली में शुरू हुए खुशवंत सिंह लिटरेरी फेस्टिवल में पहुंचे वक्ता

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2019, 01:14 PM IST

कसौली. तीन दिवसीय खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में भाग लेने के लिए फिल्म अभिनेत्री शर्मिला टैगोर आज पहुंची। शर्मिला टैगोर कार्यक्रम के दौरान 

फिल्मस्तान में 60 साल विषय पर चर्चा करेंगी। उनके साथ शांतनु राय चौधरी भारतीय सिनेमा पर चर्चा करेंगे। कार्यक्रम के दौरान कई विषयों पर चर्चा हो रही है।

 

महात्मा गांधी अगर आज होते तो कश्मीर शटडाउन पर उनका क्या रूख होता? वरिष्ठ पत्रकार सुनीत अरोड़ा ने जब रामिन जेहानबेग्लू से ये सवाल पूछा तो वे बोले- वे आज के सिर्फ कश्मीर पर ही असहमत न होते, बल्कि भारतीय चुनाव में वोट तक न देते। वे उन सब बातों पर असहमत होते जिन पर आज लोग चुप हैं। 

 

रामीन अपनी किताब द डिसओबिडिएंट इंडियन पर बात करने के लिए कसौली पहुंचे थे। उनके साथ बात कर रही थीं जेएनयू की प्रोफेसर बिंदु पुरी और सुनीत अरोड़ा। रामिन ने कहा कि आज दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है उसे लेकर एक तरह की चुप्पी नजर आती है। उसका कारण है विश्व नेताओं में मजबूत नैतिकता न होना। नैतिकता भय, हिंसा और स्वार्थ के न होने पर आती है और आज जिधर देखिए इन्हीं चीजों का बोलबाला है।

 

उन्होंने कहा कि गांधी को समझने के लिए उनके विचारों का अभारतीयकरण करना जरूरी है। आज जब भी उनकी बातों को भारतीय संदर्भों में देखेंगे तो उनके विचारों तक नहीं पहुंच पाएंगे। प्रोफेसर बिंदु ने कहा कि गांधी जी का सत्याग्रह और असहमति वह नहीं है, जो आज समझी जाती है। जब वे कहते हैं कि पाप से घृणा करो, पापी से नहीं तो इसे समझने की जरूरत है।

 

ईरानी मूल के कनाडाई नागरिक प्रोफेसर रामिन गांधीवेत्ता हैं, इन दिनों दिल्ली में पढ़ाते हैं। कसौली में शुक्रवार से शुरू हुए खुशवंत सिंह लिटरेरी फेस्टिवल में इस वर्ष थीम रखी गई है सेंट एंड सिनर्स। इसीलिए प्रोग्राम की शुरुआत हुई प्रोफेसर गोस्वामी के प्रेजेंटेशन- गॉड्स एंड डिमेन इन इंडियन आर्ट से।

 

वैज्ञानिक महिलाओं पर आई किताब पर हुई बात

एक और सेशन में इसरो की वैज्ञानिक महिलाओं पर आई किताब पर बात की गई। ऑथर मिनी वैद के साथ इस बारे में बात कर रही थीं सत्या शरण और विष्णु सोम। उन्होंने मंगलयान से लेकर आज तक की उपलब्धियों को अपनी किताब में पिरोया है। इसके अलावा एक सेशन में हिस्टोरियन स्वपना लिडल और गिल्स टिलसटन ने दिल्ली-फ्रॉम सुजानसिंह टू खुशवंत सिंह पर बात की।

 

बाबा नानक के पदचिन्हों को फॉलो करते हुए अपने ट्रेवलिंग को डाक्यूमेंट कर रहे हैं : थीम के अनुसार संतों पर बात होनी थी तो इसमें श्री गुरुनानक देव जी से बेहतर बात कोई हो नहीं सकती थी। सिंगापुर बेस्ड एक्स कॉर्पोरेट और अब फुलटाइम ऑथर-रिसर्चर अमरदीप सिंह ने बात की उन जगहों के बारे मे जहां-जहां श्री गुरुनानक देव जी गए थे।

 

इससे पहले वे सिखों के लॉस्ट हेरिटेज पर दो किताबें लिख चुके हैं। वे अब जिस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं उनमें उन सात देशों में बाबा नानक के पदचिन्हों को फॉलो करते हुए ट्रैवल और डॉक्यूमेंट करना है। अमरदीप ने बताया कि वे इस पर सत्तर फीसदी काम पूरा कर चुके हैं। इस दौरान वे पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान और इराक के अलावा सऊदी अरब, श्रीलंका और तिब्बत तक जा चुके हैं।

 

उन्होंने बताया कि वे इन सब चीजों को इसलिए डॉक्यूमेंट कर रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को अपने विरसे और धर्म के बारे में सही और सटीक जानकारी दी जा सके। अपनी रिसर्च को डॉक्यूमेंट्री के तौर पर लाने के पीछे क्या मकसद है? वे बोले-नई जेनरेशन के लिए किताबें सेकेंडरी हैं और ऑडियो-विजुअल मीडियम पहले। तो इसलिए जरूरी था कि मैं अपना सारा काम डॉक्यूमेंट्री के तौर पर सामने लेकर आऊं। 2021 तक ये प्रोजेक्ट पूरा हो जाने की बात उन्होंने कही। 

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