हिमाचल / शहीदों को समर्पित द्रास से कोहिमा तक 4500 किमी की मैराथन पहुंची नाहन



अल्ट्रामैरॉथन में भारतीय एयर फोर्स के जवान अल्ट्रामैरॉथन में भारतीय एयर फोर्स के जवान
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अल्ट्रामैरॉथन में भारतीय एयर फोर्स के जवानअल्ट्रामैरॉथन में भारतीय एयर फोर्स के जवान

  • 6 नवंबर को कोहिमा वॉर मेमोरियल नागालैंड में संपन्न होगी

Dainik Bhaskar

Oct 11, 2019, 12:18 PM IST

 

नाहन. कारगिल व कोहिमा वार में विजय व शहादत पाने वाले शहीदों को समर्पित द्रास से कोहिमा (नागालैंड) तक 4500 किलोमीटर की अल्ट्रामैरॉथन नाहन से होकर गुजारी। बड़ी बात तो यह है कि इस अल्ट्रा मैराथन दौड़ में शामिल इंडियन एयर फोर्स के जवानों की टीम को स्क्वाड्रन लीडर सुरेश राजदान लीड कर रहे हैं। 

 

स्क्वाड्रन लीडर सुरेश एयरक्राफ्ट पायलट है। अल्ट्रा मैराथन दौड़ में इंडियन एयरफोर्स के 32 जवानों की टीम शामिल हैं। देश और दुनिया की सबसे लंबी ग्लोरी रन के कारगिल वार मेमोरियल द्रास जम्मू कश्मीर से शुरू होकर वीरवार को नाहन पहुंची।

 

द्रास स्थित कारगिल शहीदों की शहादत को समर्पित वार मेमोरियल से करीब 4500 किलोमीटर की यह अल्ट्रा मैराथन दौड़ 6 नवंबर को कोहिमा वॉर मेमोरियल नागालैंड में समाप्त होगी।  

 

टीम लीडर स्क्वाड्रन सुरेश राजदान ने बताया कि इस दौड़ में प्रतिदिन 100 किलोमीटर दौड़ जाने का लक्ष्य रखा है। करीब 45 दिनों में यह दौड़ पूरी की जानी है। उन्होंने बताया कि इस अल्ट्रामैरॉथन का मुख्य उद्देश्य सड़क पर सुरक्षा हेतु यह संदेश देना कि सड़कों पर कोई ऐसी एक्टिविटी न करें, जिससे दुर्घटना संभावित हो।

 

दूसरा बड़ा उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फिट इंडिया-स्वच्छ इंडिया के संदेश को भी फैलाना इस दौड़ बढ़ा लक्ष्य है। अल्ट्रा मैराथन का मुख्य उद्देश्य और लक्ष्य 1999 के कारगिल युद्ध व 1944 में द्वितीय वार्ड वार के दौरान कोहिमा वॉर में  जापानियों के साथ आमने-सामने हुई लड़ाई में जीत हासिल करने के दौरान शहादत पाने वाले सैनिकों के सम्मान में यह दौड़ दौड़ी जा रही है।

 

स्क्वाड्रन लीडर सुरेश का कहना है कि आसमान से देश के एक कौने से दूसरे कौने को नापना आसान हो सकता है, मगर कदमों की गिनती से देश की धरती को नापना शहादत को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

 

महिला फ्लाइट लेफ्टिनेंट टीम में शामिल :

अल्ट्रामैरॉथन की इस टीम में एक महिला फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिमरनजीत कौर और 52 वर्षीय वारंट ऑफिसर इंद्रपाल भी शामिल हैं। यह अल्ट्रा मैराथन दौड़ द्रास से लेह मनाली हाईवे जिसकी अधिकतम हाईट 13000 फीट है। तांगलंगला पर्वत जिस की अधिकतम ऊंचाई 17480 फिट है, वहां से होकर गुजरी है। शहीदों की शहादत को समर्पित इस अल्ट्रा मैराथन के दौड़ को एयर वाइस मार्शल पीएम सिन्हा द्वारा कारगिल वॉर मेमोरियल द्रास से झंडी देकर रवाना किया गया था।

 

 

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