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शिमला. वित्त वर्ष 2020-21 के बजट पर चर्चा के पहले दिन सदन में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बीच तीखी नोकझोंक हुई। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार काे कर्ज और महंगी दवाई खरीदने के मामले से लेकर कई सवाल किये। अग्निहोत्री ने सरकार के बजट को पेपरलैस के साथ-साथ डायरेक्शन लैस करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस दस्तावेज में कर्जे का जिक्र ही नहीं किया।
प्रदेश में अराजकता का माहौल
प्रदेश में वित्तीय अराजकता का माहौल पैदा हो चुका है, लेकिन सरकार इससे दूर भाग रही है। सरकार ने दो साल में करोड़ो का कर्ज लिया और बजट दस्तावेज में इसका जिक्र तक नहीं किया। उन्होंने कहा कि अब तक भाजपा सरकार ने 1092 करोड़ से अधिक का कर्ज लिया है। आने वाले समय में भी सरकार कर्जे पर चलेगी। उन्होंने यश बैंक का भी मसला उठाया। इस बात पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यस बैंक को लाइसेंस पूर्व की यूपीए सरकार के समय दिया गया।
इन्वेस्टर्स मीट पर करोड़ों का खर्च
इन्वेस्टर्स मीट पर करोड़ों का खर्च करने पर मुकेश अग्निहोत्री ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सेंट्रल रोड फंड का बंदर बांट हो रहा है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि ये आंकड़े कहां से आए। अग्निहोत्री ने कहा कि 15 करोड़ के बद्दी में सेंटर को एक लाले को पौने दो लाख रुपए प्रति वर्ष के हिसाब से लीज पर दे दिया। सेंटर रोड फंड की अधिक राशि मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में बांटने का आरोप लगाया तो सीएम ने कहा कि यह गलत आंकड़े हैं और फिगर और फैक्ट नहीं हैं।
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि यदि मैं गलत हूं तो मैं इस्तीफा दूंगा, नहीं तो मुख्यमंत्री इस्तीफा दें। मुकेश अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने राशन से अधिक दवाई पर 125 करोड़ रुपए खर्च दिए। उन्होंने ब्रिक्स समेत फोरन फंडिंग मामले पर भी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बोले, जयराम ठाकुर सबसे अधिक ऋण लेने वाले मुख्यमंत्री बनेंगे। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि आज देश के उद्योगपतियों को सरकार के अफसर फोन कर रहे हैं कि कब से इंवेस्टमेंट करना है।
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