हिमाचल / लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ मंडी का सामूहिक कन्या पूजन, शिवरात्रि में हुआ था आयोजन

शिवरात्रि महोत्सव पर सेरी मंच में आयोजित कन्या पूजन (फाइल फोटो) शिवरात्रि महोत्सव पर सेरी मंच में आयोजित कन्या पूजन (फाइल फोटो)
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शिवरात्रि महोत्सव पर सेरी मंच में आयोजित कन्या पूजन (फाइल फोटो)शिवरात्रि महोत्सव पर सेरी मंच में आयोजित कन्या पूजन (फाइल फोटो)

  • सेरी मंच पर 1008 कन्याओं का किया था सामूहिक पूजन
  • बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान में भी मंडी जिला को दो बार मिल चुका है राष्ट्रीय पुरस्कार

दैनिक भास्कर

Nov 21, 2019, 12:04 PM IST

मंडी. यहां आयोजित अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के दौरान 9 मार्च 2019 को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ थीम के साथ सेरी मंच पर 1008 कन्याओं के सामूहिक पूजन की गतिविधि को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स-2020 में शामिल किया गया है।

 

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स प्रबंधन ने ई-मेल के जरिए डीसी मंडी ऋग्वेद ठाकुर को इसकी अधिकारिक सूचना दी है। इससे पहले बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान में शानदार काम के लिए मंडी जिला प्रशासन को इसी साल दो बार राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है।


डीसी मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने जिलावासियों को इस शानदार उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि जिले में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को जन सहयोग से जन आंदोलन बनाने में सफलता मिली है।

 

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स-2020 में मंडी का नाम आना जिलावासियों समेत पूरे प्रदेश के लिए गर्व और सम्मान की बात है। शिवरात्रि मेले के दौरान पहली बार सेरी मंच पर 1008 कन्याओं का सामूहिक पूजन का कार्यक्रम कर पुरातन संस्कृति को बेटियों की सुरक्षा से जोड़ने की कवायद की गई।

 

इसमें जनसहयोग से 4 से 10 वर्ष आयु तक की बच्चियों के पूजन के जरिए अपनी समृद्ध परंपराओं से संदेश ग्रहण कर बेटियों के महत्व को लेकर जन जागृति लाने और बेटा-बेटी में भेद की नकारात्मक मानसिकता में बदलाव लाने के प्रयास किए गए।

 

प्रशासन की इस पहल ने बड़े पैमाने पर लोगों का समर्थन और तारीफ बटोरी। शहर उत्सव के मौके पर कन्या भ्रूण हत्या को रावण का प्रतीक मानकर इसका दहन करके बेटा-बेटी में भेद की दरिद्र सोच को समाप्त करने का प्रभावी संदेश जन-जन तक पहुंचाने के प्रयास किए गए।
 

युवाओं को रेडक्रॉस की यूथ विंग से जोड़कर अभियान के संदेश को जन-जन तक ले जाया जा रहा है। इसके अलावा प्रशासन ने पंचायत स्तर पर बेटियों के जन्मोत्सव मनाकर व मेलों-त्यौहारों में मानव श्रृंखला बनाकर, सामूहिक कन्या पूजन जैसे कार्यक्रम आयोजित कर जन-जन तक अभियान का संदेश पहुंचाने एवं जागरूकता लाने के कारगर प्रयास किए हैं।

 

महिला मंडलों, स्कूल प्रबंधन समितियों, सर्व देव समाज संस्था और पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधियों की भागीदारी से गांव-गांव जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई है। सरकारी कार्यक्रमों में नवजात बच्चियों के अभिभावकों को बधाई पत्र एवं उपहार देकर सम्मानित व प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है।


बालिका गौरव उद्यान योजना शुरू की गई: जिला में 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान में एक नया आयाम जोड़ते हुए इसे पर्यावरण सुरक्षा से जोड़ कर बालिका गौरव उद्यान योजना शुरू की गई है। जिले की हर पंचायत में बेटियों के नाम पर उद्यान स्थापित करने की इस मुहिम में सामुदायिक भागीदारी बनाई गई है।

 

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