हिमाचल / उसने कहा-हे मनीषा गॉड ब्लैस यू... मैंने सिर उठाकर चलना शुरू कर दिया,कसौली में मनीषा कोइराला ने बताई अपनी कहानी



मनीषा कोइराला। फाइल फोटो मनीषा कोइराला। फाइल फोटो
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मनीषा कोइराला। फाइल फोटोमनीषा कोइराला। फाइल फोटो

  • मनीषा ने कहा जो पहले गलतियां की थी उस पर काबू पाने का प्रयास करती हूं
  • मनीषा ने अपनी जर्नी को विस्तार से 'हील्ड' नामक किताब में दर्ज किया है

Dainik Bhaskar

Oct 14, 2019, 11:05 AM IST

कसौली. कीमोथैरेपी से मेरे बाल गिर चुके थे। आंखों की पलकें तक गायब थीं। कमजोर शरीर लिए मैं मुंबई एयरपोर्ट पर उतरी। ये वही शहर था जिसमें मैंने सफल फिल्मों के जश्न मनाए थे। जहां मुझे देखने के लिए भीड़ जुट जाती थी। लोग मेरा इंतजार करते थे। लेकिन ये आना, सिर्फ मेरे लिए खास था। मैं मुंबई यानी अपने जीवन में लौट रही थी। कैंसर को जीतकर आई मनीषा कोइराला, कसौली में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में अपनी कहानी शेयर कर रही थीं।

 

मनीषा कोइराला ने कहा कि हालांकि डॉक्टर्स, करीबी दोस्त और परिवारवाले साथ थे, फिर भी मैं अकेली थी। मुझे लगा कि लोगों ने मुझे सुंदर रूप में देखा है, अब इस तरह देखेंगे तो क्या कहेंगे ..? मैं सिर पर हुड पहने रहती। सड़क पर चलते हुए नीचे मुंह कर लेती। एक दिन मैं अपने अपार्टमेंट के पास मॉर्निंग वॉक कर रही थी। तभी एक साइकलिस्ट वहां से गुजरा। कुछ दूर जाकर उसने आवाज दी-हे मनीषा, गॉड ब्लैस यू।


मैंने सिर उठाकर देखा तो वो दोनों हाथों से थम्सअप का इशारा कर रहा था। ये पल था जब मुझे लगा कि मनीषा सिर्फ उस सुंदर एक्टर का नाम नहीं है जिसे लोग पर्दे पर देखते थे। तालियां बजाते थे। मनीषा एक इंसान भी है जिसके सुंदर न रहने पर भी लोग उसे पसंद कर सकते हैं। सुंदरता के लिए मेरा नजरिया बदल गया। बस वहीं से मैंने सिर ऊंचा करके पूरी हिम्मत के साथ चलना शुरू किया और अब मेरे पास पीछे मुड़कर देखने के लिए कोई वजह नहीं है।

 

उन्होंने अपनी जर्नी को विस्तार से 'हील्ड' नाम से आई किताब में दर्ज किया है। उनका कहना था कि किसी भी बीमारी को जीतने में सबसे ज्यादा जो चीज मदद करती है वो है आपकी विलपावर और पॉजिटिविटी। आप हर उस चीज को ट्राई करो जिसमें आपका भरोसा है-पूजा, दुआ, डॉक्टर, हीलिंग या कुछ और लेकिन आपको जो चीज ताकत देगी वह है आपके अंदर की भावना। तभी तो मैंने अपनी कीमोथेरेपी को विटामिन शॉट़स की तरह लिया था।

 

मनीषा को अपने ओवेरियन कैंसर का पता उस वक्त चला जब वे थर्ड स्टेज में पहुंच चुकी थीं। ऐसा कैसे हुआ? वे बोलीं-मेरा शरीर बार-बार इशारा कर रहा था। लेकिन मैं नजरअंदाज करती रही। मेरी सलाह है कि जब भी आपका शरीर कुछ ऐसे लक्षण दिखाए तो उन्हें इग्नोर न करें। जब वे इस बीमारी की गिरफ्त में थीं तो कौन लोग थे जिन्होंने उन्हें हिम्मत दी?

 

मनीषा ने बताया- मेरी मां-भाई और कुछ दोस्त। बाद में डॉक्टर्स और ऐसे लोग भी इस लिस्ट में जुड़ते गए जो पहले मेरे दोस्त नहीं थे। जब मैं इलाज के लिए जा रही थी तो मेरी दोस्त ने कहा-मेरी बर्बरी की ये जैकेट लेकर जाओ। जब ठीक हो जाओ तो वापस जरूर करना। जैकेट के रूप में वो एक दोस्त की दुआ थी, जिसे रब ने सुना और मुझे सही सलामत वापस भेजा।

 

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मेरा जीत का मंत्र...

मैं हर दिन एक मंत्र का जाप करती हूं जिससे मुझे हर दिन शक्ति मिलती है, जिंदगी में आगे बढ़ने की। पिछली गलतियां न दोहराने की। हर पल को पूरी तरह जी लेने की। वो है- आई एम हील्ड , आई एम क्योर्ड । कैंसर ने मेरा जीवन के प्रति नजरिया ही बदल दिया। अब मैं हर चीज की कद्र करती हूं। मैं अब हर वो काम कर रही हूं जो रह गया था। फिल्में कर रही हूं जिन्हें नेटफ्लिक्स से लेकर सिल्वर स्क्रीन तक पर देखा जा सकेगा।

 

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