नया साल / तिब्बती समुदाय के आने वाले नए साल लोसर के जश्न को लेकर तैयारियां शुरू

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  • नए साल को लेकर तीन दिन मैक्लोडगंज बाजार बंद रहेगा
  • तिब्बती कलेंडर के मुताबिक यह 2146 वां साल
  • 7 फरवरी को देंगे एक दूसरे को बधाई

Feb 03, 2019, 06:24 PM IST

धर्मशाला,(प्रेम सूद). तिब्बती समुदाय ने नववर्ष (लोसर) की तैयारियां शुरू कर दी हैं। तीन दिन तक चलने वाले लोसर का शुभारंभ 5 फरवरी से होगा। तीन दिन तक तिब्बती के साथ ही मैक्लोडगंज बाजार भी पूरी तरह से बंद रहेगा।

 

धर्मशाला व मैक्लॉडगंज के बाजारों में खासी रौनक है व तिब्बती अपने घरों को सजाने संवारने में लगे हुए हैं। लोसर को धूमधाम से मनाने के लिए तिब्बती समुदाय के लोगों ने अपने घरों के साथ ही चुगलाखंग बौद्ध मठ में भी विशेष सफाई अभियान शुरू कर दिया है।

 

मैक्लोडगंज के लगभग सभी तिब्बती समुदाय के लोग,जवान से बुजुर्ग इस दिन अपनी पारंपरिक पोशाक में तैयार होकर एक दूसरे से मिलते और बधाईं देते हैं। बच्चे और औरतें अपनी रंग बिरंगी पोशाकों में घरों से बाहर निकलकर उत्सव मनाते और एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं।

 

लोसर के दौरान मांस का सेवन पूरी तरह से वर्जित रहेगा।  तिब्बती कलेंडर के मुताबिक यह 2146 वां वर्ष है तथा इसका शुभारंभ पृथ्वी सुअर/सूअर है। पहले दिन 5 फरवरी को लोग अपने घर के मंदिरों में पूजा अर्चना करेंगे तथा परंपरा के मुताबिक बौद्ध मठ में भी पूजा करेंगे।

 

7 फरवरी को रिश्तेदारों और संगे संबंधियों को बधाई दी जाएगी जबकि अंतिम दिन बौद्ध मठ में सामूहिक पूजा अर्चना होगी। इस दौरान चुगलाखंग बौद्ध मठ के अलावा पूरे विश्व में शांति के लिए विशेष प्रार्थना सभा की जाएगी।

तिब्बती नववर्ष लोसर के प्रथम दिन को तिब्बती समुदाय के सभी लोग घरों में ही रहते हैं। परम्परा के अनुसार 5 फरवरी को तिब्बती परिवारों के बच्चे और पुरुष नहाते हैं व 7 फरवरी को महिलाओं के नहाने की परंपरा है।

 

5 फरवरी को ही तिब्बती परिवार अपने घरों की साफ-सफाई करके आकर्षक ढंग से सजाते हैं। तिब्बती युवाओं तेन्जिन छवांग, तेन्जिन देदेन, छेरिंग फुंग्चुक ने बताया कि लोसर पर्व का उन्हें साल भर इंतजार रहता है।

 

इस पर्व के दौरान निर्वासित तिब्बती विशेष पूजा अर्चना कर ईष्टदेव से बुरी आत्माओं को घरों से दूर करने तथा उनके घरों में निवास करने की कामना की जाती है।

 

तिब्बती समुदाय लोसर पर्व के लिए दो माह पहले छांग (देसी मदिरा) तैयार करना शुरू कर देता है। देसी मदिरा का पहले अपने ईष्ट को भोग लगाया जाता है, उसके बाद स्वयं या रिश्तेदारों को आदान-प्रदान किया जाता है। वहीं समुदाय पर्व के दौरान भगवान को चढ़ाने के लिए मैदे से खपस (मटर की तरह दिखने वाले) व्यंजन बनाते हैं।

 

तिब्बती बुजुर्गों के अनुसार पुराने समय में लोसर पर्व पर भेड़ काटा जाता था और उसका सिर ईष्ट देव को चढ़ाया जाता था। अब बदलते दौर में मांस के बजाय समुदाय के लोग मक्खन से बना भेड़ का सिर ईष्टदेव को चढ़ाकर पूजा करते हैं।

 

समुदाय के लोगों का कहना है कि अब भेड़ काटना पसंद नहीं करते हैं, जिसके चलते मक्खन से भेड़ का सिर बनाकर इसे चढ़ाया जाता है।

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