अब डीज़ल की कालिख का उपयोग कर पानी से तेल और जैव रसायन प्रदूषक को सोखा जा सकेगा

3 वर्ष पहले
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मंडी (संजय सैणी). आईआईटी मंडी ने डीज़ल इंजन से उत्सर्जित होने वाली कालिख का उपयोग करते हुए पानी से तेल और अन्य जैव रसायन प्रदूषण को सोखने का सफल प्रयोग किया है। आईआईटी के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में एसोशिएट प्रोफेसर डॉ. राहुल वैश और उनके शोध छात्र विश्वेंद्र प्रताप सिंह व मूलचंद शर्मा ने इसमें सफलता हासिल की है। उन्होंने इस समस्या के समाधान का नया नजरिया पेश किया है। आईआईटी का यह शोध पर्यावरण विज्ञान एवं प्रदूषण नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

 

डीज़ल इंजन से होता है प्रदूषक कणों का ज्यादा उत्सर्जन
ईंधन खपत कम करने और ऊर्जा ज़्यादा देने में डीज़ल इंजन को अन्य इंटर्नल कम्बशन इंजनों से बेहतर माना जाता है पर डीज़ल इंजन से प्रदूषक कणों का ज्यादा उत्सर्जन होता है। यह कण मुख्यतः कालिख है और डीजल जेट के दहन के दौरान ज़्यादा ईंधन वाले हिस्सों में पैदा होते हैं। इससे पर्यावरण संकट बढ़ता है लिहाजा कालिख कम करने के लिए उत्सर्जन के कड़े मानक लागू करने होंगे। कालिख कम करने में कारगर पारंपरिक और गैर-पारंपरिक साधनों का विकास करना होगा। इस विषय में किए गए अध्ययन इंजन की डिज़ाइन पर केंद्रित हैं और वाहन के उत्सर्जन वाले सिरे पर विशेष फिल्टर और ट्रीटमेंट यूनिट लगाने पर जोर देते हैं।


कालिख का सार्थक उपयोग करना है मुमकिन
आईआईटी मंडी के ऐसोशिएट प्रोफेसर डॉ. राहुल वैश और उनकी शोध टीम ने इस समस्या के समाधान का नया नजरिया पेश करते हुए बताया है कि कालिख का उत्सर्जन ‘शून्य’ कर देना असंभव हो सकता है पर उस कालिख का सार्थक उपयोग करना मुमकिन है। कार्बन स्पीसीज़ जैसे कार्बन नैनोट्यूब्स, ग्रेफीन और मोमबत्ती की कालिख ने कई क्षेत्रों में इस संभावना का प्रदर्शन किया है। कार्बन स्पीसीज़ पानी में मौजूद विभिन्न जैव प्रदूषक तत्वों को सोख लेती हैं। इसलिए कार्बन मोनोट्यूब्स, फिल्टर पेपर, मेश फिल्म्स और ग्रैफीन का इस्तेमाल पानी से तेल अलग करने में होता है। चूंकि कालिख में आम तौर पर 90 से 98 प्रतिशत कार्बन की मात्रा होती है इसलिए शोधकर्ता की इस टीम ने ‘ऐडसॉर्बेंट’ के रूप में इस प्रदूषक तत्व की मदद से पानी से तेल और जैव प्रदूषकों को पृथक करने की संभावना पर काम किया। डॉ. राहुल वैश ने बताया कि पानी के प्रदूषण की वजह तेल, जैव प्रदूषकों के रिसाव के अलावा डाई और डिटर्जेंट जैसे प्रदूषक भी हैं जो उद्योगों और लोगों के घरों से निकल कर पानी में मिल जाते हैं। ऐसे में कालिख युक्त स्पांज़ से हम सामान्य घरेलू और औद्योगिक कचरों को कम लागत पर प्रदूषक तत्वों से मुक्त कर सकते हैं। इससे एक अन्य लाभ यह होगा कि हम ऑटोमोबाइल के कचरे का भी सदुपयोग कर पाएंगे।


नए मटीरियल्स आएंगे पानी से तेल अलग करने व हादसों से बचने में काम
पिछले दो दशकों में तेल के टैंकरों या जहाजों और औद्योगिक दुघर्टनाओं की वजह से तेल एवं रसायनों के रिसने की घटनाएं अधिक होने लगी हैं। तेल का उत्पादन एवं परिवहन बढ़ना भी इसकी बड़ी वजह है। शोधकर्ताओं ने हाल में प्रकाशित शोधपत्र में नए मटीरियल्स की जरूरत पर जोर देते हुए लिखा। नए मटीरियल्स पानी से तेल अलग कर लेने और पर्यावरण को इस हादसे से बचाने में काम आएंगे। इससे पूर्व एक अध्ययन में डाॅ. वैश ने मोमबत्ती की कालिख से दो कैटयानिक डाई - रोडोमाइन बी और मिथायलीन ब्ल्यू को पानी से बाहर निकालने में सफलता दर्ज करते हुए कालिख की मदद से प्रदूषक रसायन से छुटकारा पाने की संभावना दिखाई।


 

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