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  • On the birth anniversary of Subhash Chandra Bose, his statue was unveiled in Kandwadi, seminar organized in support of Citizenship Amendment Act.

हिमाचल / सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर कंडवाड़ी में उनकी प्रतिमा का हुआ अनावरण, नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में संगोष्ठी आयोजित

कंडवाड़ी में स्थापित इस प्रतिमा का निर्माण कोलकाता के कारीगरों ने किया है कंडवाड़ी में स्थापित इस प्रतिमा का निर्माण कोलकाता के कारीगरों ने किया है
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कंडवाड़ी में स्थापित इस प्रतिमा का निर्माण कोलकाता के कारीगरों ने किया हैकंडवाड़ी में स्थापित इस प्रतिमा का निर्माण कोलकाता के कारीगरों ने किया है

  • नागरिकता कानून में पहले भी किए गए संशोधन: सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा
  • बोलीं-सीएए के खिलाफ अभियान चलाने वाले करें पाकिस्तानी नागरिक हसीना बेन की भी,चार दिन पहले दी भारत की नागरिकता

दैनिक भास्कर

Jan 23, 2020, 06:00 PM IST

धर्मशाला(प्रेम सूद). सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर आज पालमपुर के कंडवाड़ी स्थित महावतार बाबा जी मेडिटेशन सेंटर ट्रस्ट में योगीराज स्वामी अमर ज्योति के सानिध्य में नेता जी की प्रतिमा का अनावरण किया गया। कंडवाड़ी में स्थापित इस प्रतिमा का निर्माण कोलकाता के कारीगरों ने किया है।

इस मौके पर विश्व शांति व मानव कल्याण के लिए यज्ञ हवन का आयोजन भी किया गया। प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों व विदेश से योगीराज स्वामी अमर ज्योति के अनुयायियों ने हजारों की संख्या में हवन यज्ञ में आहुतियां डालीं।

इस दौरान आयोजित संगोष्ठी में सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) उन लोगों के लिए नहीं है जो पहले से ही भारत में रह रहे हैं। यह शरणार्थी के रूप में रहने वाले हिंदू, बौद्ध, सिख, पारसी और जैन समाज के उन लोगों के लिए है जिनके पूर्वज पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में उत्पीड़न से परेशान होकर भारत आए।

सीएए के खिलाफ अभियान चलाने वालों को पाकिस्तानी नागरिक हसीना बेन की भी बात करनी चाहिए जिन्हें अभी चार दिन पहले ही भारत की नागरिकता दी गई है। अधिवक्ता मोनिका ने कहा कि सीएए के विरोध में उपद्रव और हिंसात्मक प्रदर्शन करने वाले कांग्रेस, आप और कम्युनिस्ट पार्टी के हाथों में खेल रहे हैं। ये दल लोगों को निराधार बातें समझाकर उन्हें बरगलाने में जुटे हैं।

ये दल शायद इसलिए परेशान हैं क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसलों से उनकी वोट बैंक की राजनीति पूरी तरह असफल होती जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों ने भी नागरिकता कानून में समय-समय पर संशोधन किया, लेकिन तब उसका विरोध नहीं हुआ। अब वे लोग भी विरोध में उतर आए हैं, जिनकी पार्टी के नेताओं ने सरकार में रहते इस कानून में बदलाव किए।

उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. लालता प्रसाद मिश्र ने कहा कि उपद्रव व हिंसा साजिश का हिस्सा है। राष्ट्रवादी विचारक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने देश के बंटवारे के दौरान राजनीतिक दलों की भूमिका से लेकर राष्ट्रवादी विचारधारा के खिलाफ उठने वाली आवाजों पर तीखा प्रहार किया। बोले, जिसे राजनीतिक दलों का विरोध करना है, शौक से करें लेकिन भारत में राष्ट्र का विरोध बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक भारत का विभाजन तो कई बार हुआ लेकिन सांस्कृतिक भारत का विभाजन नहीं हो सका। सभी धर्मो को समान बताने वाले कुछ भी कहें लेकिन हिंदू शब्द तो बहुत बाद में आया, सनातन तो सृष्टि के निर्माण से ही है। सनातन परंपरा को विशुद्ध विज्ञान पर आधारित बताते हुए कहा कि उसे पुन: जागृत करने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर स्वामी अमर ज्योति के शिष्य व पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेमकुमार धूमल, पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार , पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया , डॉ. राजन सुशांत सहित सेना के पूर्व अधिकारी, रिटायर्ड मुख्य सचिव आशा स्वरूप व रिटायर्ड आईएएस देव स्वरूप आदि मौजूद थे।

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