हिमाचल / डब्लयूएचओ-जीएमपी रूल्स मानने वाली कंपनियां ही देगी अस्पतालों काे सस्ती दवाइयां

अस्पतालाें काे सस्ती दवाइयां उपलब्ध करवाने वाली दवा कंपनियाें पर सरकार ने नई शर्त लागू कर दी है। डेमो फोटो अस्पतालाें काे सस्ती दवाइयां उपलब्ध करवाने वाली दवा कंपनियाें पर सरकार ने नई शर्त लागू कर दी है। डेमो फोटो
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अस्पतालाें काे सस्ती दवाइयां उपलब्ध करवाने वाली दवा कंपनियाें पर सरकार ने नई शर्त लागू कर दी है। डेमो फोटोअस्पतालाें काे सस्ती दवाइयां उपलब्ध करवाने वाली दवा कंपनियाें पर सरकार ने नई शर्त लागू कर दी है। डेमो फोटो

  • सरकार ने दवाईयाें की संख्या काे बढ़ा कर 450 कर दिया है जाे पहले 330 थी
  • सरकार ने फार्मा कंपनियों पर लागू की नई शर्त

दैनिक भास्कर

Feb 11, 2020, 01:29 PM IST

शिमला. अस्पतालाें काे सस्ती दवाइयां उपलब्ध करवाने वाली दवा कंपनियाें पर सरकार ने नई शर्त लागू कर दी है। इसके तहत रेट काॅन्ट्रैक्ट में वहीं कंपनियां भाग ले सकती हैं जाे कंपनियां-डब्ल्यूएचओ जीएमपी (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) नियमाें काे फाॅलाे करेगी।

सरकार ने दवा निर्माता कंपनियों के पास डब्ल्यूएचओ-जीएमपी प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य कर दिया है। दवाइयाें की गुणवत्ता काे बनाए रखने के लिए सरकार ने कंपनियाें पर इस शर्त काे लागू किया है। फेल हाे रहे सैंपल काे ध्यान में रखते हुए सरकार ने दवा फर्माें काे डब्ल्यूएचओ-जीएमपी प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य कर दिया है। जिन कंपनियाें के पास प्रमाण-पत्र नहीं हाेगा वह रेट काॅन्ट्रैक्ट में भाग नहीं ले सकेगी, सरकार उन्हें बाहर का रास्ता दिखाएगी।

सस्ती दवाईयाें के लिए सरकार ने कंपनियाें से आवेदन मांग लिए है। सरकार उन्हीं कंपनियाें काे रेट काॅन्ट्रैक्ट में लाएगी जाे जिन दवा कंपनियाें के पास डब्ल्यूएचओ-जीएमपी प्रमाण पत्र हाेगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) आरडी धीमान ने कहा, अस्पतालाें काे सस्ती दवाइयां उपलब्ध करवाने वाली दवा कंपनियाें पर नई शर्त काे लागू किया गया है।
 

दवाइयाें की नई सूची तैयार सूची में 450 दवाइयां शामिल
सरकार ने सस्ती दवाइयाें की नई सूची तैयार कर दी है। इसमें सरकार ने दवाईयाें की संख्या काे बढ़ा कर 450 कर दिया है जाे पहले 330 थी। इन दवाइयाें की खरीद के लिए सरकार ने टेंडर काॅल किए है। परचेस कमेटी रेट काॅन्ट्रैक्ट में भाग लेने वाली एल-वन कंपनी काे ही दवाइयाें का सप्लाई ऑर्डर जारी करेगी। प्रदेश में पिछले एक साल के दौरान करीब 90 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं।यह दवा उत्पादों के निर्माण और उसकी गुणवत्ता काे बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मानक है।

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