देवभूमि / सोना-चांदी और नकदी से कमरूनाग की पवित्र झील लबालब,श्रद्धा से लोग मनोकामना पूर्ण होेने पर झील में डालते है सोना



देव कमरूनाग की पवित्र झील में अरबों का खजाना देव कमरूनाग की पवित्र झील में अरबों का खजाना
देव कमरूनाग की पवित्र झील में अरबों का खजाना देव कमरूनाग की पवित्र झील में अरबों का खजाना
मनोकामना पूर्ण होने पर चढ़ाते है सोना मनोकामना पूर्ण होने पर चढ़ाते है सोना
नगदी, चांदी सहित रूपए डालते है झील में नगदी, चांदी सहित रूपए डालते है झील में
पवित्र झील की रक्षा जहरीला नाग करता है पवित्र झील की रक्षा जहरीला नाग करता है
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देव कमरूनाग की पवित्र झील में अरबों का खजानादेव कमरूनाग की पवित्र झील में अरबों का खजाना
देव कमरूनाग की पवित्र झील में अरबों का खजानादेव कमरूनाग की पवित्र झील में अरबों का खजाना
मनोकामना पूर्ण होने पर चढ़ाते है सोनामनोकामना पूर्ण होने पर चढ़ाते है सोना
नगदी, चांदी सहित रूपए डालते है झील मेंनगदी, चांदी सहित रूपए डालते है झील में
पवित्र झील की रक्षा जहरीला नाग करता हैपवित्र झील की रक्षा जहरीला नाग करता है

  • अधिष्ठाता देव कमरूनाग का सरनाहुली मेला परंपरागत देव पूजा के साथ संपन्न
  • सरकार की ओर से इस पवित्र स्थान को टूरिज्म गतिविधियों से जोड़ा जाएगा

Dainik Bhaskar

Jun 16, 2019, 11:57 AM IST

मनाली. मंडी से 60 किलोमीटर दूर रोहांडा में देव कमरूनाग की पवित्र झील है जहां लोग अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर शीश नवाते है और झील में नगदी सहित सोना अर्पण करते है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के कारण इस झील में अरबों का खजाना दबा पड़ा है। इस झील से कोई भी खजाना निकालने की हिम्मत नहीं करता। इस झील के खजाने की रक्षा एक जहरीला नाग कर रहा है ऐसी मान्यता है।

 

 

रोहांडा से लोग 6 किलोमीटर पहाड़ी रास्ते से होकर इस पवित्र झील तक पहुंचते है। यहां हर साल लोग उत्साह से सरनाहुली मेला परंपरागत देव पूजा के साथ मनाया गया।  मेले के समापन अवसर पर हजाराे श्रद्धालुओं ने अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई। लोगों ने देव कमरूनाग की पवित्र झील की परिक्रमा की और झील में सोना, चांदी और सिक्के व नकदी इच्छानुसार विसर्जित किए।

 

मंदिर कमेटी के मुताबिक दो दिनों में 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने कमरूनाग के मंदिर में आकर शीश नवाया। इसमें मंडी ही नही प्रदेश के बाकी जिलों से भक्तगण कमरूनाग के दरबार पहुंचे, जिस कारण मंदिर परिसर में पांव रखने तक की जगह नहीं बची। श्रद्धालुओं को कमरूनाग की मूर्ति के दर्शन करने के लिए कतारों में खड़े होकर लंबा इंतजार करना पड़ा। भीड़ को शांत व अनुशासन बनाए रखने के लिए पुलिस दल को कड़ी मशक्त करनी पड़ी।

 

मेला कमेटी के प्रधान मान सिंह ने बताया कि मेले में सैकड़ों की संख्या में बच्चों के मुंडन किए और देवता के दर्शन करने के बाद पवित्र झील में श्रद्धानुसार आभूषण और नगदी का विसर्जन किया।

 

परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा कि पराशर ऋषि की तपोस्थली को ईको टूरिज्म गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इसके लिए वन विभाग 2.19 करोड़ उपलब्ध करवाएगा। जहां-जहां भी भूमि कटाव की आशंका है, उस क्षेत्र को भी संरक्षित किया जाएगा। इस तपोस्थली को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए भविष्य में इलेक्ट्रिक बस सेवा चलाने का प्रयास भी किया जाएगा।

 

 

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