हिमाचल / लोगों ने कहा, कुल्लू-चंबा-किन्नौर जिले के कई क्षेत्र स्नोबोंड एरिया घोषित हो सकते हैं तो सिरमौर के साथ भेदभाव क्यों

सिरमौर के कई इलाके में बर्फबारी कारण सड़कें बंद हो जाती है सिरमौर के कई इलाके में बर्फबारी कारण सड़कें बंद हो जाती है
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सिरमौर के कई इलाके में बर्फबारी कारण सड़कें बंद हो जाती हैसिरमौर के कई इलाके में बर्फबारी कारण सड़कें बंद हो जाती है

  • तीन महीने का राशन और पशुओं के लिए चारे का लोगों को नवंबर में ही करना पड़ता है भंडारण
  • सिरमौर के लोगों को कोई राहत नहीं मिलती

दैनिक भास्कर

Dec 21, 2019, 11:33 AM IST

हरिपुरधार. प्रदेश के कुल्लू, चंबा और किन्नौर समेत कई जिलों में दिसंबर से मार्च माह तक भारी बर्फबारी होती है।जिसके कारण इन जिलों को स्नोबॉड एरिया घोषित किया जाता है। इसके अलावा सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र में भी हर वर्ष भारी बर्फबारी होती है। भारी बर्फबारी के कारण उंचाई वाले क्षेत्रों में करीब तीन महीने तक जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जाता है। क्षेत्र की कई सड़कें 15 से 20 दिनों तक बंद रहती है। सैकड़ों गांव में कई दिनों तक अंधेरा पसर जाता है। इसके बावजूद इस एरिया को स्नोबॉड एरिया घोषित नहीं किया जा रहा है।


लोगों का कहना है कि गिरिपार क्षेत्र के ऊंचाई वाले इलाके हरिपुरधार, नौहराधार, गताधार व शिलाई क्षेत्र के नैनीधार समेत कई इलाकों में भारी बर्फबारी होती है। बर्फबारी की जानकारी लोक निर्माण विभाग के पास तो रहती है, मगर हैरानी की बात यह है कि राजस्व विभाग के रिकार्ड में ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि गिरिपार क्षेत्र के किन इलाकों में कितनी बर्फबारी होती है।

राजस्व विभाग की ओर से सरकार को बर्फबारी और इससे होने वाले नुकसान की सरकार को कोई भी जानकारी प्रदान नहीं की जाती है। नतीजतन आज तक सरकार ने सिरमौर जिले के किसी भी क्षेत्र को स्नोबोंड एरिया घोषित नहीं किया है।

क्षेत्र के लोग सरकार से सवाल उठा रहे कि चंबा, कुल्लू और किनौर जिले यदि हिम बाधित क्षेत्र घोषित हो सकता है तो सिरमौर जिला के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया गया है। जिला सिरमौर के ऊंचाई वाले क्षेत्र को बर्फ से निपटने को वह तमाम सुविधाएं क्यों नहीं दी जाती।

गिरिपार क्षेत्र के रेणुका विस के नौहराधार, हरिपुरधार, दियुड़ी खडाह, गताधार, भलाड भलोना व शिलाई विस क्षेत्र के नैनीधार, डिमाइना, धिराईना, पच्छाद क्षेत्र के हाब्बन, पझौता क्षेत्र तीन महीने तक बर्फ से ढके रहते है। इन क्षेत्रों के लोग चार महीने के लिए घास, इंधन व राशन का प्रबंध पहले ही कर देते है। इन क्षेत्रों में दिसंबर माह में ही बर्फ गिरनी शुरू हो जाती है। विगत 12 दिसंबर को हुई बर्फबारी से जिला सिरमौर के बर्फ से प्रभावित क्षेत्रों में कहर बरपा दिया था। कई दिनों तक मार्ग अवरुद्ध हुए थे।

बिजली पानी की सुविधा न मिलने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। पाठशालाओं में छात्रों की परीक्षा के दौरान खुद अभिभावकों को बच्चों संग मिलो दूर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ा। अभी भी क्षेत्रों में दो से अढ़ाई फुट बर्फ जमी पड़ी है। अभी भी कई मार्ग अवरुद्ध हैं। तारे टूटने व पोल टूटने के चलते बिजली अभी भी जिला सिरमौर की सीमा पर स्थित शिमला जिला के कुपवी के क्षेत्रों में बाधित हुए है।

जिस कारण कुपवी समेत जिला सिरमौर का क्षेत्र तीन महीने के अंतराल में कई दिनों तक राजधानी व जिला से संपर्क कट जाता है। जहां विभाग को सामान्य बिजली की तारों को जोड़कर गुजारा करना पड़ता है जब कि बर्फ से सटे एरिए में पक्के पोल व मोटी तारों को जोड़ना चाहिए। वहीं स्कूलों में ग्रांट को बढ़ाकर ठंड से बचने के लिए अलग बजट का प्रावधान होना चाहिए था। मगर ऐसी सुविधा बर्फ से प्रभावित क्षेत्रों में मुहैया करवाने में सारी सरकारें विफल रही है।

हर वर्ष सड़क बहाल करने पर होते है लाखों खर्च
कुल्लू, चंबा व किन्नौर जिले के कई क्षेत्रों को प्रदेश सरकार ने कई दशकों पहले ही स्नोबोंड एरिया घोषित कर दिया था, मगर प्रदेश सरकार इस मामले में सिरमौर जिले के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। सिरमौर जिले के उपमंडल संगड़ाह में बर्फबारी के कारण हर वर्ष करीब 122 किमी सड़कें बाधित होती हैं। इन सड़कों को खोलने के लिए सरकार हर वर्ष लाखों रुपए भी खर्च करती है। क्षेत्र के लोग सरकार से सवाल उठा रहे है कि क्या हर साल सड़कों पर ही बर्फ पड़ती है।
 

घोषित किया जाए हिम बाधित क्षेत्र
पंचायत समिति सदस्य भलाड भलोना हीरा सिंह शर्मा ने बताया कि जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अत्याधिक बर्फबारी से तमाम क्षेत्र यातायात से प्रभावित होते हैं। दुकानों से राशन खरीदना पड़ता है। इन्होंने मांग कि है कि बर्फ से प्रभावित स्थानों को हिम बाधित क्षेत्र घोषित किया जाए।

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