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केसर की खुशबू से महका सैनधार, तेजी से बढ़ रहे हैं बल्ब, किसान उत्साहित

एक वर्ष पहले
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक तस्वीर।
  • चमन लाल शर्मा ने केसर की खेती करने से पहले इंटरनेट पर ही सर्च किया और जानकारी हासिल की
  • उन्होंने पहले प्रयोग के तौर पर 10 किलोग्राम बल्ब सीड लगाया था, अब बल्ब तेजी से बढ़ रहे हैं

नाहन(दीपक). सिरमौर जिले के मध्य पहाड़ी क्षेत्र में स्थित सैनधान में कश्मीरी केसर का ग्रोथ तेजी से हो रहा है। खेतों में लगी केसर के बल्ब तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे किसानों का उत्साह बढ़ा है। केसर की फसल अच्छी होेने से किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी।
सैनधार क्षेत्र में केसर की खेती की शुरुआत करने वाले चमन शर्मा ने बताया कि उन्होंने पहले प्रयोग के तौर पर 10 किलोग्राम बल्ब सीड लगाया था। अब केसर के बल्ब की भी ग्रोथ तेजी से हो रही है। इससे वह काफी उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा भी इस बजट में केसर की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रावधान किया गया है। इससे किसानों को काफी मदद मिलेगी।

कश्मीर से मंगवाया था 60 किलोग्राम बल्ब
 आम तौर पर केसर की खेती को लेकर किसानों में धारणा रहती है कि यह केवल बर्फ वाले क्षेत्रों में ही होता है। विशेषज्ञों के अनुसार केसर का उत्पादन समुद्र तल से 1500 से 2000 मीटर की ऊंचाई पर भी हो सकता है। चमन लाल शर्मा ने केसर की खेती करने से पहले इंटरनेट पर ही सर्च किया और जानकारी हासिल की। इसके बाद कश्मीर से करीब 42 किलोग्राम बल्ब (बीज) मंगावाया। 10 किलोग्राम बल्ब चमन लाल ने बीजा। बाकी के केसर को रुप दत्त शर्मा गांव गन्याणा, संगड़ाह निवासी राजेश, नहर स्वार निवासी क्षमानंद, पनियाली निवासी किशन ठाकुर व लेखराज व बागथन के नेरी गांव निवासी सुनील शर्मा को बल्ब बिजाई के लिए दे दिया। इन सभी किसानों ने केसर के बल्ब की बिजाई की। 

क्वालिटी होगी चेक
सैनधार क्षेत्र में पैदा की गई केसर की क्वालिटी चैक करना बाकी रह गया है। पहले इस केसर का मेडिसिनल वैल्यू को चैक किया जाएगा। इसके बाद जम्मू कश्मीर में पैदा होने वाली केसर से इसकी  वैल्यू की तुलना की जाएगी। अगर सैनधार में पैदा हुई केसर की मेडिसिनल वैल्यू जम्मू कश्मीर की केसर से कम नहीं हुई, तो इसकी खेती को पूर्ण रूप से सफल माना जाएगा।

कृषि विभाग करेगा मॉनिटरिंग
सैनधार क्षेत्र में करीब आधा दर्जन किसानों द्वारा केसर का उत्पादन अपने स्तर पर किया जा रहा है। फ्लॉवरिंग होने के बाद कृषि विभाग भी यहां पर पैदा की जा रही केसर की खेती पर नजर रख रहा है। ताकि जिले में केसर की खेती के लिए संभावनाओं की तालाश की जा सके। विभाग द्वारा मार्च- अप्रैल तक मॉनीटरिंग की जाएगी।