हिमाचल / घरों में रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम के साथ साेलर पैनल भी लगाना हाेगा जरूरी



Solar panels must alongwith rain harvesting system in homes, in order to save electricity and water.
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Solar panels must alongwith rain harvesting system in homes, in order to save electricity and water.

  • नक्शा पास करने के लिए अब नई शर्त
  • पानी अाैर बिजली की हाे सकेगी बचत

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2019, 02:19 PM IST

शिमला. घराें का नक्शा पास करवाने के लिए सरकार ने अब नई शर्त लगा दी है। शिमला शहर में घर बनाने के लिए अब भवन मालिकाें काे रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम के साथ ही साेलर पैनल भी बनाना हाेगा। प्रदेश सरकार ने इसके लिए नई शर्त लागू कर दी है।

 

इसके लिए नए मकान का निर्माण कार्य कराते समय रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के साथ ही साेलर सिस्टम का निर्माण कार्य भी करवाना होगा। इसके बाद ही नगर निगम से मकान का नक्शा पास होने के साथ ही नये भवन के निर्माण कार्य की स्वीकृति मिल सकेगी।

 

हालांकि पहले से ही रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम की शर्त अनिवार्य है लेकिन काफी लाेग इस शर्त काे फाेलाे नहीं करते लेकिन अब इसमें साेलर सिस्टम लगाने की शर्त भी जाेड़ दी गई है। शहर में कुछ फीसदी लोग ही मकान का नक्शा पास करवाने के बाद नए भवन का निर्माण कार्य कराते हैं।

 

बाकि नगर निगम को अंधेरे में रखकर मकान का निर्माण कार्य करवा लेते हैं। नगर निगम के एपी राजीव शर्मा ने बताया कि रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम के साथ-साथ अब साेलर सिस्टम लगाना भी जरूरी है। इसके बिना न ताे नक्शा पास हाेगा अाैर न ही मकान की कंप्लीशन मिलेगी।

 

अभी सभी तरह के घराें के नक्शाें के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है। इससे पानी अाैर बिजली दाेनाें की बचत हाे सकेगी। साेलर पैनल अाैर रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम का क्या है फायदा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के तहत मकान का निर्माण कार्य करवाने वालों को वर्षा का पानी घर में जमा होने के लिए एक गाेलाकार घेरा बनाना होगा जो पक्का होगा। इसमें पानी जमा होगा। इससे नालियों पर पानी बहाव में ज्यादा लोड नहीं पड़ेगा व शहर में जल जमाव की समस्या भी उत्पन्न नहीं होगी।

 

वहीं, घर का निर्माण कार्य कराते समय घरों में लगाए जाने वाले हैंडपंप के समीप सोख्ता का निर्माण कार्य कराना अनिवार्य है ताकि घरों से निकलने वाला पानी सोख्ता के माध्यम से जमीन में चला जाए या फिर पानी का वाष्पीकरण हो सके। इसी तरह घर की छत पर साेलर पैनल लगाने से बिजली की भी बचत हाे सकेगी। यदि हर घर की छत पर ये दाेनाें चीजें हाे ताे पानी के साथ-साथ अासानी से बिजली भी बचा पाएंगे।

 

शिमला शहर में लगते हैं बार-बार पावर कट इसलिए भी जरूरी शिमला शहर में अधिकतर घर सालाें पुराने बने हैं जाे अनप्लानड तरीके से भी बने हैं। यहां अधिकतर एरिया एेसे हैं जहां बार-बार बिजली कट लगते रहते हैं। खासकर सर्दियाें के माैसम में ताे पावर कट लगना अाम बात है। एेसे में साेलर सिस्टम लाेगाें के लिए फायरेमंद है। दूसरा पानी कि किल्ल्त से भी लाेगाें काे दाे-चार हाेना पड़ता है।

 

हार्वेस्टिंग सिस्टम से लाेग पानी की बचत कर अपने राेजमर्रा के घरेलू काम काज के लिए उस पानी का यूज कर सकते हैं। 30 दिनाें में नक्शा पास करवाने की सीमा भी तय प्रदेश में अब आवासीय और व्यावसायिक नक्शा पास कराने वालों को बार बार दफ्तराें के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य सरकार ने नक्शा पास करने के समय सीमा तय कर दी गई है।

 

अब 30 दिनाें के भीतर नक्शा पास हाेगा। पहले यह समय सीमा 60 दिन की थी। घर बन जाने के बाद नगर निगम, टीसीपी अाैर नगर परिषद् काे 15 दिनाें के भीतर कंप्लिशन सर्टिफिकेट देना पड़ेगा। पहले कंप्लीशन सर्टिफिकेट देने के लिए काेई समय सीमा निर्धारित नहीं थी। इससे लाेगाें के समय की बचत हाेगी। नक्शाें के लिए सरकार ने आॅनलाइन पोर्टल की सुविधा भी शुरू की है। www.tcp.hp.gov.in पर लाॅगइन करके अपना नक्शा सब्मिट कर सकते हैं।

 

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