जिस महिला की दी थी गलत रिपोर्ट उसकी हुई माैत, महकमे के पास कार्रवाई की पावर नहीं

2 वर्ष पहले
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  • सदमे में अाई अंकिता की जान तक चली गई
  • परिजन अब पुलिस को करेंगे शिकायत

शिमला. राेहड़ू के संजीवनी अस्पताल से जिस महिला काे एचआईवी की गलत रिपोर्ट दी गई थी, उसने मंगलवार सुबह 7:14 पर आईजीएमसी में दम ताेड़ दिया। महिला का ब्रेन डेड हाे चुका था अाैर उसे तीन दिन से आईजीएमसी में परिजन एंबुबैग से अाॅक्सीजन दे रहे थे। हालांकि चिकित्सकाें ने पहले ही बता दिया था कि महिला की हालत काफी गंभीर है। ब्रेन डेड हाेने के कारण उसके बचने की उम्मीद कम ही थी।
 
उधर दूसरी अाैर मामले में स्वास्थ्य विभाग ने राेहड़ू के निजी अस्पताल से मामले में रिपाेर्ट तलब कर ली है। अस्पताल प्रबंधन से रिपाेर्ट मांगी गई है कि उनकी रिपाेर्ट गलत कैसे अाई है, उसका जवाब दिया जाएगा। अब रिपाेर्ट अाने के बाद ही इस मामले में यह पता चलेगा कि रिपाेर्ट गलत कैसे बनी। हालांकि विभाग केवल इसमें रिपाेर्ट ही मांग सकता है। कार्रवाई करने का अधिकार विभाग के पास नहीं है।
 
गलत रिपोर्ट्स के पहले भी अा चुके हैं कई केस लैब में रिपाेर्ट अलग अाने का यह पहला मामला नहीं है। अाईजीएमसी में भी कुछ माह पहले सरकारी अधिकृत लैब में एक पेशेंट के ब्लड में प्लेटलेट्स कम बता दिए थे। इस दाैरान पेशेंट काे डाॅक्टराें ने कई यूनिट ब्लड भी चढ़ा दिया था। बाद में जब पेशेंट की हालत खराब हुई ताे अाईजीएमसी की सरकारी लैब में दाेबारा से टेस्ट करवाया गया।
 
मगर उसमें प्लेटलेट्स की संख्या ठीक अाई। इसी तरह प्रदेश के अन्य जगहाें से भी कई बार लैब में गलत रिपाेर्ट अाने के मामले अाए हैं। इससे यह भी साफ हाेता है कि अलग-अलग लैब में रिपाेर्ट भी कई बार बदल कर अाती है। अाईजीएमसी में भी कई डाॅक्टर निजी लैब की रिपाेर्ट काे मानने से इंकार कर देते हैं। वह सरकारी लैब में ही टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। डाॅक्टराें का तर्क रहता है कि कई बार निजी लैब की रिपाेर्ट अाैर सरकारी लैब की रिपाेर्ट में काफी अंतर रहता है।

विभाग के पास सिर्फ डिग्री जांच करने की ही पावर मामले में स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पताल प्रबंधन से रिपाेर्ट तलब ताे कर ली है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इसमें कार्रवाई नहीं कर सकता। विभाग के पास केवल डाॅक्टर की डिग्री की जांच करने की पाॅवर है। यदि डिग्री फर्जी हाेती है ताे विभाग कार्रवाई कर सकता है। मगर रिपाेर्ट के मामले में विभाग वार्निंग ही दे सकता है। एेसे में परिजनाें के पास अब काेर्ट का दरवाजा खटखटाने की ही पाॅवर है। वह काेर्ट में ही अपने लिए न्याय मांग सकते हैं।
 
सीएमओ डॉ. नीरज मित्तल ने कहा कि राेहड़ू के संजीवनी अस्पताल प्रबंधन से रिपाेर्ट तलब की गई है कि उनकी लैब में महिला की एचआईवी की गलत रिपाेर्ट कैसे अाई है। रिपाेर्ट अाने के बाद ही अागे कुछ कहा जा सकता है। हालांकि डाॅक्टर की डिग्री अगर फर्जी हाेती है ताे विभाग कार्रवाई कर सकता है। िरपाेर्ट के मामले में विभाग के पास कार्रवाई का प्रावधान नहीं है।

अस्पताल अगर गलत रिपोर्ट न देता तो जिंदा होती बहन: देवराज अंकिता की माैत के बाद परिजनाें में काफी राेष है। मृतक महिला के भाई देवराज का कहना है कि वह मामले में चुप नहीं बैठेंगे। वह इसमें पुलिस में रिपाेर्ट करेंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य निदेशक काे भी एक शिकायत देंगे अाैर उनसे मामले में कार्रवाई की मांग उठाएंगे। देवराज का अाराेप है कि उनकी बहन की माैत अस्पताल की लापवारही के कारण हुई है। यदि वह गलत रिपाेर्ट न देते ताे उनकी बहन काेमा में न जाती अाैर उसकी माैत न हाेती।

ये है पूरा केस: राेहड़ू की 22 वर्षीय अंकिता के बच्चेदानी की ट्यूब फटने से उसे निजी अस्पताल लाया गया। यहां पर अस्पताल में महिला के टेस्ट किए गए ताे उसकी रिपाेर्ट एचआईवी पाॅजीटिव पाई गई थी। परिजनाें का दावा है कि केएनएच में अाॅपरेशन के बाद जब महिला की काउंसलिंग हुई ताे वह डिप्रेशन में चली गई। उसके बाद उसक ब्रेन डेड हाे गया। उसे आईजीएमसी में दाखिल करवाया गया। जहां मंगलवार सुबह उसकी माैत हाे गई।
 
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