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व्यवस्था / वाइल्ड फ्लावर होटल की लीज 40 से 99 साल करने की तैयारी



  • बीआेडी में भी खत्म हो सकता है हिमाचल सरकार का दखल
Danik Bhaskar | Sep 16, 2018, 06:54 AM IST

शिमला. वाइल्ड फ्लावर होटल की लीज को हिमाचल सरकार 40 की बजाय 99 साल करने पर फैसला ले सकती है। बीआेडी में हिमाचल सरकार के दखल को भी खत्म किया जा सकता है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है, पर सरकार मसले पर न्यायालय से बाहर ही फैसला लेने पर कैबिनेट में सहमति बना सकती है।


 होटल को 1994 के बाद से 40 साल की लीज पर दिया है। सूत्रों की माने तो कंपनी को इसे 99 साल की लीज पर दिया जा सकता है। इसमें हिमाचल सरकार की जो हिस्सेदारी से लेकर लीज की अवधि पर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

 

उस पर भी कोई बड़ा फैसला आगामी कैबिनेट में लिया जाना संभावित है। सूत्र बताते हैं कि राज्य सरकार की इसमें हिस्सेदारी काफी ज्यादा रहती थी , लेकिन अब हिस्सेदारी काफी कम होकर 10 फीसदी के लगभग ही पहुंच गई है।

 

कंपनी ने अपना निवेश बढ़ा दिया है, इससे राज्य सरकार की हिस्सेदारी कम हो रही है। सूत्रों की माने तो इस मसले को कैसे हल किया जा सकता है। इसे कैबिनेट में भेजने से पहले पर्यटन विभाग विधि विभाग की सलाह लेगा। इसके बाद कैबिनेट के समक्ष प्रस्ताव रखा जाना है।

 

आजादी के बाद 1993 तक केंद्र आैर हिमाचल सरकार चलाती रही होटल
आजादी के बाद 1993 तक हिमाचल आैर केंद्र सरकार इस होटल को चलाती रही। इसके भवन में आग लगने के बाद राज्य सरकार ने आेबराय ग्रुप के साथ होटल चलाने के लिए संयुक्त उपक्रम का गठन किया। इसके बाद ग्रुप ने इस होटल में कुछ बदलाव किए आैर ज्वाइंट वेंचर में यह ग्रुप तब से चल रहा है।

 

इसमें हिस्सेदारी को लेकर हिमाचल सरकार के बीच में विवाद चलता रहा। उस समय करार हुआ था कि हिमाचल सरकार भूमि लीज पर देगी आैर कंपनी होटल को दोबारा से बनाने में निवेश करेगी।

 

बीओडी की बैठक में अपने अधिकतर फैसले मनवा लेती है प्रदेश सरकार
अभी तक इसके बीआेडी की बैठक हिमाचल के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होती है। राज्य के सचिव वित्त अौर पर्यटन इसके सदस्य होते हैं। इनके अलावा बीआेडी में सदस्यों की संख्या ग्रुप से ज्यादा रहती है। इस कारण राज्य सरकार बीआेडी में अपने अधिकतर मसले मनवा नहीं पाती है। लंबे अर्से तक इसकी बीआेडी सीएस के कार्यालय में ही होती रही।

 

लंबी लड़ाई के बाद अब सरकार के फैसले पर नजरें
इस मसले पर राज्य सरकार ने लंबी लड़ाई न्यायालयों में लड़ी। उच्च न्यायालय में लंबे समय तक इस मसले पर कानूनी लड़ाई चली। यह मामला आर्बिट्रेशन में चला। इसका फैसला राज्य सरकार के पक्ष में आया। इसके बाद अब राज्य सरकार क्या फैसला 24 को होने वाली कैबिनेट की बैठक में लेती है, इस पर सभी की नजरें रहेगी।
 

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