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मेडिकल कॉलेजों में जूनियर को कंसल्टेंट पदों पर तैनात करने पर टेमकोट बिफरी

टीचर एसोसिएशन आॅफ मेडिकल कॉलेज कांगड़ा एट टांडा (टेमकोट) की बैठक अध्यक्ष डाॅ. राजकुमार जसवाल की अध्यक्षता में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 14, 2018, 02:00 AM IST

टीचर एसोसिएशन आॅफ मेडिकल कॉलेज कांगड़ा एट टांडा (टेमकोट) की बैठक अध्यक्ष डाॅ. राजकुमार जसवाल की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में प्रदेश सरकार से मेडिकल कॉलेजों में पिक एंड चूज के आधार पर चहेते डॉक्टरों को दी जा रही तैनातियों की जांच करवाने की मांग की गई। बैठक की जानकारी देते हुए टेमकोट के उपाध्यक्ष डॉ. मिलाप शर्मा ने कहा कि प्रदेश में नए खुल रहे मेडिकल कॉलेजों हमीरपुर, चंबा, नाहन में नियमों व वरिष्ठता को नजरअंदाज कर चहेते डाॅक्टरों को कंसल्टेंट के पदों पर तैनाती दी गई है जो कि वरिष्ठ डाॅक्टरों साथ नाइंसाफी है।

बैठक में निर्णय लिया गया कि मेडिकल कॉलेजों में प्रिंसिपल, एचओडी, निदेशक चिकित्सा शिक्षा सहित प्रशासनिक पदों पर किसी भी डाॅक्टर को 62 वर्ष की आयु सीमा पूरी करने पर सेवा विस्तार न देने की मांग की गई। रिटायर्ड व टायर्ड चहेते डाॅक्टरों को नौकरी में सेवा विस्तार दिए जाने से जहां युवाओं के पदोन्नति के रास्ते बंद हो रहे हैं। वहीं प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। डॉ. मिलाप ने कहा केंद्र सरकार की हेल्थ पॉलिसी के तहत डाॅक्टरों को शिक्षण के लिए सेवा विस्तार दिया जा सकता है जब कि प्रशासनिक पदों पर सेवा विस्तार को काेई प्रावधान नहीं हैं। हैरानी जताते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से कई डाॅक्टर प्रशासनिक पदों पर तैनात हैं। उन्होंने कहा प्रशासनिक पदों पर डाॅक्टरों को दिए जा रहे सेवा विस्तार कारण आने वाले समय में यह अधिकारी 70 व 80 वर्ष की आयु सीमा पूरी करने पर फिर सेवा विस्तार की मांग कर रहे हैं। यही कारण है कि कई विशेषज्ञ डाॅक्टर हिमाचल प्रदेश से सरकारी नौकरी को वाय वाय कर निजी क्षेत्र को तवज्जो दे रहे हैं।

अस्पताल प्रशासन के कोर्स करने वाले को ही तैनाती दें

बैठक में निदेशक एनएचएम और मेडिकल कॉलेजों में प्रशासनिक अधिकारी के पदों पर मेडिकल आॅफिसर जिन्होंने अस्पताल प्रशासन के कोर्स किए हैं कि तैनाती करने की मांग भी की गई। उन्होंने कहा कि कई बार शिमला में एनएचएम के निदेशक बैठक के नाम पर टांडा मेडिकल कॉलेज से चिकित्सकों को बुला लेते हैं लेकिन वहां पहुंचकर बैठक को स्थगित कर दिया जाता है। जिसके चलते केंद्र व प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में दिक्कतों का सामना मेडिकल आॅफिसर को करना पड़ रहा है। वहीं जनता भी इन योजनाओं से वंचित रह रही है। उन्होंने कहा कोई भी मेडिकल आॅफिसर अपने कार्यालय की साज सज्जा नहीं चाहता बल्कि समाजसेवा के जज्बे से गरीब वर्ग का उपचार उनकी प्राथमिकता है। बैठक में टेमकोट के महासचिव डॉ. आरके अबरोल, डॉ. अमित भारद्वाज, डॉ. बीएस राणा, डॉ. एसके रैणा, राजीव, श्याम भंडारी, डाॅ. सोम, डाॅ. सपना भारद्वाज आिद मौजूद थे।

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Web Title: मेडिकल कॉलेजों में जूनियर को कंसल्टेंट पदों पर तैनात करने पर टेमकोट बिफरी
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