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कराहते मरीज तमाशा देख रही सरकार, अधिकारी भी बेपरवाह

सत्ता में बैठे नेता हमीरपुर में मेडिकल कॉलेज खोलने की खींचतान में उलझे हैं। लेकिन विडंबना देखिए, जिस रीजनल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:00 AM IST

सत्ता में बैठे नेता हमीरपुर में मेडिकल कॉलेज खोलने की खींचतान में उलझे हैं। लेकिन विडंबना देखिए, जिस रीजनल अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा देने का ऐलान हो चुका है वहां 6 माह से महत्वपूर्ण तीन विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टर ही नदारद हैं। सरकार आंखें मूंद कर तमाशा देख रही है। उसके वरिष्ठ अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं और तो और जिला के सत्ता से जुड़े नेता भी खामोशी के आलम में चले गए हैं। ऐसा लगता है कि सत्ता परिवर्तन के एक माह बाद भी किसी को इस अस्पताल में कराहते हुए मरीजों की पीड़ा नहीं सता रही, तभी तो सभी खामोश हैं। अस्पताल की हालत अव्यवस्थाओं में बदल चुकी है। तीन दर्जन डॉक्टरों के पदों वाले इस अस्पताल में डेढ़ दर्जन डॉक्टर रह गए हैं, ऐसे में यहां के मरीज और आम जनता क्या सरकार को शाबाशी देगी है? न तो स्वास्थ्य सचिव और न ही नए स्वास्थ्य मंत्री को इस अस्पताल की इस बुरी हालत की फिक्र है। उन तक मरीजों की पीड़ा कौन पहुंचाएगा? ऐसा नहीं है, कि स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को इसका पता नहीं है, लेकिन हालत यह है कि मरीज कराहते हैं, तो कराहें, हमें इससे क्या फर्क पड़ता। जिन अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के एक ही विभाग में दो या तीन पद भरे हैं, क्या वहां से किसी एक विशेषज्ञ को यहां भेज कर हमीरपुर के लोगों को सहूलियत नहीं दी जा सकती थी? जिन्हें निजी संस्थानों में महंगे रेट पर इलाज करवाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में आम जनता की मुसीबतें कितनी बढ़ चुकी हैं, इसका अनुमान महज ही लगाया जा सकता है।

दरअसल में जिन तीन प्रमुख विभागों में यहां विशेषज्ञ नहीं हैं, उनमें मेडिसन, सर्जन और ईएनटी विभाग हैं। इन सब में 5 से 7 महीनों से विशेषज्ञ नहीं हैं। अभी तक नई सरकार ने भी किसी के आदेश किए हों, इसका कोई पता नहीं है।

6 माह से विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं, एक माह नई सरकार का भी बीत गया लेकिन यहां किसी का ध्यान ही नहीं

अस्पताल में एक साल से चल रहा है तोड़फोड़ का काम

पिछले एक साल से हमीरपुर के इस अस्पताल में तोड़फोड़ का काम चल रहा है। व्यवस्थाएं रीजनल अस्पताल में नए मेडिकल कॉलेज के लिए बनाई जा रही हैं, लेकिन हैरानी देखिए, यहां पर जिस मेडिकल कॉलेज को खोलने की दुहाई दी जा रही है, लेटलतीफी भी हो रही है। उससे पहले विशेषज्ञों की तैनाती पर कोई भी संजीदा नहीं है। इसी वजह से लोग यहां सरकार और उसके अमले को कोस रहे हैं। अब तो जिले के विधायक की कारगुजारी पर भी कोई कार्यवाही नहीं करने पर चर्चाएं शुरु हो गई हैं। वैसे भी पूर्व मुख्यमंत्री वाले इस जिले में किसी भाजपा नेता ने इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती को लेकर जोर-शोर से आवाज उठाई हो ऐसा कतई नहीं दिखा। यही असल में बड़ी विडंबना है।

अवगत कराया

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अनिल चौहान का कहना है कि इस बाबत अब सारा काम सरकार को ही करना है। यहां की सारी समस्याएं और जो यहां होना है, उस बारे में सरकार को बता दिया गया है।

जल्द होगी तैनाती

उधर स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार का कहना है कि मेरे ध्यान में तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की बात अब लाई गई है। ताे उम्मीद यही है कि 10-12 दिनों में इन सभी की तैनाती हो जाएगी।

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