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समाज में प्रचलित तथ्यों पर हो शोध

लोक कथाओं गीतों और मान्यताओं के रूप में समाज में प्रचलित ऐतिहासिक तथ्यों पर शोध हो। विद्वानों को इतिहास की दृष्टि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 03, 2018, 02:00 AM IST

लोक कथाओं गीतों और मान्यताओं के रूप में समाज में प्रचलित ऐतिहासिक तथ्यों पर शोध हो। विद्वानों को इतिहास की दृष्टि और शैली पाश्चात्य चिंतन के अनुरूप जो चली आ रही है उसे बदलने और भारतीय परंपरा अनुसार इतिहास का सही रूप लाना चाहिए। यह बात ठाकुर जगदेव चंद स्मृति शोध संस्थान नेरी हमीरपुर में शुक्रवार को राष्ट्रीय इतिहास लेखन कार्यशाला का बतौर मुख्यातिथि शुभारंभ करते हुए शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कही। उन्होंने कहा कि यहां मौजूद विद्वानों को शिक्षा नीति और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भी सुझाव देने के लिए कहा, ताकि विद्वानों और समाजसेवी संस्थाओं के सुझावों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने की पहल हो सके। हम सभी को मिलकर भारतीय शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करके हिमाचल का विकास करेंगे। इस दो दिवसीय कार्यक्रम की अध्यक्षता सेंट्रल यूनिवर्सिटी धर्मशाला के कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने की। जिसमें उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, जम्मू कश्मीर के करीब 60 विद्वाोनों हिस्सा ले पहुंचे हैं। उन्होंने विद्वानों से कहा कि भारतीय इतिहास के साथ षड्यंत्र के तहत हुई विकृतियों को दूर करने और असल वास्तविकता सामने लाने को वे काम करें। डॉ. ओपी शर्मा ने संकल्प पाठ पेश किया। वहीं कार्यशाला संयोजक डॉ. अंकुश भारद्वाज ने बताया कि वर्तमान में प्रचलित एवं पढ़ाए जा रहे इतिहास की विकृतियों को दूर करके भारतीय इतिहास का परिमार्जन एवं संशोधन करके दोबारा स्थापित करने के मकसद से विद्वानों का मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के लिए इसका आयोजन किया जा रहा।

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