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शाहतलाई-दियोटसिद्ध में गुफा तक जयकारों से गूंज रही बाबा की पहाड़ी, दर्शन के लिए लगी लंबी लाइनें

मीठे रोट के चढ़ावे और बाबा के जयकारों से दियोटसिद्ध मंदिर की पहाड़ी गूंज रही है। यहां बाबा के भक्तों के आने का...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 02:00 AM IST
मीठे रोट के चढ़ावे और बाबा के जयकारों से दियोटसिद्ध मंदिर की पहाड़ी गूंज रही है। यहां बाबा के भक्तों के आने का सिलसिला अब भारी भीड़ में तबदील हो गया है। शाहतलाई से दियोटसिद्ध मंदिर गुफा तक बड़े-बड़े झंडे उठाए श्रद्धालुओं को देख कर ऐसा लग रहा है कि यहां पंजाब का पूरा दोआबा ही इस पहाड़ी पर पहुंच गया हो। चैत्र माह के मेलों की कड़ी में रविवार को तीसरा सप्ताह शुरू हो जाएगा। पूरी पहाड़ी पर जहां जगह मिली, वहीं श्रद्धालु डेरा डाल कर सुबह की इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन ने भी इस बार व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं, लेकिन कई खामियां भी यहां उजागर हो रही हैं। शुक्रवार से ही लाखों श्रद्धालु दर्शन कर लौट रहे हैं। पंजाब सूबे के हजारों श्रद्धालुओं के बड़े-बड़े जत्थे गुफा तक पहुंच गए हैं।

काबिलेगौर है कि चैत्र माह के नाम से दियोटसिद्ध मंदिर का यह मेला उत्तरी भारत की सिद्ध पीठ के रूप में सबसे बड़ा माना जाता है। श्रद्धालु इसमें मीठे रोट के अलावा अपनी मुरादें मानने के लिए बाबा के दर पहुंचते हैं। जिनमें बड़ी तादाद में पंजाब के श्रद्धालुओं की ही रहती है। पेयजल की समस्या के लिए यहां जगह-जगह इंतजाम किए गए हैं, लेकिन जिन दानी सज्जनों ने यहां वाटर कूलर इंस्टॉल करके श्रद्धालुओं को सुविधा दी है, उनका रख-रखाव गौण लग रहा है। न तो यह कूलर पानी को कूल कर रहे हैं और न ही इन्हें एक्वागार्ड के जरिए व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाया गया है। एक्वागार्ड तो लगे हैं, लेकिन वे खराब है और पिछले लंबे समय से चालू हालत में ही नहीं हैं। कई वाटर कूलर ट्रस्ट प्रशासन ने भी लगाए हैं, हालत ज्यादातर की वही है। लगता यही है कि प्रशासन का इनके रख-रखाव की ओर ध्यान नहीं है और अब यह मात्र शोपीस बन कर रह गए हैं।

दियोटसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर में उमडी भक्तों की भीड़।

नियमों की हो रही है अनदेखाी

लंगर भवन के पास जहां श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिकित्सालय भी है, वहां इन दिनों नियमों की धज्जियां उड़ाने का काम भी जारी है। श्रद्धालु वहां बड़ी तादाद में जुट कर ढोल नगाड़ो के साथ जुट कर कानफोड़ू डीजे सिस्टम को भी नॉन स्टाप चला रहे हैं। शनिवार को दिन भर मुंबई से आए श्रद्धालुओं ने वहां धूम मचाए रखी, जिस कारण प्रशासन के उन दावों की पोल खुली, जिनमें यह बार-बार कहा जाता है कि मंदिर परिसर में इस तरह के ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाई गई है। लेकिन इस बार इस खास जत्थे के लिए स्वीकृति किसने दी और दिन भर अस्पताल के भीतर और बाहर बड़ी धमक वाली आवाज गूंजती रही। इस बार मंदिर परिसर में लुधियाना से आए एक श्रद्धालु जत्थे द्वारा कई दिनों तक चलने वाले नि:शुल्क लंगर की भी व्यवस्था की गई है। इसके अलावा मेन रोड से मंदिर द्वार तक अपंगों और बुजुर्गों तथा अन्यों ऐसे लोगों को पहुंचाने के लिए नि:शुल्क वाहनों की व्यवस्था की गई है। जिससे उन्हें काफी फायदा हुआ है।