हमीरपुर

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सामूहिक प्रॉफिट के गड़बड़झाले में फंसी 20 बीस से ज्यादा सभाएं

Danik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:00 AM IST


विक्रम ढटवालिया | हमीरपुर

सभा के सामूहिक प्रॉफिट के गड़बड़झाले में जिला की दो दर्जन के करीब कृषि सहकारी सभाएं गड़बड़झाले में फंसी हुई हैं। इनमें कुछ की जांच अंतिम चरण में है, लेकिन ज्यादातर की जांच का पिटारा अभी खुलेगा।

दरअसल में विभाग ने बड़ाग्रां सभा की जांच में जो घोटाला पाया है। उसी को आधार बनाकर आशंका यह जताई जा रही है कि अन्य दो दर्जन संभोग में भी इसी तरह का लफड़ा है क्योंकि ऑडिट का काम इन तमाम में भी उसी निरीक्षक द्वारा किया गया है। जिसका बड़ाग्रां सभा का किया है।

छानबीन से पता चला है कि सेवानिवृत्त ऑडिटर जब इन सहकारी सभाओं में ऑडिट करने जाया करता था तब उनके साथ एक खास व्यक्ति भी रहता था। वह विभाग का कर्मचारी तो नहीं था, लेकिन उसे संबंधित ऑडिटर अपने साथ क्यों ले जाता था, इसका खुलासा अब हो रहा है। वह इस सारे घोटालों की जड़ को जानता है, क्योंकि जब आखिर में उसकी उनके साथ किन्ही कारणों से खटपट हो गई, तब यह गड़बड़झाले खुलने का सिलसिलेवार क्रम शुरू हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक बड़ा ग्राम सभा में जो कुछ हुआ उसकी प्रबंध समिति को कभी भी भनक नहीं लगी अंत तक सब ठीक चलता रहा। मसला तो जांच तक छिपा रहा। लेकिन मजेदार बात यह रही कि जांच में इस बात का पूरी तरह घोटाले का सच हर बार किए गए ऑडिट में हुए लाभ की चोरी के द्वारा होता रहा। यह जांच में पूरी तरह साफ हो गया।

तभी तो वर्ष 2005-06 के ऑडिट में ही पहली गड़बड़ी पाई गई और जब जब सेवानिवृत्त ऑडिटर ने यहां का ऑडिट किया, गड़बड़झाला हर बार हुआ। मतलब साफ है की ऑडिटर और सचिव दोनों मिलकर इसे अंजाम देते रहे और तीसरा व्यक्ति किसका कहीं ना कहीं हिस्सेदार बनता रहा। जो अब इस सारे फसाद में सहकारिता के अंदरूनी हिस्से का सच बताने को आतुर है।

जांच हुई, लेकिन रिकवरी नहीं

विभाग के शिमला स्थित एडिशनल रजिस्ट्रार राजेंद्र सिंह राठौर भले ही दावा कर रहे हैं कि संबंधित ऑडिटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है, लेकिन क्या सचमुच में विभाग इतना बड़ा कदम उठा पाएगा? क्योंकि हमीरपुर जिला की कई सभाएं घोटालों की जद में हैं, उनकी जांच हो चुकी है लेकिन रिकवरी हो नहीं रही। ऑडिटर विभाग के निशाने पर चल रहे हैं। मगर किसी के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई हुई नहीं है। ऐसे में अब कोई बड़ी कार्रवाई होगी, ऐसी उम्मीद तभी की जा सकती हैं, यदि कोई उच्च अधिकारी राजनेताओं के दबाव को झेल कर, नया कारनामा करके दिखाए।

बल्यूट सभा में 141 फर्जी हिस्सेदार बनाए गए

इन्हीं ऑडिटरों की वजह से बल्यूट सहकारी सभा तीन करोड़ से ज्यादा के घोटाले की वजह बनी है। वहां 141 फर्जी हिस्सेदार बनाए गए, उनके नाम लोन लिया गया। इस सभा का ऑडिट भी ऐसे ही ऑडिटर्स ने किया है। लेकिन मजाल किसी की, उन पर कोई आंच भी आए। इस सभा के लगभग सभी लोगों का पैसा डूबने की आशंका इसलिए जताई जा रही है क्योंकि भरपाई करोड़ों के पैसे की होगी कहां से। कई लोगों ने 10 से 15 लाख तक अकेले जमा पूंजी के रूप में सभा में जमा करवा रखा था। कई के खाते में फर्जी लोन स्टैंड कर रहा है लेकिन विभाग की जांच मुकम्मल होने के बाद पुलिस के सुपुर्द कर दी गई है एफआईआर हो चुकी है। सचिव गिरफ्तार है, मगर अब होगा क्या? इसका किसी को मालूम नहीं। संबंधित ऑडिटर कहां है।

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