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इधर टेंडर के प्रोसेस में फंसा खनन विभाग, उधर अवैध खनन से कई खड्‌ड हो गईं खाली

खनन विभाग अब भी खड्डों से निर्माण सामग्री उठाने के लिए टेंंडर प्रोसेस किस तरह हो, इसके फेर में फंसा हुआ है। उधर...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:00 AM IST
खनन विभाग अब भी खड्डों से निर्माण सामग्री उठाने के लिए टेंंडर प्रोसेस किस तरह हो, इसके फेर में फंसा हुआ है। उधर खड्डे अवैध खनन से खाली होती जा रही हैं। यह सब जानते हुए भी सरकार और विभागीय स्तर पर कोई सक्रियता नहीं दिखाई जा रही, खड्डों से मेन सड़क के लिए बनाए संपर्क मार्ग पर रोकथाम को लगाए बैरिकेट का भी कोई अता-पता नहीं, खाली किनारे लगाए के लोहे के एंगल की नजर आ रहे हैं। विभाग और जिला प्रशासन की सुस्ती की वजह से लोगों को सस्ते दामों पर न निर्माण सामग्री मुहैया हो पा रही, न ही इस अवैध धंधे को चमकानों पर लगाम लग रही। इस तरह का रवैया देख कर लगता है कि चालान करने की जाे कार्रवाई कभी कभी हो रही वह सिर्फ दिखावे के लिए है।

सरकार के लेबल पर और निदेशालय के स्तर से कभी ई-टेंडरिंग से तो कभी ऑक्शन से बोली करवाने की ही बातें कई माह से हो रही हैं लेकिन फैसला किसी का भी नहीं लिया जा रहा है। पांच हेक्टेयर से कम वाले प्वाइंट जो जिला स्तर पर जो ऑक्शन होने वे भी नहीं हो सके हैं। प्रदेश में नई सरकार को बने एक माह हो गया है लेकिन अभी तक आम लोगों को सस्ती निर्माण सामग्री मुहैया करवाने को औपचारिकताएं पूरी नहीं करवाई गई। वहीं विभाग स्वयं कमाई के फेर में फंसा हुआ नजर आ रहा, क्यांेकि अगर ई-टेंडरिंग से ऑक्शन हुए तो तय राशि ही विभाग के हाथ आएगी, अगर खुली बोली से ऑक्शन होगी तो सभी इसे नाम करवाने को बड़ी रकम की बोली देकर भी अपनी प्रतिष्ठा बरकरार रखने को तैयार हो जाते हैं। कई बार तो 8-10 लाख की तय बोली 50 से 60 लाख तक जाती है। प्रदेश में खड्डों में से खनन पर लगी रोक को हटे और मंजूरी मिले भी एक साल से ऊपर का समय हो गया है।

नाल्टी पुल के पास अवैध खनन रोकने को लगाया गया बैरीकेट टूटा हुआ।


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