हमीरपुर

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साहब, करोड़ों की बसें फांक रही धूल, जनता की सुविधा को चला दो

साहब! हिमाचल परिवहन निगम के डिपो में करोड़ों की जेएनएनयूआरएम बसें धूल चाट रही हैं, उन्हें लाेगों की सुविधा के लिए...

Dainik Bhaskar

Apr 15, 2018, 02:00 AM IST
साहब, करोड़ों की बसें फांक रही धूल, जनता की सुविधा को चला दो
साहब! हिमाचल परिवहन निगम के डिपो में करोड़ों की जेएनएनयूआरएम बसें धूल चाट रही हैं, उन्हें लाेगों की सुविधा के लिए तो चला दो। कहीं ऐसा न हो यह खड़ी-खड़ी ही खराब हो जाएं। अब यह मांग उठाई है निगम के जुड़े संगठनों ने। इनका कहना है कि दर्जनों बसें एक साइड पर खड़ी कर दी हैं। कई रूट भी बंद पड़े हैं, उन्हें भी बहाल करने की शीघ्र जरूरत है जो आम लोगों के ही हित में है। इस बावत हिमाचल परिवहन मजदूर संघ के पदाधिकारी देवराज, ताराचंद और जितेंद्र पाल की उपस्थिति में पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल को भी मांग पत्र सौंपा है और आग्रह किया है कि उनकी इस बात को सरकार के समक्ष उठाकर इस पर शीघ्र करवाई जाए। पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों को हल करवाने में उचित कदम उठाए जाएंगे।

संघ का कहना है कि निगम को इलेक्ट्रिक टैक्सी सेवा को हमीरपुर से सुजानपुर व दूसरे क्षेत्रों में भी मनाली-कुल्लू की तर्ज पर चलाया जाना चाहिए। जनता की सेवा में निगम की बस सेवा पर्याप्त नहीं है, इसलिए सुजानपुर में बस डिपो को भी खोला जाना चाहिए। उन्होंने मांग उठाई है कि प्रशिक्षु परिचालकों के भविष्य को देखते हुए स्थाई नीति सरकार को बनानी चाहिए, क्योंकि इससे हजारों बेरोजगार प्रशिक्षित जुड़े हुए हैं।

उन्होंने धूमल से मांग उठाई कि उनकी मांग को वह सरकार से हल करवाएं ताकि उन्हें रोजगार मिल सके।

परिवहन मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने पूर्व सीएम धूमल को हमीरपुर में मांगपत्र सौंपा।

जम कर हो रहा शोषण

निगम के कौशल विकास भत्ता योजना के तहत परिचालकों का प्रशिक्षण ले चुके युवाओं का कहना है कि पूर्व सरकार के समय उनका जम कर शोषण हुआ है जो अभी तक जारी है। धूमल को शनिवार को यहां सौंपे मांग पत्र में पृर्थी चंद आजाद, प्रताप चंद, विजय कुमार, संजीव पटियाल, नसीव कुमार, दीपक ठाकुर, सुशील शर्मा, कंचन शर्मा, वीना देवी, पूनम, रंजना, अजय कुमार, राजेश कुमार सहित दर्जनों प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके व कर रहे बेरोजगारों ने कहा कि हिमाचल के सभी जिलों के विधानसभा क्षेत्रों से प्रार्थी निगम में स्थाई निति बनने पर रोजगार पर लग सकते हैं। निगम में संवाहक के पदों को उनके द्वारा भरा जाए ताकि वह मानसिक तनाव से ग्रसित न हो। उनका कहना है कि जिस तरह 2003 में बस सहायक साढ़े तीन फीसदी कमीशन पर रखे गए थे, उसी तर्ज पर इस वर्ग से भी रखे जाएं। इस योजना के तहत उन्हें संवाहक के रुप में चलाया जा रहा है, उन्हें सिर्फ 45 दिन की ट्रेनिंग के नाम बसों के साथ चलाया जाता है।

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