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गरीबों को बने आशियाने अब मेडिकल प्रशिक्षुओं को मिलेंगे, नप कमाएगी 5 करोड़ 40 लाख रुपए

गरीब परिवारों को योजना के तहत बनाए आशियानों को बेचकर नगर परिषद 5 करोड़ 40 लाख की राशि कमाएगी। यहां अब मेडिकल काॅलेज के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 16, 2018, 02:00 AM IST

गरीब परिवारों को योजना के तहत बनाए आशियानों को बेचकर नगर परिषद 5 करोड़ 40 लाख की राशि कमाएगी। यहां अब मेडिकल काॅलेज के प्रशिक्षु डॉक्टर्स को बसाने की तैयारी चल रही है। इसका मसौदा बनाकर नगर परिषद ने शहरी विकास विभाग को अप्रूवल के लिए मामला भेज दिया है। जहां से इस पर हरी झंडी मिलते ही इन तैयार फ्लैटों को मेडिकल कॉलेज के लिए हैंडओवर किया जा सकेगा। हालांकि, इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि नगर परिषद एरिया में इनके लिए तय फ्लैट के मुताबिक पात्र गरीब परिवार नहीं मिल पाए हैं, ऐसे में जो 18 लोगों की सूची तैयार हुई, उन्हेंं भी यह अलॉट किए जाएंगे।

54 फ्लैट मेडिकल कॉलेज को : यहां हथली खड्ड के पास करीब 72 फ्लैट तैयार किए गए हैं, जब यह योजना शुरू हुई थी, तो शहर में जिनके पास अपनी भूमि व मकान नहीं हैं उन्हे देने की योजना थी। केंद्र सरकार की ओर से इसके लिए फंडिंग हुई थी। ताकि यहां ऐसे गरीबों को यह फ्लैट नि:शुल्क दिए जा सकें।

हथली खड्ड के पास करीब 72 फ्लैट तैयार किए|हथली खड्ड के पास करीब 72 फ्लैट तैयार किए, लेकिन बीच में इसका कार्य धीमी गति से चलने के कारण इसकी कॉस्ट वैल्यू बढ़ती गई और तैयार होने पर एक फ्लैट गरीबों को अलॉट किया जाना था, तो इससे प्रति परिवार 3 लाख तक की राशि तय थी। लेकिन यहां पात्र न मिल पाने से यह योजना लंबी खींचती चली गई। अब यहां 18 गरीब परिवारों की नगर परिषद ने सूची तैयार की है। इसके साथ ही जो फ्लैट अन्य 54 हैं, उन्हें मेडिकल कॉलेज को प्रति फ्लैट 10 लाख में देने का मसौदा नगर परिषद के हाउस ने पास कर विभाग को भेजा है। ताकि यहां मेडिकल कॉलेज यदि शुरू हुआ तो वहां जो प्रशिक्षु डॉक्टर्स होंगे उन्हें इनको मुहैया करवाया जा सके।

हथली खड्ड के पास बने फ्लैट

नप ने 4 करोड़ की राशि खर्च की

नगर परिषद इनके निर्माण पर 4 करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च की जा चुकी है। अब इस पर चूंकि इसलिए कार्य तेज हो गया है, क्योंकि इसी सत्र से मेडिकल कॉलेज को चलाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री ने भी बात कही है। हालांकि, यह तय तो एमसीआई के दौरे के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट के आधार पर ही तय होना है, लेकिन इतना जरूर है कि इसे चलाने के लिए एमसीआई के नॉर्म्स को पूरा करने के लिए जिस रीजनल अस्पताल को अटैच किया जा रहा है। उसमें भी कार्य ने तेजी पकड़ी है। जाहिर है प्रशिक्षुओं को रहने के लिए भी यह जरुरी है। यह फ्लैट जहां बनाए गए है वहां से रीजनल अस्पताल भी कुछ ही दूरी पर है और प्रशिक्षुओं आने जाने में टांसपोर्ट का भी ज्यादा बोझ नहीं पड़ सकेगा।

अभी तक भी हैं खाली |बेशक यह फ्लैट तैयार तो हो गए हों, लेकिन यह अभी तक खाली ही पड़े हैं। यहां वैसे जो नप को शहर में 18 पात्र मिल पाए हैं, उन्हें यह कब अलॉट होने हैं। इस पर भी नप में माथा पच्ची ही चल रही है। पहले यहां योजना के तहत 100 से ज्यादा फ्लैट बनाने की योजना थी, लेकिन बढ़ती कॉस्ट वैल्यू के कारण अभी तक यह 72 ही तैयार हो पाए हैं। वैसे इनके डोर न खुलने के कारण यह अपना रंगरूप भी बदल रहे हैं। जाहिर हैं इन्हें यदि मेडिकल कॉलेज को अलॉट किया जाता है । इसी सत्र से यहां यह शुरू होता है तो स्वास्थ्य विभाग की भी एक बड़ी समस्या प्रशिक्षुओं के रहने की हल हो सकती है।

मेडिकल कॉलेज को देने के लिए 54 फ्लैट तय किए हैं। गरीब पात्र परिवार न मिलने के कारण समस्या थी, लेकिन जो 18 पात्रों के आवेदन आए हैं उनको भी अलॉट किए जा सकेंगे। क्योंकि सभी मेडिकल कॉलेज को देने की योजना नहीं है। हाउस में प्रस्ताव पास कर मामला अप्रुवल को शहरी विकास विभाग को भेज दिया है। दीप कुमार बजाज, उपाध्यक्ष नगर परिषद हमीरपुर

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