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हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में इसी सत्र से शुरू हो सकती हैं क्लासें, पर्याप्त व्यवस्था

इसी सत्र से बैच बिठाने के संकट से गुजर रहे हमीरपुर के डाॅ. अार के मेडिकल कॉलेज का एमसीआई की टीम ने शुक्रवार को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 21, 2018, 02:00 AM IST

इसी सत्र से बैच बिठाने के संकट से गुजर रहे हमीरपुर के डाॅ. अार के मेडिकल कॉलेज का एमसीआई की टीम ने शुक्रवार को निरीक्षण किया। दिन भर जांच करने के बाद संकेत यही मिले कि कक्षाएं शुरू हो सकती हैं। अलबत्ता यहां कई खामियां अभी बरकरार हैं, मगर फैकल्टी और इन्फ्रास्ट्रक्चर ओके है । एमसीआई की टीम शुक्रवार को सुबह पहुंची और दिनभर मेडिकल कॉलेज की तैयारियों का बारीकी से निरीक्षण किया। तबादला होकर दूसरे अस्पतालों से यहां पहुंचे डॉक्टर और अन्य स्टाफ की भी जांच की । तभी तो यह टीम इतना मान रही है कि कक्षाएं शुरू करने लायक व्यवस्था यहां हो गई हैं, लेकिन उन्हें केवल रिपोर्ट सब्मिट करनी है और आखिरी फैसला एमसीआई ही करेगा।

पिछले एक सप्ताह से एमसीआई की टीम के आने की इंतजार में यहां का प्रशासनिक अमला रोजाना ही तैयार दिखता था। शुक्रवार को आिखर टीम पहुंची। एमसीआई की टीम के तीन सदस्यों में एक बीएस शाह का कहना था कि उन्होंने जो कुछ यहां जांचना था, वह जांच लिया है। इसकी रिपोर्ट आज ही शाम तक सबमिट कर दी जाएगी। क्योंकि 30 अप्रैल से पहले इस बारे में एमसीआई को फैसला लेना है। उन्होंने यह भी बताया कि टीम का यह तीसरा विजिट है और पिछली मर्तबा दो बार के टीम के जो दौरे हुए हैं , उनके मुकाबले में इस बार काफी कुछ सुधरा हुआ है।

दिनभर तैयारियों का टीम ने

बारीकी से निरीक्षण किया

एमसीआई की टीम रीजनल अस्पताल में सुविधाओं और नार्मस का जायजा लेते हुए

एमएस का मामला शीघ्र ही हल हो जाएगा

मेडिकल कॉलेज में अभी कई तरह की समस्याएं हैं। यही स्थिति क्लियर नहीं है कि रीजनल अस्पताल के एम एस इस मेडिकल कॉलेज की कुर्सी पर बैठेंगे कि नए एमएस के हवाले यहां की व्यवस्था होगी। उधर, एडीशनल डायरेक्टर विक्रम महाजन का कहना था कि एमएस का मामला शीघ्र ही हल हो जाएगा। एमसीआई टीम के तीनों सदस्य जब यहां पहुंचे, तो सभी ने अलग-अलग तरह की व्यवस्थाओं को जांचने का जिम्मा संभाल लिया। एक सदस्य ने आवासों को लेकर व्यवस्था जांची, जबकि दूसरे ने अस्पताल की भीतरी व्यवस्था को और तीसरे ने वार्डों की व्यवस्था को देखा, जिन्हें बेड जोड़कर मुकम्मल रूप दिया गया है।

टांडा मेडिकल कॉलेज से करीब 15 सीनियर फैकल्टी के लोगों को था बुलाया

टीम शाम तक प्रिंसिपल डॉ अनिल चौहान के आॅफिस में बैठकर रिपोर्ट तैयार करती रही। उधर, जो डॉक्टर और अन्य फैसिलिटी दूसरे अस्पतालों से यहां लाई गई थी। उस में से ज्यादातर लोग जाने की तैयारी में दिख रहे थे। टांडा मेडिकल कॉलेज से करीब 15 सीनियर फैकल्टी के लोगों को बुलाया गया था। अब गेंद एमसीआई के पाले में है कि बह इस कॉलेज को इसी सत्र से चलाने के लायक मानती है या नहीं?

टीम ने माना, कक्षाएं शुरू करने लायक व्यवस्था हो गई, केवल

रिपोर्ट सब्मिट करनी है, आखिरी फैसला एमसीआई ही करेगा

85 लोगों की जो फैकल्टी, महत्वपूर्ण हिस्सा |पिछली मर्तबा बहुत खामियां थीं, इस बार तैयारी दिखती है। उन्होंने यह भी बताया इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक हो गया है और सबसे महत्वपूर्ण फैकल्टी का हिस्सा रहता है। 85 लोगों की जो फैकल्टी मौजूद है वह सबसे महत्वपूर्ण है। इस मेडिकल कॉलेज को चलाने के लिए यह पूछे जाने पर कि फैकल्टी तो टीम के लौटने के बाद ही साथ में चली जाएगी। । उन्होंने कहा कि यह समस्या उनकी नहीं है। उन्होंने गायनी विभाग पर उठाए सवाल के जवाब में कहा कि बहुत अच्छा है और डेंपनेस को लेकर यहां अगर कुछ खामियां हैं तो वह धीरे-धीरे सुधर जाएगी। क्योंकि उस हिस्से का ज्यादा इस्तेमाल अभी नहीं होगा। कुल मिलाकर नीट एंड क्लीन है यह अस्पताल।

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