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रिहायशी इलाकों में खुलेआम चल रहे कबाड़ के स्टोर, सुरक्षा के नहीं प्रबंध

Dainik Bhaskar

Apr 21, 2018, 02:00 AM IST

Hamirpur News - शहर के कई रिहायशी इलाकों में कबाड़ के स्टोर खुलेआम व्यवसायिक तौर पर चल रहे हैं, मगर इन्हें लोगों की सुरक्षा को...

रिहायशी इलाकों में खुलेआम चल रहे कबाड़ के स्टोर, सुरक्षा के नहीं प्रबंध
शहर के कई रिहायशी इलाकों में कबाड़ के स्टोर खुलेआम व्यवसायिक तौर पर चल रहे हैं, मगर इन्हें लोगों की सुरक्षा को देखते हुए वहां से बाहर शिफट करने के लिए कोई कुछ नहीं कर रहा है। एक दिन पूर्व कबाड़ स्टोर में हुए आगजनी के हादसे से एक बार फिर बड़ी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। बाजार में कई ऐसे कबाड़ के स्टोर हैं, जो तंग गलियों के बीच चल रहे हैं, लेकिन उन्हें वहां से हटाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कुछ नहीं किया जा रहा है। किसी भी हादसे के वक्त लोगों की जान माल का खतरा यहां हमेशा मंडरा रहा है। हालत यह है कि एनएच और स्टेट सड़कों पर भी कबाड़ के यह स्टोर शहर में आम देखे जा सकते हैं। इन्हें हटाने और सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता करने को लेकर प्रशासन की नींद कब टूटेगी यही बड़ा सवाल है। शहर के कई वार्डों में अभी भी दशकों से कबाड़ के कई स्टाेर रिहायशी इलाकों में ही चल रहे हैं। रोजाना यहां कबाड़ आता और जाता है, जिनमें कई तरह की चीजें शामिल होती हैं, जो आगजनी के समय कभी भी कोई विस्फोटक स्थिति खड़ी कर सकती है। वीरवार को कबाड़ के जिस स्टोर में आग लगी वहां पास के घरों तब भी यह आग पहुंची और उनका काफी नुकसान कर दिया। ऐसे हादसे कभी भी कोई भयंकर बड़ी दुर्घटना कर सकते हैं, क्योंकि आसपास काफी तादाद में लोगों के घर हैं।

कहां-कहां है कबाड़ स्टोर | स्थानीय पीएनबी बैंक के ठीक सामने वार्ड नंबर 6 में एक दशकों पुराना कबाड़ का स्टोर है। प्रकाश लाॅज के पीछे भी ही ऐसा एक स्टोर है, जहां वीरवार को हादसा हो चुका है। स्थानीय पेट्रोल पंप के पास स्टेट हाईवे सड़क के ठीक किनारे कबाड़ का स्टोर है। पक्का भरो के पास भी एनएच सड़क के किनारे ऐसा स्टोर है।

शहर से शिफ्ट करने के निर्देश |करीब सात-आठ साल पहले पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के दृष्टिगत कबाड़ के ऐसे स्टोरों को बाजार के बीच से खुली जगह पर बाहर शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन बावजूद इसके अधिकतर लोगों ने इन्हें बाहर शिफ्ट नहीं किया और अभी भी यह रिहायशी इलाकों के बीच में ही स्थापित है। कबाड़ की लोडिंग-अनलोडिंग भी मेन सड़कों पर ही की जाती है। किसी बड़े हादसे के बाद ही अगर नींद टूटेगी तो शायद उसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ सकता है।

ये है समस्या




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