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पूर्व सैनिकों के लिए ईसीएचएस तो खोले, दवाइयां नहीं मिलती

राज्य के हर जिला में मिनी बेस अस्पताल खुले तो वहां आर्मी के रेगूलर डॉक्टर ओर पैरा मेडिकल स्टॉफ होना चाहिए, ताकि...

Dainik Bhaskar

Apr 22, 2018, 02:00 AM IST
पूर्व सैनिकों के लिए ईसीएचएस तो खोले, दवाइयां नहीं मिलती
राज्य के हर जिला में मिनी बेस अस्पताल खुले तो वहां आर्मी के रेगूलर डॉक्टर ओर पैरा मेडिकल स्टॉफ होना चाहिए, ताकि हिमाचल के 1 लाख से ज्यादा पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए समस्याओं से दो-चार न होना पड़े। पूर्व सैनिकों के सम्मेलन में अब पूर्व सैनिकों का रोष भी सामने आने लगा है। कई पूर्व सैनिकों का कहना था कि जो ईसीएचएस मौजूदा समय में खोले गए हैं, उनमें जहां दवाइयों का अकाल पड़ा हुआ है। वहीं, स्पेशलिस्टों की कमी के कारण भी समस्या ओर गंभीर हो रही है। बुजूर्ग अवस्था में पूर्व सैनिकों को चक्कर लगाने से समस्या हल नहीं हो पाती, बीमारियां थमने की बजाए बढ़ जाती हैं। पूर्व सैनिकों के सम्मेलन में हिमाचल पूर्व सैनिक संघर्ष समिति के अध्यक्ष स्काड्रन लीडर बृजलाल धीमान का कहना था कि राज्य के कई जिलों में तो पूर्व सैनिकों की यह बड़ी समस्या हल नहीं हो पा रही है। ऐसे में अब जरूरत है कि मिनी बेस अस्पताल खोले जाएं ।

हमीरपुर: पूर्व सैनिक सम्मेलन में अपनी बात रखते बृजलाल धीमान

पूर्व सैनिकों ने सम्मेलन में कई समस्याओं पर चर्चा की

9 हजार बेसिक से कहां हो खर्च

कई पूर्व सैनिकों के परिवारोंे के बच्चे रोजी रोटी के सिलसिले में बाहरी राज्यों की और रुख कर चुके हैं, कुछ युवा पीढ़ी बुजूर्गो को साथ रखना नहीं चाहती, ऐसे में जो विधवा हैं, उनकी पेंशन मात्र 9 हजार बेसिक ही है। बढ़ती महंगाई में खर्च कैसे चले समस्या है। सरकार को चाहिए कि वह वीर नारियों की पेंशन को पूर्व सैनिकों के मुकाबले 10 फीसदी ज्यादा दे, ताकि वीर नारियों के सामने आर्थिक समस्या न हो। धीमान का कहना था कि जो जवान 9 साल रेगूलर और 6 साल रिजर्व में भर्ती हुए थे, उनको रेगूलर पेंशन का प्रावधान होना चाहिए।

वन रेंक-वन पेंशन को लागू

सूबेदार रोशन लाल का कहना था कि राज्य में एक लाख से पूर्व सैनिक हैं, यदि मांगों को मनवाना है तो एक मंच तले सभी को एकत्र होना होगा । एकत्र होने से किसकी क्या समस्या है, उसका भी पता चल सकेगा। इस मौके मेजर वर्मा का कहना था कि जो समस्याएं है, उनको सरकारों का हल करवाना ही होगा। जनवरी 2014 से वन रेंक-वन पेंशन को लागू किया गया था, लेकिन इसे जिस तरह से पार्लियामेंट में निर्णय लिया है, उसी तर्ज पर लागू किया जाना चाहिए। हरी चंद, प्रकाश चंद, कांतादेवी, केसर चंद, आरडी ठाकुर, देशराज, ईश्वर दास ने भी अपनी समस्याओं को रखा।

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